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मंगलवार, 13 नवंबर 2018

चानक यात्रा

बाल कविता- 5.29
      चानक यात्रा

चान पुनिमक देख बाजल
एक   दिन   बबलू   बौआ
जेबै   चानपर  हमहूँ मम्मी
द'   दे   तूँ   किछ    ढौआ

धरतीसँ     लागैए     हमरा
एकटा      सुन्दर       गोला
भाड़ापर   ल'   लेबै   मम्मी
एकटा          उड़नखटोला

किछ  जोड़ा  कपड़ा   लेबै
आ करबै   नै  बड  ओजन
कने  पौर   दे  द'ही   मम्मी
भरि  रस्ता     लए   भोजन

रस्तामे   भेटत    जँ   मम्मी
कोनो     लोकक       बस्ती
ओहि   ग्रहपर  कने  ठहरबै
करबै   किछु   पल     मस्ती

पहुँचि   ओत'  उपराग   देबै
हम    नै      बुझबै      गामा
घर    ने  कहियो  आबै   छी
अहाँ      केहन   छी     मामा

©अमित मिश्र

बड़की दीदी छोटकी दीदी

5.28 बड़की दीदी छोटकी दीदी

बड़की दीदी बड़ा खेलाड़ी
संग हमरो खेलै छै
छोटकी दीदी गप्पी भारी
सदिखन गप्प ठेलै छै
खेलैत-कूदैत भरि दिन हमरा
बड़की दीदी थकबै छै
बाजि बाजि क' छोटकी दीदी
कान हमर त' पकबै छै

खौंझ क' मम्मी खूब दबारै
दुनू लेल त' झखै छै
फोड़ि क' कैरम लूडो फाड़ै
कानमे रूइया  रखै छै
मुदा ने कोनो चिन्ता ककरो
आदत नै बदलै छै
सपनोमे एक बल्ला भाँजै
गप एकटा उझलै छै

सैंतल जाजिम दुनू उघारै
नाम हमर त' लगबै छै
रूसि-फुलि जँ ल'ग ने आबी
बड़ा दुलारसँ बजबै छै
भरि दिन खेल करै छै तैयो
राति पढ़ैमे बितबै छै
कखनो कखनो समय बचा क'
हमरो दीदी पढ़बै छै

बीजगणित

5.27 बीजगणित

हिन्दी इंग्लिश खूब पढ़लियै
टॉप केलहुँ हम जीकेमे
मुदा गणितसँ पाला पड़िते
हारि गेलहुँ हम ठीकेमे

नै बेसी हम समय लगेलियै
ल०स० म०स० सिखैमे
मुदा हैंग माँथा क' जाइए
मान ब्याज केर लिखैमे

सोसल ग्रामर खूब रटलियै
नंबर आनलहुँ नीकेमे
बीजगणितसँ सोझा होइते
माँथ धुनलियै ठीकेमे

आबि गेलैए बदरा

5.26 आबि गेलैए बदरा

आइ झमाझम बर्षा बरसल मन भ' गेलै चंगा
दुरखा ओलती आंगन सेहो आइ बनल छै गंगा

करिया मेघ उड़ै छै जेना नाह चलै छै पानी
कखनो पुरबा कखनो पछबा हवा करै मनमानी

ठुमरी गजल दादरा सुनबै बेंगक साजल पाँती
कौआ मैना सुग्गा सुटकल बिसरि गेल छै प्राती

सहसह चाली चुट्टी पिपड़ी परेशान छै बाछी
भोरेसँ आइ नहा नहा क' मगन भेल छै गाछी

घटाटोप फेर केने आबै आइ ने छोड़तै अदरा
पोखरि-झाँखरि नदीकेँ भरतै आबि गेलैए बदरा

घोघो रानी कतेक पानी

5.25 घोघो रानी कतेक पानी

घोघो रानी कतेक पानी ?
बात एगो तूँ बतबें नानी

नभमे कते तरेगण लटकल ?
राति इजोरिया किए छिटकल ?
कते इजोतक मोटरी बान्हने
सूरज भरि दिन किए भटकल ?

मेघ कत'सँ आनै पानी ?
घोघो रानी कतेक पानी ?

तितली किए फूलपर लुधकल ?
मूसा किए बिलमे सुटकल ?
देख दलानपर नव लोककेँ
किए सभटा कुत्ता हुलकल ?

गाइ केर भोजन सानी ?
घोघो रानी कतेक पानी ?

किए लत्ती सगरो लतरल ?
धरती छै कत' धरि पसरल ?
तिनबटिया चौबटियासँ जुड़ि
कारी सड़क कत' धरि चतरल ?
किए हवा करै मनमानी
घोघो रानी कतेक पानी ?

रसगर जामुन

5.24 रसगर जामुन

देखैमे गोल गोल
रंग छै कारी
जामुन छै रसगर
खाउ भरि थारी

गुद्दा छै मोट मोट
छोट छै बिच्चा
गाछसँ टुटि टुटि
खसलै निच्चा

कम्मे छै पात पात
बेसी छै फ'ले
पानिसँ धोइ धोइ
मुँहमे ध' ले

कम्मे छै मीठ मीठ
कम्मे छै खट्टा
बिकै छै हाटपर
भरि क' छिट्टा

मनसँ जे खाउ खाउ
खुश भ' जाउ
अछि बेसी बचल  त'
हमरो खुआउ