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सोमवार, 1 अप्रैल 2013

इस प्यार को क्या नाम दूँ ?

इस प्यार को क्या नाम दूँ?
जो हम दोनों के बीच
मंथर चल से प्रतिपल
वर्षों से चलता आ रहा है
वो भी बिना एक-दूसरे को देखे
पत्तों में कम्पन के साथ
काँप उठता है दिलों का तार
और आस-पास गुंजने लगता है
नयापन लिए अद्वितिय कोई राग
रातों को करबटें बदलते
अकेले में दुआ किया जाता है
एक-दूसरे के खुशी के लिए
हम तड़प उठते हैं मिलने को
पर पता है हम दोनो को, की
हमरा मिलन इस मे क्या
हर जनम मे असम्भव है
आखिर कल्पना को सच होने की संभावना
बिल्कुल शुन्य है,
फिर भी हम चहना चाहते हैं
तुम्ही बताओ
इस प्यार को क्या नाम दूँ ?

8 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

    आप की ये रचना 05-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। आप भी इस हलचल में अवश्य शामिल होना।
    सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

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    1. शुक्रिया आप का ।हलचल अच्छा लगा ।शामिल होने का प्रयास रहेगा ।

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  2. शुक्रिया आप का ।हलचल अच्छा लगा ।शामिल होने का प्रयास रहेगा ।

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  3. प्रत्येक भावना को नाम देना संभव ही नहीं!

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    1. बिल्कुल सही कहा आपने प्रतिभा जी ।भावनाओं को समझ सकते हैं पर नामकरण करना कठिन है ।धन्यवाद

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  4. बिल्कुल सही कहा आपने प्रतिभा जी ।भावनाओं को समझ सकते हैं पर नामकरण करना कठिन है ।धन्यवाद

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  5. हर भावना अनाम ही तो होती है,,नाम न दें तो है अच्छा है इसे अनाम ही रहने दें.

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