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रविवार, 3 जून 2018

अथ गाम कथा

3.18 अथ गाम कथा

एकटा पंडितक गाम छल ।इलाका भरिमे एतुका पंडिताइयक डंका बाजै छल ।कोनो शुभ काज होइ, पंडित ओहि गामसँ जाइ छलथि ।विद्वानक गामक रूपमे चिन्हल जाइ बला गाम दिनो दिन उन्नतिक शिखरपर चढ़ल जा रहल छलै ।सरस्वतीक असीम कृपा एहन छलै जे एकहकटा नवका पीढ़ी  विद्वाने निकलै ।किओ ककरोसँ कम नै ।एक बेर सभक इच्छा भेलै जे गाममे एकटा यज्ञ हेबाक चाही ।गाममे सरस्वती संग लक्ष्मी विराजथि तकरा लेल ई अनुष्ठान परम आवश्यक छल ।सभ ग्रामीणकेँ ई विचार पसीन पड़लै आ शुरू भ' गेलै ओकर ओरियान ।घरे घरे चन्दा भेल ।किओ घी गछलकै त' किओ तिल ।किओ हवनक लकड़ी देलकै त' किओ बाँस, खर ।दूध, चाउर, शक्कर सभक इंतजाम भ' गेलै ।हवन कुण्ड तैयार भ' गेलै । पूजन मंडप बनि गेलै ।अंतमे बात एलै पंडितपर ।पूजा के करेतै ? गामक नामी विद्वान सभ पतनुकान ध' लेलनि ।एना व्यवहार करअ लागलनि जेना हुनका किछु आबिते नै छै ।सभक सरस्वती मंद भ' गेल छलै ।कारण मात्र एकटा चिन्ता छलै ।चिन्ता ई छलै जे अपन गाममे दक्षिणा कोना क' लेब ? आ बिना दक्षिणाकेँ पूजा किए कराएब ? अंतमे विचार भेलै जे बाहरसँ पंडित बजाओल जाए ।सएह भेलै, एगारह टा अनगौआ अक्षरकट्टु पंडितकेँ बजाओल गेलै ।गामक लोक आ गामक जजमान सभ आश्चर्यमे पड़ल छलै ।नै रहल गेलै त' डेराइत-डेराइत एकटा जजमान गामक सभसँ पैघ पंडितकेँ पूछि देलकै," यौ पंडित जी, अहाँ सभ सन पैघ विद्वान पंडितकेँ रहने बाहरसँ किए बजेलियनि हिनका सभकेँ ?"
पंडित जी चतुराइमे कहलनि - नै बुझलियै, ई सभ बड पैघ विद्वान छथिन ।हिनका सभ लग हमर की मजाल जे एको टा मंत्र पढ़ि लेबै ।हिनका सभ लग गामक एकोटा पंडितक बकार खुलिए नै सकै छै ।"
जजमान माँथ नोचैत ओत'सँ चलि गेल ।एहि घटनाक असर ई भेलै जे गामक बाहर अरजल सभटा सम्मान रसे रसे कम भ' गेलै ।विद्वता रहितो बहरैयाकेँ लागअ लागलै जे गाममे विद्वानक कमी छै ।

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