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मंगलवार, 9 जून 2015

वर्णमाला : ऊ

बाल कविता-173
वर्णमाला : ऊ


'ऊ' ऊँट लम्बा-तगड़ा
छै पीठपर नम्हर कुबड़ा
बालुक बीच चलै छै खूब
भरिगर बोझ उघै छै खूब
मरूस्थलक जहाज कहाबय
चलिते रहय, पानि ने पीबय
दूध, माँउस ई दैये बेसी
सबसँ सुन्दर लागय देसी


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