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रविवार, 19 नवंबर 2017

कथीपर कानी?

214
कथीपर कानी ?

हम गाममे रहि खेती करैत छी आ हमर भाइ शहरमे सपरिवार रहि नोकरी करैत छथि ।एहि बेर छठिमे सपरिपार दिनकर-दिनानाथकेँ दुआरिपर हाजरी दै लेल आएल छलथि ।हमर छोटका बेटा आ हुनकर बौआ प्रिंस एकदतरिये छथि ।दुनू चौथामे पढ़ै छथि ।एक साँझ हम खेतक आरि-कोन ठीक क' आयलौं आ दलानपर बैसि कने सुस्ताइ छलौ त' दुनू भैयारीकेँ बतियाइत सुनलौं ।प्रिंस हमर बौआसँ पुछलक-"तोरा इसँकूलमे प्रेयर के बाद सर जी की सब करै छथुन ?"
हमर बौआ कहलक-"भनसियाकेँ चाउर-दालि-आलू सब दै छथिन ।"
प्रिंस आश्चर्य करैत बाजल-"से किए !...अच्छे क्लासमे सरजी नीकसँ पढ़बै छथुन ने ?"
हमर बौआ फेर जबाब देलक-"नै, हाजरिये बनबैमे आ हल्ला शांत करैमे बीजी रहै छथिन ।डेढ़ सौ विद्यार्थी छियै ने ।"
"ओह...लंच कते देरकेँ होइ छौ ?"
"दू घंटा ।छौ सौ बच्चा पाँतिमे खाइ छै ने ।"
प्रिंस आश्चर्यसँ आँखि नम्हर करैत बाजल-"बाप रे बाप, ई त' लंच नै भेलै, भोज भ' गेलै ।अच्छे तकर बाद की होइ छौ ?"
हमर बौआ खुश होइत बाजल-" तकर बाद छुट्टी होइ छै..कुट्टी काटै लए ।"
"एँ...मने खेल, ड्रॉइंग, म्यूजिक सब नै होइ छौ की ?"प्रिंस नाँक टेढ़ करैत बाजल जेना कि घृणा क' रहल होइ ।
"होइ छै ने ।भरि दिन त' क्लासमे खेलते रहै छी ।" बौआक जबाब सुनि प्रिंस कहलक-"मने तोरा इस्कुलमे पढ़ाइ छोड़ि बाँकी सब चीज होइ छौ ...हा ..हा..हा ।
प्रिंसक हँसी हमर छातीकेँ छलनी क' देलक ।हम सोचि नै पाबि रहल छलौं जे हम अपन गरीबीपर भोकारि पारि कानी वा अपन सरकारी शिक्षा व्यवस्थापर ?

अमित मिश्र

शुक्रवार, 20 अक्तूबर 2017

मैथिली गजल- जिनगी हमर धोखा दैते ने रहलै

जिनगी हमर धोखा दैते ने रहलै
सब दिन जहर ओ परसैते ने रहलै

कोना हम रहै छी पुछलक ने कहियो
सदिखन नोरमे डुबबैते ने रहलै

लेलौं मानि हम हारल छी तैयो ओ
बनि ओ काल बस पटकैते ने रहलै

जे किछ माँगलौं से देलक ने कहियौ
जे छल हमर से लुटबैते ने रहलै

अंतिम ई निहोरा दिअ एक्के माँफी
बाँकी दिन मनसँ कनबैते ने रहलै

2221-2222-222

सोमवार, 10 जुलाई 2017

मैथिली लघुकथा-भार

213. भार

दुनू पक्ष आर्थिक रूपेँ कमजोर छल ।बियाहक मासे भरि बाद लड़काक बाबू आ लड़कीक बाबूमे घमासान तर्क-वितर्क शुरू भ' गेलै ।लड़काक बाबू समधिकेँ कहलनि-" सावन आबैसँ पहिने बिदागरी क' दियौन ।"
"रह' दियौ ने, एखन ओत' मोनो नै लागतै ।नव विवाह भेलैए, खेलै खेलाइक दिन छै एखन ।"
"ई त' केवल मोनक वहम छै ।मोन लागनि वा नै लागनि रहैक त' एतै ने छै ?"
"हँ से त' छैहे, मुदा सावनमे मधुश्रामनी होइ छै ।कने रमन-चमन होइ छै ।ई सब त' नैहरेमे नीक लागै छै ने ।"
"रमन-चमन करैसँ मतलब छै आकि पूजा करैसँ ? एतै पूजि लेथिन ।कोनो दिक्कत नै हेतै ।"
"यौ एखन पढ़ै छै ।ओत' जेतै त' ट्यूशन सब छूटि जेतै ।अहाँ त' बुझिते छी ने, इन्टर सबमे एक दिन ट्यूशन छुटलाक बाद आगू किछु समझ नै आबै छै ।"
"ओकर चिन्ता हमरो छै ने ।एत' कि ट्यूशन नै भेटै छै ? एतै ट्यूशन पकड़ा देबै ।"
"मुदा..."
"मुदा-तुदा किछ नै ।या त' बिदा क' दियौन आ नै जीवन भरि ओतै राखियौ ।कुटमैती आदमीक जरूरत पूरा करै लेल केने छलियै, कोनो मुँह देखै लेल नै ।"
समधिक एहि धमकीसँ लड़कीक बाबू मजबूर भ' गेलनि आ बिदागरी क' देलनि ।एक दिस नैहर, दोस्त आ पढाइ छुटि जेबाक कारणे पुतौह दुखी छलनि त' दोसर दिस मधुश्रामनीक भार दैक योग्य नै हेबाक कारणे बेइज्जत होइसँ बचि जेबाक लेल सासुरके खुशी छलनि ।

मैथिली कथा- नाइट ड्यूटी

212. नाइट ड्यूटी

गर्मी बहुत बेसी छलै आ तेँ एसियोमे नींद छुमंतर भ' गेल छलै ।रातिक 12 बाजि रहल छल ।लॉनमे टहलैत देखलियै जे सामने बला मकानसँ एकटा युवती बाहर निकललै ।कद-काठी देख आंदाज लागल जे ई शर्माक बेटी छै ।बड नीक पान बनबैत छै शर्मा ।एत्तै गलीक शुरूआतेमे एकटा कटघारा बैसेने छै ।ओहि दोकानसँ घरक किराया आ पाँच प्राणीक भोजन-साजन कहुना क' चला लै छै ।बड मिलनसार छै शर्मा आ तेँ हमरासँ खूब मेल बैसै छै ।एसगर जाइत देख कने आश्चर्य भेल मुदा फेर सोचलौं जे ट्रेन-त्रेन पकड़ै लेल जाइत हेतै ।हमरा ऐ सँ की !दू-दिन बाद फेर निन्न नै भेल आ लॉनसँ शर्माक बेटीकेँ फेर देखलियै ।मोन कने आशंकित भेल ।आब त' हम जबरदस्तियो जागि क' ओकरापर नजर राख' लागलियै ।ओ सब दिन नियत समयपर बनि-ठनि क' जाइ छलै ।बगलमे रेलवेक पुरना क्वार्टर छलै आ हवाहवाइमे सुनने रहियै जे ओत' गर्म माँउस किरायापर भेटै छै ।मोनमे घनेरो  प्रश्न उठि गेल ।शर्मा आ ओकर बेटी हमर नजरिमे खसि रहल छल मुदा असलियत जनबाक लेल हमर सी.आइ.डी मोन कछमछा रहल छल ।अगिला दिन ओकर पछोर ध' लेलियै ।रेलवे क्वार्टर पार भ' गेल ।ओकरा रोकि पुछबाक मोन होइ छल ,"गै छौड़ी एते राति क' कत' जाइ छहीं ?"
मुदा मंत्रमुग्ध भेल ओकरे पाछू भम चलल जा रहल छलियै ।ओ एकटा बड़का बिल्डिंग लग किछु पल ठार भेल ।अगल-बगल देख बिल्डिंगमे घुसि गेल ।ओकरे पाछू हमहूँ घुसि गेलौं ।बोर्डपर नाम देखलियै एयरटेल कस्टमर केयर ।जा किछु सोचितौं गार्ड हमरा रोकि लेलक ।हम भीतर जाइ लेल जोर लगाब' लागलौं ।जा धरि हमर चेतना घुरल ता धरि हो-हल्ला भ' गेलै ।आवाज सुनि लोक जुटि गेल ।हमरा देख शर्माक बेटीक कंठ सुखि गेलै ।ओ निहोरा कर' लागल "अंकल, हमर पापाकें किछु नै कहबै ।हम सबसँ नुका क' एत' पार्ट टाइम जॉब करैत छी ।घरक हालत हमरा नै देखल गेल ।गरीबीक जीवन बड दुखदाइ होइ छै ।प्लीज अंकल पापाकेँ नै कहबै ।"
हम शंकाक चलते लाजे धरतीमे धसल जा रहल छलहुँ आ  ओ रसे रसे ड्यूटी निभेबाक लेल सीढ़ी चढ़ल जा रहल छलै ।

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

मजबूरीमे

211. मजबूरीमे

घरमे वियाहक माहोल छल ।शहनाईक रेकॉर्डेड धुन बाजि रहल छल ।जिम्हरे देखू तिम्हरे हँसी-ठहक्काक स्वर उत्पन्न भ' रहल छल ।रेशमा स्थिर मुर्ती जकाँ मेंहदीक विध पूरा करबा रहल छली ।सखी सब ओकरा चारू कातसँ मधुमाँछीक छत्ता जकाँ घेरने छल ।चारि टा एक्सपर्ट हुनरबाज सखी ओकर दुनू हाथमे मेंहदीक डिजाइन बनाबैमे व्यस्त छल ।तखने एकटा सखि चौल करैत पुछलकै-"एँ गै पहुनक नाममे की लिखियौ जानू, डार्लिंग या स्वीटीपाइ ?"
"किछु नै ।पूरा नाम लिख दहीं अर्णव" रेशमा उदासे स्वरमे कहलकै ।
"मुदा तोहर मिस्टरक नाम त' आलोक छौ ने !"सखि आश्चर्यसँ आँखि पैघ करैत पुछलक ।
"हँ मुदा प्रेम त' हम अर्णवसँ केलियै ।मजबूरी आ दबावमे ई वियाह क' लेबै तकर मने ई त नै छै जे हमर मिस्टर राइटक नाम चेन्ज भ' जेतै ।"
रेशमाक जबाब सुनि सखि सबकेँ किछु नै फुरा रहल छलै जे मजबूरीमे लेल एतेक पैघ फैसलाक परिणाम कतेक दिन धरि मर्यादाक पालन क' सकतै !दाम्पत्य जीवनमे ई कतेक दिन धरि अमृत घोरबाक काज करैत रहतै !