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शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

हमर बगय

अझुका रचना- बाल कविता
290.हमर बगय

चूड़ीदार पैजामापर त'
उज्जर कुर्ता बड़ चमकय
तैपर मोदी बंडी धेलौं
केहन लागैए हमर बगय ?

कॉलर ऊँच अंगापर त'
कॉटेन जींस बड़ चमकय
तैपर टोपी उनटा धेलौं
केहन लागैए हमर बगय ?

चमकौआ अंगापर त'
करिया कोट बड़ चमकय
तैपर ललकी टाइ चढ़ेलौं
केहन लागैए हमर बगय ?

सूरजकेँ भेलै सर्दी

अझुका रचना-बाल कविता
289. सूरजकेँ भेलै सर्दी

सूरज रामकेँ भेलै सर्दी
खसलै बनि क' ओसक झीसी
तरेगण सभमे पटलै सर्दी
खसलै बनि कुहेसक झीसी

जाड़क मारल सूरूज पड़ेलै
जा क' सीरक त'र नुकेलै
तें त' भेलै रौद निपत्ता
सगरो भेल कुहेसक सत्ता

बोखार भैलैए सौकेँ पार
देहक दर्द नै छै सम्हार
बनि क' डाक्टर होउ तैयार
करियौ बौआ अहाँ उपचार

ककबा दाँत बला छै

आझुका रचना- बाल कविता
288. ककबा दाँत बला छै

कुर्सीकेँ छै बाँहि दुइ टा
काज मुदा नै क' सकतै
टेबुलकेँ छै पएर चारि टा
डेग एको नै चलि सकतै

माँथा त' गदहोकेँ होइ छै
बुधि ने ओकरा भ' सकतै
सुराहीकेँ छै पातर घेंटी
गीत ने सुन्दर गाबि सकतै

ककबा सेहो दाँत बला छै
काटि मुदा ने किछ सकतै
आलू सेहो आँखि बला छै
देख मुदा ने किछ सकतै

बकराकेँ होइ दाढ़ी कारी
की ओ साधु बनि सकतै
जीउ सेहो बानरकेँ होइ छै
आदिक स्वाद त' नै बुझतै

एकहिं टा मानव छै एहन
उपयोग सभक करै कहुना
एहि लेल सर्वश्रेष्ठ कहाबै
ईश्वर केर सुन्दर रचना

रौद निपत्ता

अझूका रचना- बाल कविता
287. रौद निपत्ता

जाड़ एलै आ रौद निपत्ता
पहिरू मोटगर कपड़ा लत्ता
गोइठा नेरहा कुन्नी चेरा
नै त' जरबू आमक पत्ता

सीरक त'रमे पड़ल रहू
जाड़ ल'ग नै अड़ल रहू
नै त' पैसत लाख बेमारी
काज ने देत कोनो बुधियारी
एखन सगरो शीतक सत्ता

अक्कड़-बक्कड़

अझुका रचना- बाल कविता
286.अक्कड़- बक्कड़

अक्कड़-बक्कड़ लाल बुझक्कड़
बेचथि घरक लोहा लक्कड़
एक ठाम नै बैसल रहथि
आदतसँ ओ छथि घुमक्कड़
डाँरेपर डेरा छन्हि हुनकर
हालत हुनकर जेना फक्कड़

रविवार, 7 जनवरी 2018

मम्मी-पप्पामे कट्टी भेल

अझुका रचना- बाल कविता
285. मम्मी-पप्पामे कट्टी भेल

कट्टी भेल कट्टी भेल
मम्मी-पाप्पामे कट्टी भेल

पाप्पा घरपर देरसँ एलनि
मम्मी तैपर तामस केलनि
एतबे बात बहुत बढ़ि गेल
मम्मी-पप्पामे कट्टी भेल

मम्मी केलनि कीचेन बंद
पापा जी नै भेलनि मंद
नस्ता-पानी आफत भेल
मम्मी-पप्पामे कट्टी भेल

एक-दोसरकेँ खूब सुनेलनि
लागय जेना दुश्मन भेलनि
हमर स्कूल से छुटि गेल
मम्मी-पप्पामे कट्टी भेल

अंतमे मम्मी घरमे जा क'
सूतल अपन मुँह नुका क'
तखन झगड़ा खतम भेल
मम्मी-पप्पामे कट्टी भेल