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सोमवार, 22 जुलाई 2013

कनखी

117. कनखी

लड़कीकेँ देखबाक लेल आएल लड़का पक्ष एकाएक गरमा गेल"हौ जी, अहाँक बेटी तँ चरित्रहीन छथि ।देखू तँ हमरा सभक सामने अहाँक पाछू बला छौड़ाकेँ कनखी मारैत अछि ।"
लड़की पक्ष उपर मोने शान्त करेबाक प्रयास करिते छल तखने लड़कीक बायाँ आँखि दबि गेलै ।"देखू...देखू तँ फेर कनखी मारलक ।यौ सरकार अहाँक बेटी तँ कोनो बजारू वेश्य..."
लड़काक बापक बोलीकेँ अधेपर लोकैत लड़कीक बाप बाजल" हे, चरित्र तँ अहाँ सभक खसल अछि ।अहाँ हमर बेटीकेँ चरित्रहीन कहैसँ पहिने अपन करेजमे तँ देखितौं ।यौ सरकार, हमर बेटी तँ अहाँक इज्जत करैत छल ।अहाँक बेटाक दाम सूनि हम सब गरमा गेल छलौं ।अहाँकेँ बेज्जत कऽ नै भगबौं ताहि लेल हमरा इसारा कऽ रहल छल ।बिनु बाजने, आँखि दाबि कऽ ।आबो तँ भागू नै तँ घिसियाबैत भगाएब ।हँ, बुझलौं ने ?"

अमित मिश्र

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