प्रिय पाहुन, नव अंशु मे अपनेक हार्दिक स्वागत अछि ।

रविवार, 12 जनवरी 2014

झँपल क्रांतिकेँ उघारि दियौ

गजल-1.80

मिझाएल आगिकेँ पजारि दियौ
कते जोश अछि चलू भियारि* दियौ

सुनू मरि रहल हियाक मारल सब
मुसकिया कऽ साँस धरि नमारि दियौ

मनुख छी तँ सगर नेह-फूल बनू
अपन मनक काँटकेँ बहारि दियौ

रहब कोन विधि अहाँ नरक जगमे
सही योजना चलू विचारि दियौ

सुनू हमर बाँहिमे बचल बल नै
"अमित" झँपल क्रांतिकेँ उघारि दियौ

1221-2121-2112
अमित मिश्र

1 टिप्पणी:

  1. डूबए सुरुज जग भइले अंधेर..,
    सांझी बतियाँ करू बारि दियौ.....

    उत्तर देंहटाएं