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बुधवार, 25 दिसंबर 2013

सेनूर छै अनमोल (भाग-10)

सेनूर छै अनमोल (भाग-10)

श्याम- ओफ-ओह राधा रानी, अहाँ बड मूर्ख छी ।जखन अपन घरबलाकेँ छोड़िये रहल छी, ओकरासँ मिसियो मोह अछिए नै, तखन ओकरा लेल चिन्ता किए करैत छी ?अहाँ आम खाइपर धियान दियौ, गाछ गानैक काज मुरलियेपर छोड़ि दियौ ।
राधा- ठीक छै ।हम प्रयास करब ।
श्याम- ठीक छै ।चारिम दिन हम आएब ।अहाँ सब किछु सैंत-सम्हारि कऽ तैयार रहब ।घर छोड़लाक बाद अगिले दिन कोनो मंदीरमे दुनू गोटा वियाह कऽ लेब ।की ठीक छै ने ?
राधा- हँ हँ, ठीक छै ।हम विरहिन बनि अहाँक बाट जोहब ।गुड बाइ ।टेक केयर ।
श्याम- गुड बाइ ।
(फोन काटि राधा मंचपर टहलऽ लागैत अछि ।मोने-मोन सोचैक अभिनय करैत अछि ।)
राधा- की करियै ?कोना करियै ?समय बड कम छै ।गहना-गुड़िया. कपड़ा-लत्ता तँ हम लऽ लेबै, मुदा... एते जल्दी टाकाक जोगार कोना हेतै ?कोन झूठ बाजि कऽ टाका माँगबै ?...सात मास जकरा संग रहलियै ओकरा कोना छोड़ि सकबै !...जे अपन मोनक सबटा बात हमरा बता दै छै हुनका एते पैघ बात कोना ने बतैयै !एसगर एहि घरमे कोन हालत हेतै ओकर, भगबाने जानथि ।...आखिर श्यामे जकाँ इहो तँ हमरासँ खूब प्रेम करैत छथिन...नै राधा नै, तूँ एहि नरकसँ निकलि जो ।मुरलीसँ जुटैत प्रेमक ताग तोरा लेल खतरनाक छौ ।...सत्ते तँ कहै छै ।हमरा टाका चाही, प्रेम तँ ढल्ला भेंट जेतै ।...हँ हमरा हिनका छोड़ि श्यामे संग जाए पड़तै ...आब नै रुकबै...आब श्याम संगे चलि जेबै...हिनकासँ मोह नै करबै ...चलि जेबै...आब बिना बतेने चलि जेबै ।
(मुरलीक प्रवेश होइत अछि ।मुरलीकेँ देखिते राधा कानऽ लागैत अछि ।)
राधा- (कानैत आ छाती पीटैत ।) अरे बाप रे बाप...आब हम की करियै रे बाप...हमरा टुअर किए बनबै छें गे माए... अगे माए गै माए...आब हमरा के देखतै गे माए... (मुरली चुप करबऽ लागैत अछि ।)
मुरली- की भेलै ? किए कानैत छी ? चुप भऽ जाउ ।
राधा- (कानैत) नै यौ, हम कोना चुप भऽ जैयै यौ ! हौ दैवा हौ दैवा... हम कोन कसूर केन छलियै हौ दैवा...हौ दैवा हमर माएसँ कोन जनमक दुश्मनी निकाललहो हो दैवाऽऽऽ...
मुरली- पहिने अहाँ चुप भऽ जाउ ।ठीक-ठीक बताउ ने, की भेलै ?ककरा के की कऽ देलकै ?
राधा- (कानैत) हमर माए मरि रहल छै...आब हम की करियै हो राम...होस्पिटलमे भरती भेल छै हम माए ...माए गे माए ...
मुरली- होस्पिटलमे छथि तँ कानै किए छी ?दबाई-सुइया चलिते हेतै, ठीक भऽ जेथिन ।काल्हिये चलू माएसँ भेंट करा देब ।ऐमे कानैक कोन बात छै !
राधा- पाइ रहतै तखन ने ठीक हेतै । कोनो छोट-मोट रोग रहितै तखन ने कम-सममे होइतै ।कैंसर छै ।कीमोथेरेपी करबऽ पड़तै ।25 लाख धरि रूपैया चाही ।(कने रुकैत ।) किछु रुपैयासँ अहाँ मदति कऽ दितियै तँ...
मुरली- हमरा लऽग टाका रहतै तखन ने मदद करबै !
राधा- टाका नै छै तँ की भेलै ? वेवस्था तँ कएल जा सकै छै ।करियौ ।
मुरली- प्रयास करैत छी ।हमरासँ कतेक टाका चाही अहाँकेँ ?
राधा- 25 लाखक खर्चमे कमसँ कम 10-12 लाख टाका तँ देबैयै पड़तै ।
मुरली- (आश्चर्यसँ) 10-12 लाख !
राधा- और नै तँ की !
मुरली- हम तँ बुझलै 10-12 हजार ।10-12 लाख टाकाक जोगार हमरासँ सम्भव नै अछि ।जते सम्भव होइ ओतबे खर्च करैक चाही ।10-12 लाख टाकाक कर्जा चुकबैक क्षमता नै अछि हमरा ।जते पैघ चादर होइ, लोककेँ ओतबे पएर पसारैक चाही ।चलू कने-मने टाकासँ मदति कऽ देबै ।एते-एते टाका तँ गृहस्थ परिवार सपनोमे नै देखै छै ।मदति करैक तँ बाते दूर छै।
राधा- एकर मने अहाँ हमरासँ प्रेम नै करैत छी ?हमरा पत्नी रूपमे स्वीकार नै केने छी ?
मुरली- फेर, ऐमे प्रेम कतऽषँ घुसि गेलै ?एकटा बात बुझि लिअ ।अहाँ सेनूर लगाउ वा नै लगाउ, मुदा अहाँ वियाहल छी, वियाहल छी, वियाहल छी ।वियाहल नारी लेल सब किछु ओकर सासुर होइ छै, नैहर नै ।आइ अहाँक सासुरकेँ एतेक टाका देबाक ओकादि नै छै तेँ बेसी मोन नै बढ़ाउ ।
राधा- एतेक पैघ प्रवचन तँ दऽ देलियै, मुदा हमर प्रश्नक उत्तर नै देलियै ?
मुरली- प्रश्नक उत्तर की दी ?की अहाँकेँ नै बुझल अछि ?जँ हम अहाँसँ प्रेम नै करितौं तँ आइ राजा लऽग अहाँकेँ बचेबाक प्रयास नै करितौं ।पति-पत्नी होइतो, दैहिक-सम्बन्धसँ दूर रहितो, सदिखन अहाँक पक्षमे ठाढ़ छी ।की एकरा प्रेम नै कहल जाइ छै ?
राधा- पक्षमे !हूँह, पक्षमे कहाँ छी अहाँ !पक्षमे रहितियै तँ आइ पाइक वेवस्था करितियै ।दुनू कान खोलि कऽ सूनि लिअ ।जँ आइ अहाँ टाकाक जोगार नै करबै तँ काल्हि हमर मरल मुँह देखब ।हम जहर...
(मुरली राधाक मुँहपर हाथ राखि चुप करबैत अछि ।)
मुरली- देखू...हम चेतबै छी ।जे बाजलौं से बाजलौं ।आब एहन बात फेर नै बाजब ...हम प्रयास करैत छी ।जेना हेतै तेना हम टाका आनब, मुदा अहाँ मरैक विचार मोनसँ निकालि दियौ ।बुझलौं ने ?

क्रमश:

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