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मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

सेनूर छै अनमोल (भाग-2)

सेनूर छै अनमोल (भाग-2)

राधा- जुनि कानू ।चुप भऽ जाउ ।हमहूँ विपतिक मारल छी तेँ अन्ट-सन्ट बजा गेल (कने रूकि कऽ) अहाँक कहब अछि जे अहाँ भीख दै छलियै, तखन अहाँ भिखमंगा कोना बनि गेलियै ?
भिखमंगा- (नोर पोछैत) की कहब...बइमनमा दैवासँ ककरो हँसी देखल नै जाइ छै दाइ ।छोरू ई सब ।हमर व्यथा सूनि अहूँ उदास भऽ जाएब ।
राधा - एना कोना छोड़ि देब ! अहाँक कथन हमर मोनकेँ अशान्त कऽ देलक अछि ।एकरा शान्त केने बिना अहाँकेँ कोना छोड़ि देब !
भिखमंगा - दाइ, हमर बातपर एते धियान जुनि दिअ ।ऐसँ कोनो फायदा होइ बला नै अछि अहाँकेँ ।गरीबक हिस्सामे अनेरुआ काँट-कुश आबिते रहैत छै ।कते सुन्नर फूल अछि अहाँक हाथमे (राधा अपन हाथक फूल देखैत छथि ) एहि फूलमे हमर हिस्साक काँट जुनि गूथू ।
राधा- एहन कोनो बात नै छै ।हम काँट आ फूलक अदला-बदली तँ नै कऽ रहल छी ।हम तँ मात्र देखय चाहैत छी जे अहाँक करेजमे केहन काँट गड़ल अछि ।ओनाहितो कहल गेल छै जे दुख बँटलासँ घटै छै ।पहाड़ सन भरियाएल दुख ककरो कहि देलासँ मोन तूर सन हल्लुक भऽ जाइ छै ।असलमे अहाँक गप बड रोचक अछि तेँ हम सुनऽ चाहैत छी ।
भिखमंगा - दाइ, अहाँक कहब सोलहो आना सच अछि, मुदा रहीम जी कहि गेलखिन हेँ, ई दोहा तँ सुनने हेबै (कने चुप होइत)
"रहिमन निज मन की व्यथा मन हीं राखों गोय
सुनि अठिलैहें लोग सब बाँटि न लैहें कोय "
दाइ, एकर मतलब तँ अहाँकेँ बुझले हएत ?अहाँ तँ पहिनहिये हमरा भीख दैसँ नठि गेल छी ।अहाँसँ हमर दुख मेटाइ बला अछिए नै...हँ...अहाँ हमर मजाख जरूर उड़ाएब ।ओनाहितो अहाँकेँ हमर दुखड़ामे रोचकता देखाइत अछि ।एँ यै, ऐसँ पैघ मजाख और की भऽ सकै छै !हम भूखल अहाँसँ भीख देबाक गोहारि कऽ रहल छी आ अहाँकेँ हमर दायनिय स्थितिमे रोचकताक दर्शन भऽ रहल अछि ।
राधा - हमर मतलब ई नै छल ।हम तँ अहाँक दुख अपना संग शेयर करऽ चाहैत छी ।विज्ञानक छात्रा छी ने तेँ उत्तर जानबाक जिज्ञासा बढ़ि गेल अछि ।आखिर एकटा भीख दै बला आदमी भिखमंगा कोना भऽ सकैत अछि ?ओनाहितो हम एतऽ बैसल-बैसल बोर भऽ रहल छी ।अहाँक संग बतियाइत किछु समयो कटि जाएत ।रहल बात भीख दैसँ नठैक तँ हम तखन परेशान छलौं तेँ कटु बात बजा गेल ।अहाँ निश्चिन्त रहू ।अहाँकेँ हम टाका जरूर देब ।
भिखमंगा - से तँ बुझलौं, मुदा अहाँक चाल-ढालसँ लगैत अछि जे अहाँ ककरो प्रतिक्षा कऽ रहल छी...शाइत कोनो प्रिय मित्रक...अहाँक हाथक फूलो शाइत ओकरे लेल अछि तेँ हमरा दोसर दुआरि जाए दिअ ।हमर भिखमंगा बनबाक खिस्सा सूनि जँ अहाँक मोनक फूल मौला जाएत तँ प्रिय मित्रकेँ की देबै ?
राधा- सतमे अहाँक नजरि पारखी अछि ।अहाँ गपकेँ बड नीक जकाँ पकड़ैत छी ।अहाँक अनुमान शत प्रतिशत सत्य अछि ।(लजाइत) हम अपन ब्यायफ्रेंडक बाट जोहि रहल छी...मुदा अहाँक बातसँ हमर मोन बेचैन भऽ गेल अछि ।एहन अवस्थामे हम श्याम संग सहज नै भऽ सकब... तेँ अपन बात कहि हमर मोनकेँ शान्त कऽ दिअ ।

क्रमश:

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