राधा- परतर ।हूँह...तूँ हुनकर पाँसङगो बराबर नै छें ।
श्याम- एना एकार पारनाइ नीक लागैत अछि की ?
राधा- एखन तूँ हमर आँखिक सोझासँ झटि जो ।एखन हमरा मात्र हम पति देखाइत अछि ।ओकरे चिन्ता अछि ।
श्याम- की भऽ गेलौ तोरा राधा ?एना किए बाजै छेँ ?लागै छै तोरापर किओ डाइन-जोगिन कऽ देलकौ ।
राधा- डाइन-जोगिन तँ एते दिन केने छलै ।एते दिन हम दोसरक वशमे छलियै ।आइये तँ हमर नीन्न टूटल अछि ।आइये तँ सेनूरकेँ चिन्हलौं हम ।
श्याम- सेनूरक चक्करमे पड़ै बाली तँ तूँ नै छलेँ ।तूँ हीं तँ कहै छलही (राधाक बाजैक स्टाइलमे) "सेनूरक मोले की छै ?वएह पाँच-दस टाका ।"
राधा- ओ हमर नदानी छल ।सचमे सेनूरक कोनो मोल नै छै, किएक तँ सेनूर अनमोल छै ।जा धरि बजारमे बिकैत छै, डिब्बामे बन्द रहै छै, ता धरि मात्र पाँच-दस टाका ओकर मोल होइ छै, मुदा...मुदा जखन ओ कोनो नारीक सिंउथमे पड़ि जाइ छै तखन ओ अनमोल भऽ जाइ छै ।हम तँ आइ बुझलियै जे सेनूर अनमोल छै ।
श्याम- मुदा हम तोरा नै छोड़ि सकै छीयै ।हमरा तोहर रूप-यौवन पागल केने अछि।एकरा छोड़नाइ असम्भव छै ।
राधा- इएह तँ अन्तर छै तोरा आ मुरलीमे ।तूँ हमर देहसँ प्रेम करै छें आ मुरली हमर आत्मासँ सिनेह करैत छथि ।
श्याम- मुदा हमरा लेल तोरा छोड़नाइ कठिन छै ।
राधा- छोड़ऽ पड़तौ श्याम, छोड़ऽ पड़तौ ।सब युगमे श्याम राधासँ मात्र प्रेमे केलकै, वियाह नै ।
श्याम- तूँहीँ तँ कहै छलहीं जे आब इतिहास बदलऽ पड़तै ।आब श्याम राधाकेँ छोड़ि कऽ नै पड़ा सकै छै ।
राधा- कहैत छलियै, मुदा सब बेर श्याम राधाकेँ ओकर हालतमे छोड़ि देलकैए ।इहो बेर छोड़तै तँ कोनो जुलुम नै हेतै । मुदा सब बेर मुरलीक अवाज राधाक संग रहलै ।सब युगमे राधाकेँ मुरलिये आकर्षित केलकै ।राधा श्याम लेल नै, मुरली सूनै लेल नाचै छलै ।तेँ इहो युगमे (अपना दिस देखबैत) ई राधा अपन मुरलियेक संग रहतै ।
श्याम- एखनो समय बचल छै राधा ।सोचि ले ।हमरा संग रहलासँ आधुनिक सुख-सुविधा भेटतौ ।
राधा- हमरा कोनो सुविधा नै चाही ।सबसँ पैघ सुख पति होइ छै ।पतिक संग सबसँ पैघ सुविधा भेटै छै ।
श्याम- मुदा एतऽ गोइठा ठोकऽ पड़तौ ।चुल्हिक धुआँ पिबऽ पड़तौ ।
राधा- मंजूर अछि ।जँ पति पानि ढारैत रहय तँ गोइठो ठोकि लेब ।पतिक बाँहिमे चल्हिक धुआँ अगरबत्ती सन गमकऽ लागैत अछि ।
श्याम- मुदा...
राधा- मुदा किछु नै ।किछु भऽ जाए हम पुरना सेनूर मेटा कऽ नवका सेनूर नै लगबै ।(दुनू हाथ जोड़ैत) हम दुनू हाथ जोड़ै छियौ ।तूँ जो ।हमरा अपन पतिक संग खुशी-खुशी रहऽ दे ।
(राजा आ मुरलीक प्रवेश होइत अछि ।मुरलीकेँ देखिते राधा मुरलीकेँ भरि पाँज कऽ पकड़ि लैत अछि ।राजा आ श्याम थपड़ी बजबऽ लागैत अछि ।)
श्याम- वाह ।आइ हमर आँखि खुलि गेल ।(मुरली दिस घुमैत) सचमे झा जी अहाँ जीत गेलौं ।हमर पाँच सालक प्रेमकेँ अहाँक सात मासक प्रेम हरा देलक ।
राजा- प्रेम हार-जीत नै होइ छै श्याम बाबू ।प्रेम, प्रेम होइ छै ।सभक लेल बराबर ।एतऽ तँ सेनूर अहाँक प्रेमकेँ हरेलक अछि ।
श्याम- मुदा राधाक माँग तँ एखन धरि खालिए छै ?
मुरली- सेनूर लगेलाक बाद माँथ दर्द करऽ लागैत छनि ।
श्याम- एहन कोनो बात नै छै पाहुन ।हमर शर्त छलै तेँ सेनूर नै लगबैत छलै ।(अपन जेबीसँ सेनूरक डिब्बा निकालि कऽ मुरली दिस बढ़बैत अछि ।) लिअ...आइ शुभ दिन अछि ।सेनुरा दियौ राधाकेँ ।भरि दियौ राधाक उदास सिंउथ ।
(मुरली सेनूरक डिब्बा लऽ लैत अछि ।एक चुटकी सेनूर राधाक माँगमे दऽ दैत अछि ।राधा मुरलीक पएर छू प्रणाम करैत अछि ।)
राधा- हम अहाँकेँ तड़पाबैत रहलौं ।अपन प्रेम कहियो नै देलौं ।हमरा माँफ कऽ दिअ ।
मुरली- (राधाक बाँहि पकड़ि उठबैत)देर एलौं दुरूस्त एलौं ।अहाँ कोनो गलती करबे नै केलौं तँ हम माँफी कथीक देब ।अहाँ सदिखन हमर करेजमे छी आ सदिखन रहब ।
(राजा आ श्याम थपड़ी बजबैत अछि ।)
राजा- इति विवाह सम्पन्नम् ।फूल, माला, मण्डपक झंझट खतम ।
(सब हँसऽ लागैत अछि ।)
श्याम- रुकू...रुकू, एते जल्दी खतम नै करियौ ।एखन शिमला दर्शन बाँकिए छै ।(राधा दिस घुमैत) की राधा, शिमलामे हनीमून मनबै लेल जाइक छै ने ?
राधा- धत्, लाजो नै होइ छौ ।
(सब ठहक्का मारि हँसऽ लागैत अछि ।धीरे-धीरे पर्दा खसैत अछि ।)
*समाप्त*
अमित मिश्र
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सोमवार, 30 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-13)
श्याम- आब बेटी लेल तँ तड़पबे ने करतै ।
राज- कोन होस्पिटलमे छथिन ?
श्याम- अपने शहरमे छथिन ।
राजा- (आश्चर्यचकित होइत) अपने शहरमे !अहाँक शहरमे किमोथेरेपी होइ छै ?
श्याम- हँ...नै...हँ...हँ...
राजा- हे, बेसी घिघियाउ नै ।अहाँक बातसँ हमरा दालिमे किछु काला बुझाइत अछि ।
श्याम- (गप बदलबाक चोष्टा करैत) हँ, कारी छै ने ।कारी खूनक उल्टी होइ छन्हि ।खून खराप...मने कारिये भऽ गेल छनि ने ।
राजा- खून कारी भऽ गेल छनि !हमरा तँ विश्वास नै होइत अछि ।हमरा तँ अहाँ छद्म बुझाइत छी ।आइसँ पहिने अहाँकेँ कहियो नै देखने छलौं ।मुरलीक वियाहोमे तँ नहिये छलियै अहाँ ?
श्याम- हँ ओ जे छै से...मने जे...
(हाथमे बैग लेने राधाक प्रवेश होइत अछि ।)
राधा- चलू श्याम ।हम तैयार छी ।
श्याम- हँ हँ, जल्दी चलू ।ट्रेन छूटि जाएत ।
राधा- देउर जी ।घरक चाभी राखि लिअ ।(चाभी दैत अछि ।राजा लऽ लैत अछि ।)अहाँक भाइ जी कखन धरि एताह ?
राजा- जानि नै ।एताह कि नै एताह से तँ भगवानेक हाथमे छनि ।
राधा- भगवानक हाथमे छनि ! मने नै बुझलौं ।
श्याम- की अने-मनेक चक्करमे पड़ै छी राधा ।जल्दी चलू ।देर भऽ रहल अछि ।साँझमे मंदीरो परहक काज फरियेबाक अछि ।
(राधा बैग उठा कऽ चलि दैत अछि ।राधाकेँ आगू बढ़ैत देरी, राजा भोकारि पाड़ि कानऽ लागैत अछि ।कानब सूनि राधा रूकि जाइत अछि ।)
राधा- जा...अहाँ तँ छोट-छीन नेना जकाँ कानऽ लागलियै ।एना एक-बएग किए कानऽ लागलियै ?
श्याम- कोन चक्करमे पड़ि रहल छी राधा !कानै छै तँ कानऽ दियौ ।हमर कोनो किछु लऽ रहल छै ।छोरू ई सब, जल्दी चलू ।
राजा- हँ...हँ...चलि जाउ ।यौ सरकार लऽ जैयौ हिनका ।देर जुनि करू...हिनकर माएक प्राण छुटल जा रहल छनि ।जाउ-जाउ, दोड़ल चलि जाउ ।अहाँ जाइये लए छी, जाउ ।एतऽ संसार उजरि रहल छनि तकर कोन चिन्ता, कथीक फिकीर ?अरामसँ जाउ ।शौकसँ जाउ ।
राधा- ककर संसार उजरि रहल छै ?
राजा- अहाँक संसार उजरि रहल छै, और ककर उजरतै !मुरलीक जीवन उजरि रहल छै ।
राधा- हमरा चलि गेलासँ हुनक संसार उजरि जेतै, एहन सन कोनो बात तँ नै बुझना जाइत अछि हमरा ।
राजा- हँ हँ ।अहाँकेँ तँ नहियें बुझाएत ।आँखिपर अन्हरजाली जे लागल अछि ।हाय रे विधाता !केहन मौगीक रचना केलहो !एतऽ पतिक जिनगीपर ग्रहण लागल छै तकर कोनो चिन्ता नै छै, मुदा माएक जिनगी लेल दौड़ल जा रहल छै ।हाय रे विधाता !के बुझहेतै ई मोगीकेँ !
राधा- की भेलै हमर पतिक जिनगीकेँ ?
राजा- एखन धरि तँ किछु नै भेलै, मुदा अहाँकेँ गेलाक बाद हेतै ।
राधा- किए हेतै ?बातकेँ गोल-गोल नै घुमाउ ।सच्चाइ कहू, की बात छै ?
राजा- सच्चाइ...अहाँ सच्चाइ सुनऽ चाहैत छी तँ सुनू ।अहाँकेँ बूझल अछि जे अहाँकेँ हाथक एटैचीमे 10 लाख टाका कतऽसँ एलै ?कोना वेवस्था भेलै ?
राधा- नै ।
राजा- अहाँकेँ पाइ देबाक लेल ओ अपन किडनी बेच रहल अछि ।
राधा- (आश्चर्यसँ)किडनी !
राजा- हँ किडनी ।पाइ नै भेटलापर अहाँ जहर खा लितियै ।मुरली एहि बातसँ डेरा गेल छल ।पाइक वेवस्था नै भेलै ।थाकि-हारि कऽ 10 लाखमे किडनीक सौदा केलकै ।आइ अपन किडनी देबऽ लेल डाँक्टर लऽग गेल अछि ।(कने रुकि कऽ !)भौजी ओ बड प्रेम करैत अछि अहाँकेँ ।आबो तँ ओकरा चिन्ह जैयौ ।
राधा- (कानैत) हे दाता दीनानाथ ।ई केहन अपराध करबा देलहो ? हमरा टाका नै चाही ।हमरा हमर पति चाही ।जाउ...जाउ राजा...रोकू अपन भैयाकेँ ।
(राजा दौड़ल चलि जाइत अछि ।)
श्याम- ई कोन टाटक लाधि देलियै !अहाँ हमरा संग चलू ।ओकरा मरऽ दियौ ।हमरा-अहाँकेँ कोन फर्क पड़ै छै ।लोक शेर संग रहै छै, कुकुर विलाइ संग...
(राधा श्यामकेँ एक चमेटा लगबैत अछि ।)
राधा- चुप ।बड भेलौ तोहर खेल ।आब जँ हमर सोहागकेँ उल्टा-सीधा कहबें तँ तोहर प्राण हारि लेबौ ।
श्याम- सोहाग...केहन सोहाग ?तोहर सोहाग हम छी ।तूँ हमर बाँहि लेल बनल छें, हम तोरा लेल ।हमर परतर ओ मुरलिया की करतै ?
क्रमश:
राज- कोन होस्पिटलमे छथिन ?
श्याम- अपने शहरमे छथिन ।
राजा- (आश्चर्यचकित होइत) अपने शहरमे !अहाँक शहरमे किमोथेरेपी होइ छै ?
श्याम- हँ...नै...हँ...हँ...
राजा- हे, बेसी घिघियाउ नै ।अहाँक बातसँ हमरा दालिमे किछु काला बुझाइत अछि ।
श्याम- (गप बदलबाक चोष्टा करैत) हँ, कारी छै ने ।कारी खूनक उल्टी होइ छन्हि ।खून खराप...मने कारिये भऽ गेल छनि ने ।
राजा- खून कारी भऽ गेल छनि !हमरा तँ विश्वास नै होइत अछि ।हमरा तँ अहाँ छद्म बुझाइत छी ।आइसँ पहिने अहाँकेँ कहियो नै देखने छलौं ।मुरलीक वियाहोमे तँ नहिये छलियै अहाँ ?
श्याम- हँ ओ जे छै से...मने जे...
(हाथमे बैग लेने राधाक प्रवेश होइत अछि ।)
राधा- चलू श्याम ।हम तैयार छी ।
श्याम- हँ हँ, जल्दी चलू ।ट्रेन छूटि जाएत ।
राधा- देउर जी ।घरक चाभी राखि लिअ ।(चाभी दैत अछि ।राजा लऽ लैत अछि ।)अहाँक भाइ जी कखन धरि एताह ?
राजा- जानि नै ।एताह कि नै एताह से तँ भगवानेक हाथमे छनि ।
राधा- भगवानक हाथमे छनि ! मने नै बुझलौं ।
श्याम- की अने-मनेक चक्करमे पड़ै छी राधा ।जल्दी चलू ।देर भऽ रहल अछि ।साँझमे मंदीरो परहक काज फरियेबाक अछि ।
(राधा बैग उठा कऽ चलि दैत अछि ।राधाकेँ आगू बढ़ैत देरी, राजा भोकारि पाड़ि कानऽ लागैत अछि ।कानब सूनि राधा रूकि जाइत अछि ।)
राधा- जा...अहाँ तँ छोट-छीन नेना जकाँ कानऽ लागलियै ।एना एक-बएग किए कानऽ लागलियै ?
श्याम- कोन चक्करमे पड़ि रहल छी राधा !कानै छै तँ कानऽ दियौ ।हमर कोनो किछु लऽ रहल छै ।छोरू ई सब, जल्दी चलू ।
राजा- हँ...हँ...चलि जाउ ।यौ सरकार लऽ जैयौ हिनका ।देर जुनि करू...हिनकर माएक प्राण छुटल जा रहल छनि ।जाउ-जाउ, दोड़ल चलि जाउ ।अहाँ जाइये लए छी, जाउ ।एतऽ संसार उजरि रहल छनि तकर कोन चिन्ता, कथीक फिकीर ?अरामसँ जाउ ।शौकसँ जाउ ।
राधा- ककर संसार उजरि रहल छै ?
राजा- अहाँक संसार उजरि रहल छै, और ककर उजरतै !मुरलीक जीवन उजरि रहल छै ।
राधा- हमरा चलि गेलासँ हुनक संसार उजरि जेतै, एहन सन कोनो बात तँ नै बुझना जाइत अछि हमरा ।
राजा- हँ हँ ।अहाँकेँ तँ नहियें बुझाएत ।आँखिपर अन्हरजाली जे लागल अछि ।हाय रे विधाता !केहन मौगीक रचना केलहो !एतऽ पतिक जिनगीपर ग्रहण लागल छै तकर कोनो चिन्ता नै छै, मुदा माएक जिनगी लेल दौड़ल जा रहल छै ।हाय रे विधाता !के बुझहेतै ई मोगीकेँ !
राधा- की भेलै हमर पतिक जिनगीकेँ ?
राजा- एखन धरि तँ किछु नै भेलै, मुदा अहाँकेँ गेलाक बाद हेतै ।
राधा- किए हेतै ?बातकेँ गोल-गोल नै घुमाउ ।सच्चाइ कहू, की बात छै ?
राजा- सच्चाइ...अहाँ सच्चाइ सुनऽ चाहैत छी तँ सुनू ।अहाँकेँ बूझल अछि जे अहाँकेँ हाथक एटैचीमे 10 लाख टाका कतऽसँ एलै ?कोना वेवस्था भेलै ?
राधा- नै ।
राजा- अहाँकेँ पाइ देबाक लेल ओ अपन किडनी बेच रहल अछि ।
राधा- (आश्चर्यसँ)किडनी !
राजा- हँ किडनी ।पाइ नै भेटलापर अहाँ जहर खा लितियै ।मुरली एहि बातसँ डेरा गेल छल ।पाइक वेवस्था नै भेलै ।थाकि-हारि कऽ 10 लाखमे किडनीक सौदा केलकै ।आइ अपन किडनी देबऽ लेल डाँक्टर लऽग गेल अछि ।(कने रुकि कऽ !)भौजी ओ बड प्रेम करैत अछि अहाँकेँ ।आबो तँ ओकरा चिन्ह जैयौ ।
राधा- (कानैत) हे दाता दीनानाथ ।ई केहन अपराध करबा देलहो ? हमरा टाका नै चाही ।हमरा हमर पति चाही ।जाउ...जाउ राजा...रोकू अपन भैयाकेँ ।
(राजा दौड़ल चलि जाइत अछि ।)
श्याम- ई कोन टाटक लाधि देलियै !अहाँ हमरा संग चलू ।ओकरा मरऽ दियौ ।हमरा-अहाँकेँ कोन फर्क पड़ै छै ।लोक शेर संग रहै छै, कुकुर विलाइ संग...
(राधा श्यामकेँ एक चमेटा लगबैत अछि ।)
राधा- चुप ।बड भेलौ तोहर खेल ।आब जँ हमर सोहागकेँ उल्टा-सीधा कहबें तँ तोहर प्राण हारि लेबौ ।
श्याम- सोहाग...केहन सोहाग ?तोहर सोहाग हम छी ।तूँ हमर बाँहि लेल बनल छें, हम तोरा लेल ।हमर परतर ओ मुरलिया की करतै ?
क्रमश:
रविवार, 29 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-12)
मुरली- सएह तँ...सएह तँ अहाँकेँ कहैत छी ।एक दिससँ सबकेँ अमीर भऽ गेलासँ ई समाज नै ने चलतै ।गरीबोक रहनाइ जरूरी छै ।अमीरीक रट नै लगेबाक चाही, मुदा...अहाँ समझबाक चेष्टा करी तखन ने ?हम जानैत छी, ऐ घरमे अहाँक दम घुटैत हएत ।नीक नै लागैत हएत ।मुदा कैये की सकै छीयै ?नारी लेल सासुर एहन जेल होइ छै जतऽसँ यमराजक मृत्यु-मोहर लागलाक बादे मुक्ति भेटै छै ।
राधा- कहि तँ ठीके रहल छी, मुदा आब एहन कोनो बन्हन नै छै ।आब नारी मुक्त गगनमे विचरण करै बला चिड़ाँइ बनि गेल छै ।आब कोनो पिंजरा ओकरा बन्न कऽ नै राखि सकैए ।ने सासुर आ ने सासुरक लोक ।
मुरली- जे नारी सासुरक प्रति एहन सोच राखैत अछि ओकर जिनगी दुखसँ भरि जाइ छै ।जकरा अपन पतिक प्रति प्रेम नै रहै छै ओ नारी डगराक बैगन बनि जाइ छै ।ने इम्हरके, ने उम्हरके ।किम्हरोके नै रहै छै ।नैहर-सासुर सब दुआरि ओकरा लेल बन्न भऽ जाइ छै ।ओकरा गलत नजरिसँ देखल जाइ...
(श्यामक प्रवेश होइत अछि ।श्यामकेँ देख मुरली चुप भऽ जाइत अछि ।राधा आगू बढ़ैत अछि ।)
राधा- आउ...आउ ।अहींक बाट जोहि रहल छलौं ।माए लेल टाकाक जोगार भऽ गेल अछि ।आब चलैयेक मानि रहल ।
श्याम- (प्रसन्न होइत)एँ, भऽ गेलै जोगार ।बड खुशीक बात ।कमाल कऽ देलियै अहाँ ।
(मुरलीक मोबाइल टनटना उठैत अछि ।)
मुरली- (मोबाइल उठबैत) हँ...कहू डाक्टर साहेब...अच्छे ठीक छै...ठीक छै हम आबैत छी ।अहाँ तैयारी करू ।(फोन काटि कऽ राधा दिस देखैत अछि ।)राधा, हम जा रहल छी ।पाहुनकेँ खुआ-पिया दियौन ।कने सुस्ता लेथिन तखन चलि जाएब ।हमरा आबैमे देर लागत ।घरक चाभी राजाकेँ दऽ देबै ।
राधा- ठीक छै ।अहाँ निश्चिन्त भऽ जाउ ।हम चाभी दऽ देबनि ।
(मुरली चलि जाइत अछि ।राधा आ श्याम एक-दोसरक बाँहिमे बन्हा जाइत अछि ।)
राधा- कते दिन बाद ई सुखद स्पर्श भेल अछि ।मोन होइत अछि एहिना जिनगी गुजारि दी ।
श्याम- बड तड़पेलौं अहाँ ।आब तँ अपने दुनूक राज चलतै ।चिन्ता-फिकीर जुनि करू ।आब तँ सब दिन शहरमे सब संसाधनक बीच एहन-एहन सुखद स्पर्श होइते रहतै ।
राधा- हमरा तँ एतऽ साँस फूलऽ लागैत अछि ।(दुनू अलग होइत अछि ।) चलू हाथ-मूँह धोइ लिअ ।अहाँक पसीनक तरकारी बनेने छी ।खा-पी लिअ तखन चलब ।
श्याम- हे, ई सब झंझट छोरू ।खान-पान रश्तोमे हेतै ।जल्दीसँ जल्दी एतऽसँ मुक्ती लिअ ।आइ साँझ धरि पहुँचि जेबै तँ आइये वियाहो कऽ लेब ।
राधा- एते धड़फड़ाइ किए छी !आब कोनो तरहक वाधा-विध्न नै छै ।वियाह तँ हेबे करतै ।नै खएब तँ नै खाउ ।कमसँ कम हमरा श्रृंगारो-पटार तँ करऽ दिअ ।चलैक तँ छैहे ।
श्याम- अहाँकेँ श्रृंगार-पटारक कोन जरूरति अछि ।अहाँ अपने सब श्रृंगारक बाप छी ।सुन्दरतामे अहाँकेँ के पछाड़ि सकैए ?इएह रूप तँ हमर मोनकेँ घायल केने जा रहल अछि ।मोन करैत अछि एखने पजिया ली ।
राधा- हेऽऽ, बेसी रोमान्टिक बात नै बनाउ ।ई मक्खन लगबैक कोनो जरूरति नै छै ।(एटैची दिस देखबैत )ओहि एटैचीमे पूरा-पूरी दस लाख टाका अछि ।सम्हारि कऽ राखि लिअ ।हम फट दऽ तैयार भऽ झट दऽ आबै छी ।
श्याम- ठीक छै, जाउ ।बेसी देर नै करब ।कने जल्दीए आएब ।
(राधा चलि जाइत अछि ।राजाक प्रवेश होइत अछि ।)
राजा- (श्यामकेँ देखि कऽ) अहाँ के छी ?अहाँकेँ नै चिन्हलौ ।
श्याम- हम राधाक नैहरसँ आएल छी ।हुनकर माएक मोन खराप छै ने, तेँ विदागरी करबै लेल आएल छी ।
राजा- ओऽऽऽ... बुझलौं ।आबैमे कोनो प्रकारक दिक्कत-सिक्कत तँ नै ने भेल ?
श्याम- नै नै ।कोनो दिक्कत नै भेल ।
राजा- भौजीक माए केहन छथिन ?
श्याम- केहन छथि से की बताउँ ।हालत बड नाजूक छै ।राधासँ दूर भेलाक बादसँ बड तड़पैत छलथि ।खाएब-पियब, सूतब-उठब सब बिसरा जाइत छलनि ।आखिर प्रेम तँ प्रेम होइ छै ।आब राधा जेतीह तँ सब ठीक भऽ जेतै ।
राजा- हँऽऽऽ, ठीक तँ भैये जेथिन ।मुदा भौजीक एलासँ तड़पै छलथि, से नै बुझलौं ।बिमारी तँ इम्हर आबि कऽ भेलनि, तखन शुरूएसँ प्रेमिकासँ दूर भेल प्रेमी जकाँ किए तड़पै छलथि ।
क्रमश:
राधा- कहि तँ ठीके रहल छी, मुदा आब एहन कोनो बन्हन नै छै ।आब नारी मुक्त गगनमे विचरण करै बला चिड़ाँइ बनि गेल छै ।आब कोनो पिंजरा ओकरा बन्न कऽ नै राखि सकैए ।ने सासुर आ ने सासुरक लोक ।
मुरली- जे नारी सासुरक प्रति एहन सोच राखैत अछि ओकर जिनगी दुखसँ भरि जाइ छै ।जकरा अपन पतिक प्रति प्रेम नै रहै छै ओ नारी डगराक बैगन बनि जाइ छै ।ने इम्हरके, ने उम्हरके ।किम्हरोके नै रहै छै ।नैहर-सासुर सब दुआरि ओकरा लेल बन्न भऽ जाइ छै ।ओकरा गलत नजरिसँ देखल जाइ...
(श्यामक प्रवेश होइत अछि ।श्यामकेँ देख मुरली चुप भऽ जाइत अछि ।राधा आगू बढ़ैत अछि ।)
राधा- आउ...आउ ।अहींक बाट जोहि रहल छलौं ।माए लेल टाकाक जोगार भऽ गेल अछि ।आब चलैयेक मानि रहल ।
श्याम- (प्रसन्न होइत)एँ, भऽ गेलै जोगार ।बड खुशीक बात ।कमाल कऽ देलियै अहाँ ।
(मुरलीक मोबाइल टनटना उठैत अछि ।)
मुरली- (मोबाइल उठबैत) हँ...कहू डाक्टर साहेब...अच्छे ठीक छै...ठीक छै हम आबैत छी ।अहाँ तैयारी करू ।(फोन काटि कऽ राधा दिस देखैत अछि ।)राधा, हम जा रहल छी ।पाहुनकेँ खुआ-पिया दियौन ।कने सुस्ता लेथिन तखन चलि जाएब ।हमरा आबैमे देर लागत ।घरक चाभी राजाकेँ दऽ देबै ।
राधा- ठीक छै ।अहाँ निश्चिन्त भऽ जाउ ।हम चाभी दऽ देबनि ।
(मुरली चलि जाइत अछि ।राधा आ श्याम एक-दोसरक बाँहिमे बन्हा जाइत अछि ।)
राधा- कते दिन बाद ई सुखद स्पर्श भेल अछि ।मोन होइत अछि एहिना जिनगी गुजारि दी ।
श्याम- बड तड़पेलौं अहाँ ।आब तँ अपने दुनूक राज चलतै ।चिन्ता-फिकीर जुनि करू ।आब तँ सब दिन शहरमे सब संसाधनक बीच एहन-एहन सुखद स्पर्श होइते रहतै ।
राधा- हमरा तँ एतऽ साँस फूलऽ लागैत अछि ।(दुनू अलग होइत अछि ।) चलू हाथ-मूँह धोइ लिअ ।अहाँक पसीनक तरकारी बनेने छी ।खा-पी लिअ तखन चलब ।
श्याम- हे, ई सब झंझट छोरू ।खान-पान रश्तोमे हेतै ।जल्दीसँ जल्दी एतऽसँ मुक्ती लिअ ।आइ साँझ धरि पहुँचि जेबै तँ आइये वियाहो कऽ लेब ।
राधा- एते धड़फड़ाइ किए छी !आब कोनो तरहक वाधा-विध्न नै छै ।वियाह तँ हेबे करतै ।नै खएब तँ नै खाउ ।कमसँ कम हमरा श्रृंगारो-पटार तँ करऽ दिअ ।चलैक तँ छैहे ।
श्याम- अहाँकेँ श्रृंगार-पटारक कोन जरूरति अछि ।अहाँ अपने सब श्रृंगारक बाप छी ।सुन्दरतामे अहाँकेँ के पछाड़ि सकैए ?इएह रूप तँ हमर मोनकेँ घायल केने जा रहल अछि ।मोन करैत अछि एखने पजिया ली ।
राधा- हेऽऽ, बेसी रोमान्टिक बात नै बनाउ ।ई मक्खन लगबैक कोनो जरूरति नै छै ।(एटैची दिस देखबैत )ओहि एटैचीमे पूरा-पूरी दस लाख टाका अछि ।सम्हारि कऽ राखि लिअ ।हम फट दऽ तैयार भऽ झट दऽ आबै छी ।
श्याम- ठीक छै, जाउ ।बेसी देर नै करब ।कने जल्दीए आएब ।
(राधा चलि जाइत अछि ।राजाक प्रवेश होइत अछि ।)
राजा- (श्यामकेँ देखि कऽ) अहाँ के छी ?अहाँकेँ नै चिन्हलौ ।
श्याम- हम राधाक नैहरसँ आएल छी ।हुनकर माएक मोन खराप छै ने, तेँ विदागरी करबै लेल आएल छी ।
राजा- ओऽऽऽ... बुझलौं ।आबैमे कोनो प्रकारक दिक्कत-सिक्कत तँ नै ने भेल ?
श्याम- नै नै ।कोनो दिक्कत नै भेल ।
राजा- भौजीक माए केहन छथिन ?
श्याम- केहन छथि से की बताउँ ।हालत बड नाजूक छै ।राधासँ दूर भेलाक बादसँ बड तड़पैत छलथि ।खाएब-पियब, सूतब-उठब सब बिसरा जाइत छलनि ।आखिर प्रेम तँ प्रेम होइ छै ।आब राधा जेतीह तँ सब ठीक भऽ जेतै ।
राजा- हँऽऽऽ, ठीक तँ भैये जेथिन ।मुदा भौजीक एलासँ तड़पै छलथि, से नै बुझलौं ।बिमारी तँ इम्हर आबि कऽ भेलनि, तखन शुरूएसँ प्रेमिकासँ दूर भेल प्रेमी जकाँ किए तड़पै छलथि ।
क्रमश:
गुरुवार, 26 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-11)
सेनूर छै अनमोल (भाग-11)
(राजाक प्रवेश होइत अछि ।)
मुरली- (राधासँ) जाउ, कने चाह बनाउ ।चौकोपर नै पीब सकलियै ।
(राधा चलि जाइत अछि ।राजा कुर्सीपर बैस रहैत अछि ।)
मुरली- मीता, हम बड पैघ संकटमट फँसि गेल छी ।दूध, माँछ दुनू बाँतर बला पढ़ि भऽ गेल अछि ।
राजा- कोहन संकट ?
मुरली- एकाएक 10-12 लाख टाकाक आवश्यकता पड़ि गेल अछि ।कत्तौसँ जोगार कर ।
राजा- एते पाइ लऽ कऽ की करबहीं ?
मुरली- हमर सासु होस्पिटलाइज छै ।एतबे नै, जँ आइ टाकाक वेवस्था नै करबै तँ काल्हि राधा जहर खा लेतै ।
राजा- मुदा आइ-काल्हि तँ बैंको बंद छै ।एते बेसी रकम किओ देबो नै करतै ।(कने सोचैत ।) हँ एकटा रश्ता छै ।
मुरली- कोन ?
राजा- रश्ता तँ कने खतरनाक छै, मुदा टाका भेंटबाक हण्ड्रेड परशेन्ट गाइरेन्टी छै ।
मुरली- हम सब खतरा उठबै लेल तैयार छी ।हमरा केवल टाका चाही ।बस ।केनाहुँतो राधाकेँ जहर खाइसँ बचबैक छै ।
राजा- चल ।भेंट-घाँट कऽ टाका दिया दै छियौ ।
(दुनू उठि कऽ जाइत अछि ।पर्दा खसैत अछि ।)
***पट परिवर्तन***तेसर पट***
(मुरलीक घर ।राधा बैगमे कपड़ा राखि रहल अछि ।कपड़ा राखि चेन लगबैत अछि ।)
राधा- धन्यवाद भगवान ।छअए-सात महिनामे मुक्ति दिया देलौं ।बस किछुए घण्टा बचल अछि तकर बात एहि जेलसँ अजादी...नव दुनियाँसँ मिलन...(नम्हर साँस छोड़ैत ।) आह, जल्दीसँ रुपैया हाथमे आबि जाइ, बस ।
(हाथमे एटैची लेने मुरलीक प्रवेश होइत अछि ।)
मुरली- सब तैयारी भऽ गेल ने ?
राधा- हँ, सबटा चीज-बीत सैंता गेल ।हमरा जानैत तँ किछु नै छुटल, खाली टाका...
मुरली- चारि दिनसँ एकरे वेवस्थामे लागल छी ।(एटैत दैत) हे लिअ, पूरा-पूरी दस लाख अछि ।
राधा- (एटैची लैत ) एते पैघ एमाउण्ट कतऽसँ जोगार केलियै ?
मुरली- आब के देलकै, कतऽसँ एलै, एकर फेरमे अहाँ किए पड़ैत छी ? अहाँ आम खाउ, गाछ किए गानऽ लागै छी ।
राधा- तैयो बुझनाइ जरूरी छै ने ?
मुरली- जतऽ कतौसँ एलै, बड मोसकिलसँ एलैए ।अहाँ एतबे बुझू, हमरा लेल ई टाका बड महग पड़ल अछि ।बड किमती चीज बेचऽ पड़ल अछि एहि टाका लेल ।
राधा- किछु बेचैलए के कहने छलय ?उधारी कतौसँ वेवस्था करितौं ।बेचल वस्तु फेर भेटत की नै से के जानलकैए ?की बेचलियै ?
मुरली- फेर वएह बात ।अहाँकेँ टाका चाही छल, से भेट गेल ।आब बेसी जाँच-पड़ताल जुनि करू ।
राधा- ठीक छै...ठीक छै ।बेसी तमसाउ नै ।हम कथी लए जाँच-पड़ताल करब ।जे हमरा चाही छल से भेटिए गेल ।भगवान चाहथिन तँ बेचलाहा चीज फेर किना जेतै ।
मुरली- भगवान करथि जे अहाँक बात सत भऽ जाए ।अहाँ कहने रहियै जे अहाँकेँ लऽ जाइ लेल किओ एताह ।कखन धरि एताह ?हमरा कतौ जाइक छै ।सवेरे आबितथि तँ भेट कऽ लितियै ।
राधा- आबति हेतै ।दू घण्टा पहिने घरसँ चलि देने छलै ।(कने रुकैत ।) चाह पीबै की ?
मुरली- नै ।एखन चाह छोरू ।कने पानि पिया दिअ ।घबराहटसँ कण्ठ सूखि गेल अछि ।
(राधा जगसँ पानि ढारि पिबैत अछि ।)
राधा- कोन कारणसँ घबराहट भऽ रहल अछि ?
मुरली- कारण एकटा रहय तखन ने कहब ।मारिते रास कारण अछि ।पहिल कारण तँ अहाँ जानिते हएब ?
राधा- की ?
मुरली- आब अहाँ बिन हम कोना रहबै ?हमरा अहाँ सिनेह दिअ वा नै दिअ, हम तँ अहाँसँ बड सिनेह करैत छी ।प्रेम तँ हम कऽ लैत छी, मुदा पाइ... पाइये बेर पिछड़ि जाइ छी ।भगवानो बड पैघ खेलाड़ी छथि ।हमरा मोनमे प्रेमक सागर तँ दऽ देलखिन, मुदा टाकाक खत्तो-खुत्ती नै देलखिन ।
राधा- की करबै ?दुनियाँमे सब अमीरे तँ नै भऽ जाइ छै ।जखन हाथक पाँचो अंगुरी बराबर नै होइ छै तँ एक समाजक सब लोक कोना बराबर हेतै !ओनाहितो एक-दोसराक मुल्यांकनक लेल विविधता तँ जरूरिये छैक ।
क्रमश:
(राजाक प्रवेश होइत अछि ।)
मुरली- (राधासँ) जाउ, कने चाह बनाउ ।चौकोपर नै पीब सकलियै ।
(राधा चलि जाइत अछि ।राजा कुर्सीपर बैस रहैत अछि ।)
मुरली- मीता, हम बड पैघ संकटमट फँसि गेल छी ।दूध, माँछ दुनू बाँतर बला पढ़ि भऽ गेल अछि ।
राजा- कोहन संकट ?
मुरली- एकाएक 10-12 लाख टाकाक आवश्यकता पड़ि गेल अछि ।कत्तौसँ जोगार कर ।
राजा- एते पाइ लऽ कऽ की करबहीं ?
मुरली- हमर सासु होस्पिटलाइज छै ।एतबे नै, जँ आइ टाकाक वेवस्था नै करबै तँ काल्हि राधा जहर खा लेतै ।
राजा- मुदा आइ-काल्हि तँ बैंको बंद छै ।एते बेसी रकम किओ देबो नै करतै ।(कने सोचैत ।) हँ एकटा रश्ता छै ।
मुरली- कोन ?
राजा- रश्ता तँ कने खतरनाक छै, मुदा टाका भेंटबाक हण्ड्रेड परशेन्ट गाइरेन्टी छै ।
मुरली- हम सब खतरा उठबै लेल तैयार छी ।हमरा केवल टाका चाही ।बस ।केनाहुँतो राधाकेँ जहर खाइसँ बचबैक छै ।
राजा- चल ।भेंट-घाँट कऽ टाका दिया दै छियौ ।
(दुनू उठि कऽ जाइत अछि ।पर्दा खसैत अछि ।)
***पट परिवर्तन***तेसर पट***
(मुरलीक घर ।राधा बैगमे कपड़ा राखि रहल अछि ।कपड़ा राखि चेन लगबैत अछि ।)
राधा- धन्यवाद भगवान ।छअए-सात महिनामे मुक्ति दिया देलौं ।बस किछुए घण्टा बचल अछि तकर बात एहि जेलसँ अजादी...नव दुनियाँसँ मिलन...(नम्हर साँस छोड़ैत ।) आह, जल्दीसँ रुपैया हाथमे आबि जाइ, बस ।
(हाथमे एटैची लेने मुरलीक प्रवेश होइत अछि ।)
मुरली- सब तैयारी भऽ गेल ने ?
राधा- हँ, सबटा चीज-बीत सैंता गेल ।हमरा जानैत तँ किछु नै छुटल, खाली टाका...
मुरली- चारि दिनसँ एकरे वेवस्थामे लागल छी ।(एटैत दैत) हे लिअ, पूरा-पूरी दस लाख अछि ।
राधा- (एटैची लैत ) एते पैघ एमाउण्ट कतऽसँ जोगार केलियै ?
मुरली- आब के देलकै, कतऽसँ एलै, एकर फेरमे अहाँ किए पड़ैत छी ? अहाँ आम खाउ, गाछ किए गानऽ लागै छी ।
राधा- तैयो बुझनाइ जरूरी छै ने ?
मुरली- जतऽ कतौसँ एलै, बड मोसकिलसँ एलैए ।अहाँ एतबे बुझू, हमरा लेल ई टाका बड महग पड़ल अछि ।बड किमती चीज बेचऽ पड़ल अछि एहि टाका लेल ।
राधा- किछु बेचैलए के कहने छलय ?उधारी कतौसँ वेवस्था करितौं ।बेचल वस्तु फेर भेटत की नै से के जानलकैए ?की बेचलियै ?
मुरली- फेर वएह बात ।अहाँकेँ टाका चाही छल, से भेट गेल ।आब बेसी जाँच-पड़ताल जुनि करू ।
राधा- ठीक छै...ठीक छै ।बेसी तमसाउ नै ।हम कथी लए जाँच-पड़ताल करब ।जे हमरा चाही छल से भेटिए गेल ।भगवान चाहथिन तँ बेचलाहा चीज फेर किना जेतै ।
मुरली- भगवान करथि जे अहाँक बात सत भऽ जाए ।अहाँ कहने रहियै जे अहाँकेँ लऽ जाइ लेल किओ एताह ।कखन धरि एताह ?हमरा कतौ जाइक छै ।सवेरे आबितथि तँ भेट कऽ लितियै ।
राधा- आबति हेतै ।दू घण्टा पहिने घरसँ चलि देने छलै ।(कने रुकैत ।) चाह पीबै की ?
मुरली- नै ।एखन चाह छोरू ।कने पानि पिया दिअ ।घबराहटसँ कण्ठ सूखि गेल अछि ।
(राधा जगसँ पानि ढारि पिबैत अछि ।)
राधा- कोन कारणसँ घबराहट भऽ रहल अछि ?
मुरली- कारण एकटा रहय तखन ने कहब ।मारिते रास कारण अछि ।पहिल कारण तँ अहाँ जानिते हएब ?
राधा- की ?
मुरली- आब अहाँ बिन हम कोना रहबै ?हमरा अहाँ सिनेह दिअ वा नै दिअ, हम तँ अहाँसँ बड सिनेह करैत छी ।प्रेम तँ हम कऽ लैत छी, मुदा पाइ... पाइये बेर पिछड़ि जाइ छी ।भगवानो बड पैघ खेलाड़ी छथि ।हमरा मोनमे प्रेमक सागर तँ दऽ देलखिन, मुदा टाकाक खत्तो-खुत्ती नै देलखिन ।
राधा- की करबै ?दुनियाँमे सब अमीरे तँ नै भऽ जाइ छै ।जखन हाथक पाँचो अंगुरी बराबर नै होइ छै तँ एक समाजक सब लोक कोना बराबर हेतै !ओनाहितो एक-दोसराक मुल्यांकनक लेल विविधता तँ जरूरिये छैक ।
क्रमश:
बुधवार, 25 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-10)
सेनूर छै अनमोल (भाग-10)
श्याम- ओफ-ओह राधा रानी, अहाँ बड मूर्ख छी ।जखन अपन घरबलाकेँ छोड़िये रहल छी, ओकरासँ मिसियो मोह अछिए नै, तखन ओकरा लेल चिन्ता किए करैत छी ?अहाँ आम खाइपर धियान दियौ, गाछ गानैक काज मुरलियेपर छोड़ि दियौ ।
राधा- ठीक छै ।हम प्रयास करब ।
श्याम- ठीक छै ।चारिम दिन हम आएब ।अहाँ सब किछु सैंत-सम्हारि कऽ तैयार रहब ।घर छोड़लाक बाद अगिले दिन कोनो मंदीरमे दुनू गोटा वियाह कऽ लेब ।की ठीक छै ने ?
राधा- हँ हँ, ठीक छै ।हम विरहिन बनि अहाँक बाट जोहब ।गुड बाइ ।टेक केयर ।
श्याम- गुड बाइ ।
(फोन काटि राधा मंचपर टहलऽ लागैत अछि ।मोने-मोन सोचैक अभिनय करैत अछि ।)
राधा- की करियै ?कोना करियै ?समय बड कम छै ।गहना-गुड़िया. कपड़ा-लत्ता तँ हम लऽ लेबै, मुदा... एते जल्दी टाकाक जोगार कोना हेतै ?कोन झूठ बाजि कऽ टाका माँगबै ?...सात मास जकरा संग रहलियै ओकरा कोना छोड़ि सकबै !...जे अपन मोनक सबटा बात हमरा बता दै छै हुनका एते पैघ बात कोना ने बतैयै !एसगर एहि घरमे कोन हालत हेतै ओकर, भगबाने जानथि ।...आखिर श्यामे जकाँ इहो तँ हमरासँ खूब प्रेम करैत छथिन...नै राधा नै, तूँ एहि नरकसँ निकलि जो ।मुरलीसँ जुटैत प्रेमक ताग तोरा लेल खतरनाक छौ ।...सत्ते तँ कहै छै ।हमरा टाका चाही, प्रेम तँ ढल्ला भेंट जेतै ।...हँ हमरा हिनका छोड़ि श्यामे संग जाए पड़तै ...आब नै रुकबै...आब श्याम संगे चलि जेबै...हिनकासँ मोह नै करबै ...चलि जेबै...आब बिना बतेने चलि जेबै ।
(मुरलीक प्रवेश होइत अछि ।मुरलीकेँ देखिते राधा कानऽ लागैत अछि ।)
राधा- (कानैत आ छाती पीटैत ।) अरे बाप रे बाप...आब हम की करियै रे बाप...हमरा टुअर किए बनबै छें गे माए... अगे माए गै माए...आब हमरा के देखतै गे माए... (मुरली चुप करबऽ लागैत अछि ।)
मुरली- की भेलै ? किए कानैत छी ? चुप भऽ जाउ ।
राधा- (कानैत) नै यौ, हम कोना चुप भऽ जैयै यौ ! हौ दैवा हौ दैवा... हम कोन कसूर केन छलियै हौ दैवा...हौ दैवा हमर माएसँ कोन जनमक दुश्मनी निकाललहो हो दैवाऽऽऽ...
मुरली- पहिने अहाँ चुप भऽ जाउ ।ठीक-ठीक बताउ ने, की भेलै ?ककरा के की कऽ देलकै ?
राधा- (कानैत) हमर माए मरि रहल छै...आब हम की करियै हो राम...होस्पिटलमे भरती भेल छै हम माए ...माए गे माए ...
मुरली- होस्पिटलमे छथि तँ कानै किए छी ?दबाई-सुइया चलिते हेतै, ठीक भऽ जेथिन ।काल्हिये चलू माएसँ भेंट करा देब ।ऐमे कानैक कोन बात छै !
राधा- पाइ रहतै तखन ने ठीक हेतै । कोनो छोट-मोट रोग रहितै तखन ने कम-सममे होइतै ।कैंसर छै ।कीमोथेरेपी करबऽ पड़तै ।25 लाख धरि रूपैया चाही ।(कने रुकैत ।) किछु रुपैयासँ अहाँ मदति कऽ दितियै तँ...
मुरली- हमरा लऽग टाका रहतै तखन ने मदद करबै !
राधा- टाका नै छै तँ की भेलै ? वेवस्था तँ कएल जा सकै छै ।करियौ ।
मुरली- प्रयास करैत छी ।हमरासँ कतेक टाका चाही अहाँकेँ ?
राधा- 25 लाखक खर्चमे कमसँ कम 10-12 लाख टाका तँ देबैयै पड़तै ।
मुरली- (आश्चर्यसँ) 10-12 लाख !
राधा- और नै तँ की !
मुरली- हम तँ बुझलै 10-12 हजार ।10-12 लाख टाकाक जोगार हमरासँ सम्भव नै अछि ।जते सम्भव होइ ओतबे खर्च करैक चाही ।10-12 लाख टाकाक कर्जा चुकबैक क्षमता नै अछि हमरा ।जते पैघ चादर होइ, लोककेँ ओतबे पएर पसारैक चाही ।चलू कने-मने टाकासँ मदति कऽ देबै ।एते-एते टाका तँ गृहस्थ परिवार सपनोमे नै देखै छै ।मदति करैक तँ बाते दूर छै।
राधा- एकर मने अहाँ हमरासँ प्रेम नै करैत छी ?हमरा पत्नी रूपमे स्वीकार नै केने छी ?
मुरली- फेर, ऐमे प्रेम कतऽषँ घुसि गेलै ?एकटा बात बुझि लिअ ।अहाँ सेनूर लगाउ वा नै लगाउ, मुदा अहाँ वियाहल छी, वियाहल छी, वियाहल छी ।वियाहल नारी लेल सब किछु ओकर सासुर होइ छै, नैहर नै ।आइ अहाँक सासुरकेँ एतेक टाका देबाक ओकादि नै छै तेँ बेसी मोन नै बढ़ाउ ।
राधा- एतेक पैघ प्रवचन तँ दऽ देलियै, मुदा हमर प्रश्नक उत्तर नै देलियै ?
मुरली- प्रश्नक उत्तर की दी ?की अहाँकेँ नै बुझल अछि ?जँ हम अहाँसँ प्रेम नै करितौं तँ आइ राजा लऽग अहाँकेँ बचेबाक प्रयास नै करितौं ।पति-पत्नी होइतो, दैहिक-सम्बन्धसँ दूर रहितो, सदिखन अहाँक पक्षमे ठाढ़ छी ।की एकरा प्रेम नै कहल जाइ छै ?
राधा- पक्षमे !हूँह, पक्षमे कहाँ छी अहाँ !पक्षमे रहितियै तँ आइ पाइक वेवस्था करितियै ।दुनू कान खोलि कऽ सूनि लिअ ।जँ आइ अहाँ टाकाक जोगार नै करबै तँ काल्हि हमर मरल मुँह देखब ।हम जहर...
(मुरली राधाक मुँहपर हाथ राखि चुप करबैत अछि ।)
मुरली- देखू...हम चेतबै छी ।जे बाजलौं से बाजलौं ।आब एहन बात फेर नै बाजब ...हम प्रयास करैत छी ।जेना हेतै तेना हम टाका आनब, मुदा अहाँ मरैक विचार मोनसँ निकालि दियौ ।बुझलौं ने ?
क्रमश:
श्याम- ओफ-ओह राधा रानी, अहाँ बड मूर्ख छी ।जखन अपन घरबलाकेँ छोड़िये रहल छी, ओकरासँ मिसियो मोह अछिए नै, तखन ओकरा लेल चिन्ता किए करैत छी ?अहाँ आम खाइपर धियान दियौ, गाछ गानैक काज मुरलियेपर छोड़ि दियौ ।
राधा- ठीक छै ।हम प्रयास करब ।
श्याम- ठीक छै ।चारिम दिन हम आएब ।अहाँ सब किछु सैंत-सम्हारि कऽ तैयार रहब ।घर छोड़लाक बाद अगिले दिन कोनो मंदीरमे दुनू गोटा वियाह कऽ लेब ।की ठीक छै ने ?
राधा- हँ हँ, ठीक छै ।हम विरहिन बनि अहाँक बाट जोहब ।गुड बाइ ।टेक केयर ।
श्याम- गुड बाइ ।
(फोन काटि राधा मंचपर टहलऽ लागैत अछि ।मोने-मोन सोचैक अभिनय करैत अछि ।)
राधा- की करियै ?कोना करियै ?समय बड कम छै ।गहना-गुड़िया. कपड़ा-लत्ता तँ हम लऽ लेबै, मुदा... एते जल्दी टाकाक जोगार कोना हेतै ?कोन झूठ बाजि कऽ टाका माँगबै ?...सात मास जकरा संग रहलियै ओकरा कोना छोड़ि सकबै !...जे अपन मोनक सबटा बात हमरा बता दै छै हुनका एते पैघ बात कोना ने बतैयै !एसगर एहि घरमे कोन हालत हेतै ओकर, भगबाने जानथि ।...आखिर श्यामे जकाँ इहो तँ हमरासँ खूब प्रेम करैत छथिन...नै राधा नै, तूँ एहि नरकसँ निकलि जो ।मुरलीसँ जुटैत प्रेमक ताग तोरा लेल खतरनाक छौ ।...सत्ते तँ कहै छै ।हमरा टाका चाही, प्रेम तँ ढल्ला भेंट जेतै ।...हँ हमरा हिनका छोड़ि श्यामे संग जाए पड़तै ...आब नै रुकबै...आब श्याम संगे चलि जेबै...हिनकासँ मोह नै करबै ...चलि जेबै...आब बिना बतेने चलि जेबै ।
(मुरलीक प्रवेश होइत अछि ।मुरलीकेँ देखिते राधा कानऽ लागैत अछि ।)
राधा- (कानैत आ छाती पीटैत ।) अरे बाप रे बाप...आब हम की करियै रे बाप...हमरा टुअर किए बनबै छें गे माए... अगे माए गै माए...आब हमरा के देखतै गे माए... (मुरली चुप करबऽ लागैत अछि ।)
मुरली- की भेलै ? किए कानैत छी ? चुप भऽ जाउ ।
राधा- (कानैत) नै यौ, हम कोना चुप भऽ जैयै यौ ! हौ दैवा हौ दैवा... हम कोन कसूर केन छलियै हौ दैवा...हौ दैवा हमर माएसँ कोन जनमक दुश्मनी निकाललहो हो दैवाऽऽऽ...
मुरली- पहिने अहाँ चुप भऽ जाउ ।ठीक-ठीक बताउ ने, की भेलै ?ककरा के की कऽ देलकै ?
राधा- (कानैत) हमर माए मरि रहल छै...आब हम की करियै हो राम...होस्पिटलमे भरती भेल छै हम माए ...माए गे माए ...
मुरली- होस्पिटलमे छथि तँ कानै किए छी ?दबाई-सुइया चलिते हेतै, ठीक भऽ जेथिन ।काल्हिये चलू माएसँ भेंट करा देब ।ऐमे कानैक कोन बात छै !
राधा- पाइ रहतै तखन ने ठीक हेतै । कोनो छोट-मोट रोग रहितै तखन ने कम-सममे होइतै ।कैंसर छै ।कीमोथेरेपी करबऽ पड़तै ।25 लाख धरि रूपैया चाही ।(कने रुकैत ।) किछु रुपैयासँ अहाँ मदति कऽ दितियै तँ...
मुरली- हमरा लऽग टाका रहतै तखन ने मदद करबै !
राधा- टाका नै छै तँ की भेलै ? वेवस्था तँ कएल जा सकै छै ।करियौ ।
मुरली- प्रयास करैत छी ।हमरासँ कतेक टाका चाही अहाँकेँ ?
राधा- 25 लाखक खर्चमे कमसँ कम 10-12 लाख टाका तँ देबैयै पड़तै ।
मुरली- (आश्चर्यसँ) 10-12 लाख !
राधा- और नै तँ की !
मुरली- हम तँ बुझलै 10-12 हजार ।10-12 लाख टाकाक जोगार हमरासँ सम्भव नै अछि ।जते सम्भव होइ ओतबे खर्च करैक चाही ।10-12 लाख टाकाक कर्जा चुकबैक क्षमता नै अछि हमरा ।जते पैघ चादर होइ, लोककेँ ओतबे पएर पसारैक चाही ।चलू कने-मने टाकासँ मदति कऽ देबै ।एते-एते टाका तँ गृहस्थ परिवार सपनोमे नै देखै छै ।मदति करैक तँ बाते दूर छै।
राधा- एकर मने अहाँ हमरासँ प्रेम नै करैत छी ?हमरा पत्नी रूपमे स्वीकार नै केने छी ?
मुरली- फेर, ऐमे प्रेम कतऽषँ घुसि गेलै ?एकटा बात बुझि लिअ ।अहाँ सेनूर लगाउ वा नै लगाउ, मुदा अहाँ वियाहल छी, वियाहल छी, वियाहल छी ।वियाहल नारी लेल सब किछु ओकर सासुर होइ छै, नैहर नै ।आइ अहाँक सासुरकेँ एतेक टाका देबाक ओकादि नै छै तेँ बेसी मोन नै बढ़ाउ ।
राधा- एतेक पैघ प्रवचन तँ दऽ देलियै, मुदा हमर प्रश्नक उत्तर नै देलियै ?
मुरली- प्रश्नक उत्तर की दी ?की अहाँकेँ नै बुझल अछि ?जँ हम अहाँसँ प्रेम नै करितौं तँ आइ राजा लऽग अहाँकेँ बचेबाक प्रयास नै करितौं ।पति-पत्नी होइतो, दैहिक-सम्बन्धसँ दूर रहितो, सदिखन अहाँक पक्षमे ठाढ़ छी ।की एकरा प्रेम नै कहल जाइ छै ?
राधा- पक्षमे !हूँह, पक्षमे कहाँ छी अहाँ !पक्षमे रहितियै तँ आइ पाइक वेवस्था करितियै ।दुनू कान खोलि कऽ सूनि लिअ ।जँ आइ अहाँ टाकाक जोगार नै करबै तँ काल्हि हमर मरल मुँह देखब ।हम जहर...
(मुरली राधाक मुँहपर हाथ राखि चुप करबैत अछि ।)
मुरली- देखू...हम चेतबै छी ।जे बाजलौं से बाजलौं ।आब एहन बात फेर नै बाजब ...हम प्रयास करैत छी ।जेना हेतै तेना हम टाका आनब, मुदा अहाँ मरैक विचार मोनसँ निकालि दियौ ।बुझलौं ने ?
क्रमश:
सेनूर छै अनमोल (भाग-9)
सेनूर छै अनमोल (भाग-9)
राधा- इहो कोनो पुछैक बात छै ।हम तँ वियाह करै लेल तैयारे छलहुँ ।देर तँ अहीं केने छलियै ।बिसरि गेलियै की ?अहीं तँ बड़का भैयाक वियाह होबऽ दै लेल कहने ।अहींक कहलापर शहरी मौज-मस्ती छोड़ि कऽ एहन भुच्चर देहातमे वियाह केलौं ।देखू तँ अहींक इयादमे हमर देह दिनो दिन सुखल जा रहल अछि ।अहाँ तँ एहन रोग लगा देने छी जे खेनाइ-पिनाइ नीक नै लगैत अछि ।
श्याम- मने अहाँ तैयार छी ।चलू तखन तँ सब किछु ठीक अछि ।रश्ता क्लियर अछि, मुदा... ।
राधा- मुदा की ?
श्याम- मुदा एकटा बात एखन बाँकी अछि ।मने...मने जे छै से...कहबाक तात्पर्य जे मुरली संग कहियो ओछैन शेयर...मने जे करिखा पोताइ बला काज नै ने...
राधा- (बिच्चेमे बात काटैत ।) किए, अहाँकेँ हमरापर विश्वास नै अछि की ?
श्याम- (हँसैक चेष्ठा करैत ।)हें...हें...हें...विश्वास तँ अछिये...तैयो जे छै से श्योर भेनाइ जरूरी छै ने ?
राधा- अच्छे, एकटा बात बताउ...जँ हम पवित्र नै रहितियै...जँ हमर शील भंग भेर रहितै तँ अहाँ हमरा नै अपनबितियै ?
श्याम- हें...हें...हें...तखन कोना अपनबितियै !मने जे छै से लकड़ीक डेकची आ लड़कीक सतित्व एक बेर आगि मने पुरूषक सम्पर्कमे एकलाक बाद पुन: प्रयोग योग्य नै ने बचैत छै ?हेँ...हें...हें...खराब नै मानब ।अहीं कहू जाहि लेल वियाह करब सएह ओरिजनल नै भेटत तँ वियाह करैक फायदे की ?
राधा- ठीक छै ।आब छोरू डेकची-डेकचाक बात ।एक्कै टा बात बुझू जे हम पवित्र छी, अनमन गंगा जकाँ ।
श्याम- जखन अहाँ गंगाजल सन पवित्र छी तँ हमहूँ शिवशंकर जकाँ अपन बाँहिमे बान्हैक लेल तैयार छी ।(कने रुकैत !) पुन: कनेक टा समस्या और जनमि गेल अछि ।
राधा- कोन समस्या ? फरिछा कऽ कहू ।
श्याम- टाकाक समस्या ।इम्हर कने हाथ खाली भऽ गेल अछि ।अहाँ तँ जानिते छी, नव घर बसबैमे तेरह तरहक झंझट उत्पन्न होइ छै ।अठहत्तर ठाम खर्च होइ छै, तेँ किछु टाकाक इन्तजाम अहाँ अपना स्तरपर करू ।
राधा- हमरा कोनो बैंक बैलेन्स छै जे जोगार करब ।हमरा बुत्ते ई सब नै हएत ।
श्याम- अहाँ एते जल्दी घबड़ा किए जाइ छी !शान्तिसँ सुनू, एकरो उपाय अछि हमरा लऽग ।अहाँ लऽग जते गहना-गुड़िया अछि से सबटा अपना संगमे लऽ लेब ।किछु टाका मुरलीयोसँ झीट लिअ ।ओनाहितो एते दिनक मुँह देखाइयो तँ भेंटबाक चाही की नै ?जेना-तेना कऽ किछु लेनाहिते आएब ।
राधा- हुनको लऽग टाका नै छै ।ओ अपने खेतिहर छथिन ।हुनका रहतै तखन ने झिटबै ?ओ कतऽसँ देथिन रूपैया ।एक दिस तँ हुनकासँ वियाहक बंधन तोड़ि रहल छी आ दोसर दिस हुनकासँ रूपैया झीट ली ।नै, मोन नै मानैत अछि ।ई सब नै हएत हम बुते ।
राधा- इहो कोनो पुछैक बात छै ।हम तँ वियाह करै लेल तैयारे छलहुँ ।देर तँ अहीं केने छलियै ।बिसरि गेलियै की ?अहीं तँ बड़का भैयाक वियाह होबऽ दै लेल कहने ।अहींक कहलापर शहरी मौज-मस्ती छोड़ि कऽ एहन भुच्चर देहातमे वियाह केलौं ।देखू तँ अहींक इयादमे हमर देह दिनो दिन सुखल जा रहल अछि ।अहाँ तँ एहन रोग लगा देने छी जे खेनाइ-पिनाइ नीक नै लगैत अछि ।
श्याम- मने अहाँ तैयार छी ।चलू तखन तँ सब किछु ठीक अछि ।रश्ता क्लियर अछि, मुदा... ।
राधा- मुदा की ?
श्याम- मुदा एकटा बात एखन बाँकी अछि ।मने...मने जे छै से...कहबाक तात्पर्य जे मुरली संग कहियो ओछैन शेयर...मने जे करिखा पोताइ बला काज नै ने...
राधा- (बिच्चेमे बात काटैत ।) किए, अहाँकेँ हमरापर विश्वास नै अछि की ?
श्याम- (हँसैक चेष्ठा करैत ।)हें...हें...हें...विश्वास तँ अछिये...तैयो जे छै से श्योर भेनाइ जरूरी छै ने ?
राधा- अच्छे, एकटा बात बताउ...जँ हम पवित्र नै रहितियै...जँ हमर शील भंग भेर रहितै तँ अहाँ हमरा नै अपनबितियै ?
श्याम- हें...हें...हें...तखन कोना अपनबितियै !मने जे छै से लकड़ीक डेकची आ लड़कीक सतित्व एक बेर आगि मने पुरूषक सम्पर्कमे एकलाक बाद पुन: प्रयोग योग्य नै ने बचैत छै ?हेँ...हें...हें...खराब नै मानब ।अहीं कहू जाहि लेल वियाह करब सएह ओरिजनल नै भेटत तँ वियाह करैक फायदे की ?
राधा- ठीक छै ।आब छोरू डेकची-डेकचाक बात ।एक्कै टा बात बुझू जे हम पवित्र छी, अनमन गंगा जकाँ ।
श्याम- जखन अहाँ गंगाजल सन पवित्र छी तँ हमहूँ शिवशंकर जकाँ अपन बाँहिमे बान्हैक लेल तैयार छी ।(कने रुकैत !) पुन: कनेक टा समस्या और जनमि गेल अछि ।
राधा- कोन समस्या ? फरिछा कऽ कहू ।
श्याम- टाकाक समस्या ।इम्हर कने हाथ खाली भऽ गेल अछि ।अहाँ तँ जानिते छी, नव घर बसबैमे तेरह तरहक झंझट उत्पन्न होइ छै ।अठहत्तर ठाम खर्च होइ छै, तेँ किछु टाकाक इन्तजाम अहाँ अपना स्तरपर करू ।
राधा- हमरा कोनो बैंक बैलेन्स छै जे जोगार करब ।हमरा बुत्ते ई सब नै हएत ।
श्याम- अहाँ एते जल्दी घबड़ा किए जाइ छी !शान्तिसँ सुनू, एकरो उपाय अछि हमरा लऽग ।अहाँ लऽग जते गहना-गुड़िया अछि से सबटा अपना संगमे लऽ लेब ।किछु टाका मुरलीयोसँ झीट लिअ ।ओनाहितो एते दिनक मुँह देखाइयो तँ भेंटबाक चाही की नै ?जेना-तेना कऽ किछु लेनाहिते आएब ।
राधा- हुनको लऽग टाका नै छै ।ओ अपने खेतिहर छथिन ।हुनका रहतै तखन ने झिटबै ?ओ कतऽसँ देथिन रूपैया ।एक दिस तँ हुनकासँ वियाहक बंधन तोड़ि रहल छी आ दोसर दिस हुनकासँ रूपैया झीट ली ।नै, मोन नै मानैत अछि ।ई सब नै हएत हम बुते ।
सोमवार, 23 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-8)
सेनूर छै अनमोल (भाग-8)
मुरली- एँ रौ, हमरा किए हएत झगड़ा !हमर कनियाँ छथिये चानक टुकड़ा, फूल कुमारी, दूधक छाल्ही, हमरा किए हएत झगड़ा !हम तँ सदिखन प्रेमक वाटिकामे विचरण करैत रहैत छी ।(राधा दिस घुमैत) की यै, ठीक कहलौं ने ?
राधा- (जेना धियान भंग भऽ गेल होइ ।हड़बड़ाइत ।)हँ...हँ, हेतै किए नै ।जरूर हेतै झगड़ा...की हमरा दऽ कहलियै ?...नै नै, झगड़ा किए हेतै...हमरा दुनूमे प्रेम हेतै, झगड़ा कथी लए हेतै !
मुरली- (राजा दिस घुमैत)आब बाज...आब तँ समर्थन भेंट गेलौ ?
राजा- जाए दहीं...जाए दहीं ।बड भेलौ फुस्टींग ।तोरासँ बतियाइये बला बड पैघ मुर्ख होइ छै ।
मुरली- तँ नै ने बतिया ।
राजा- नहियें बतियेबौ की ।(घुसकि कऽ राधा लऽग जाइत अछि ।)हम तँ आब भौजीएसँ बतियेबै ।की यै भौजी, बतियेबै ने अपन देउरसँ ?
राधा- हँ हँ, किए ने बतियेबै ।भरि पोख बतियेबै ।
राजा- अच्छे भौजी, एकटा बात बताउ ।अहाँ वियाहल छी वा कुमारि ?
राधा- (हँसैत) हा...हा...हा...ई केहन प्रश्न भेल ?एखने अहाँ पत्नी-पत्नी करैत छलियै आ एखने एहन प्रश्न पुछैत छियै ? की अहाँकेँ नै बुझल अछि जे कोनो नारी पत्नी कखन बनैत छै ?
राजा- बुझल किए ने रहत !नीक जकाँ बुझल अछि, मुदा अहाँक माँगमे सेनूर नै अछि ने तेँ आशंका भेल ।
(राधा चुप रहैत अछि ।)
मुरली- नै बुझलहीं मीता, सेनूर लगेलासँ राधाक माँथ दुखाए लागै छै ।ओनाहितो राधाकेँ कम दामक समान उपयोग करैक आदत नै छै ।सेनूरक दाम तँ बुझिते छहीं पाँच-दस टाका...
राजा- से तँ बुझलियौ, मुदा हिन्दू धर्मक नियम तँ नै तोड़ि सकै छी ने ।सेनूर लगेबाक तँ अपन सभक परम्परा रहल अछि ।वियाहमे सिन्दूर दानक बिध होइ छै । सेनूर नै लगेलासँ वियाहक कोनो महत्वे नै बचै छै ।ओनाहितो विज्ञान कहै छै जे सेनूर वा चानन लगेलासँ एकाग्रता बढ़ै छै ।माँथ दुखाइ बला बात तँ एखन धरि कतौ नै पढ़लियै ।
मुरली- जाए दहीं ।एहि बातपर बहस केलासँ कोनो फायदा नै छै ।हम पति-पत्नीक बीच मजगूत प्रेम हेबाक वकालत करब ।सेनूर-तेनूरसँ की हेतै ।केवल प्रेम हेबाक चाही ।आब ई सब तँ मात्र ढोअल जाइ छै ।आधुनिका सबकेँ गिरने जा रहल छी ।राधा नै चाहै छै तँ नै लगबौ ।प्रेम तँ अछि आ रहबे करत ।
राजा- तैयो...
मुरली- तैयो-बैयो किछु नै ।विश्वमे बहुते समुदाय एहन छै जे सेनूर नै लगबै छै, ओकरा की करबहीं ? सामाजिक आ किनूनी, दुनू द्वारा पति-पत्नी तँ ओकरो मानले जाइ छै ।(राजा हँमे मूड़ि डोलबैत अछि ।) बड घिचम-तिरा भेलै ।माँथ दुखाए लागल ।चल कने चौकपर सँ भऽ आबी ।
राजा- चल चल ।रघुआ हाथक कचरी खेला बड दिन भऽ गेलै ।ओकरो सुआद लऽ लेबै ।
(राजा आ मुरली पर्दाक पाछु चलि जाइत अछि ।)
राधा- (पैघ साँस छोड़ैत ।)ओह, केहन-केहन सबाल पूछऽ लागल रहै !ओ जँ नै सम्हारितथि तँ सब भंडा आइये फूटि जैतै ।एखने पता चलि जैतै जे हमरा दुनूक बीच पति-पत्निक रिश्ता मात्र देखाबा लेल छै ।
(तखने मोबाइलक घण्टी बजैत अछि ।राधा फोन उठबैत अछि ।)
राधा- हेलौ,..हेलौ...के बाजैत छी ?
(फोनपर श्यामक अवाज सुनाइत अछि ।*नोट- श्यामकेँ पर्दाक पाछू राखि संवाद कराएल जाए ।*)
श्याम- नै चिन्हलौं हमरा ?आइ-काल्हि लोक एनाहिते बिसरि जाइ छै ।आब हमर जरूरते कोन अछि अहाँकेँ जे हमरा इयाद राखब ।
राधा- सहीमे हम नै चिन्हलौं ।आब पहेली बुझेनाइ छौरू आ अहाँ के छी से बताउ ।
श्याम- हमरा नै चिन्ह कऽ अहाँ अपने एकटा पहेली ठाढ़ कऽ देने छी ।अहाँ राधा छी ने?
राधा- हँ हँ ।हम राधा छी ।
श्याम- हम श्याम छी ।अहाँक श्याम ।आब चिन्हलौं की नै ?
राधा- अच्छे श्याम...अरे बाप रे बाप...अहाँकेँ कोना नै चिन्ह पेलियै ! बड दिन बाद मोन पाड़लियै...नीक जकाँ छी ने ?
श्याम- हँ हँ ।हम नीक जकाँ छी ।अहाँ बिना कने उदास छी ।अपन बताउ ?
राधा- हमहूँ ठीके-ठाक छी ।ओना उदासी तँ हमरो अहीं जकाँ अछिये ।
श्याम- अहाँक पति केहन छथि...मने केहन मिजाजक छथि ?
राधा- स्वस्थ छथि ।लोकमिल्लू छथि ।लोकक सामने देखार नै हुअऽ दैत छथि ।
श्याम- तखन तँ ठीक अछि ।कहलौं जे आब लाइन क्लियर भऽ गेल अछि ।बड़का भैयाक वियाह भऽ गेल अछि ।आब हमरो वियाहक बात उठि रहल अछि ।हम सब एगंलसँ रेडी छी ।अहाँ हमरासँ वियाह करबाक लेल रेडी छी ने ?
मुरली- एँ रौ, हमरा किए हएत झगड़ा !हमर कनियाँ छथिये चानक टुकड़ा, फूल कुमारी, दूधक छाल्ही, हमरा किए हएत झगड़ा !हम तँ सदिखन प्रेमक वाटिकामे विचरण करैत रहैत छी ।(राधा दिस घुमैत) की यै, ठीक कहलौं ने ?
राधा- (जेना धियान भंग भऽ गेल होइ ।हड़बड़ाइत ।)हँ...हँ, हेतै किए नै ।जरूर हेतै झगड़ा...की हमरा दऽ कहलियै ?...नै नै, झगड़ा किए हेतै...हमरा दुनूमे प्रेम हेतै, झगड़ा कथी लए हेतै !
मुरली- (राजा दिस घुमैत)आब बाज...आब तँ समर्थन भेंट गेलौ ?
राजा- जाए दहीं...जाए दहीं ।बड भेलौ फुस्टींग ।तोरासँ बतियाइये बला बड पैघ मुर्ख होइ छै ।
मुरली- तँ नै ने बतिया ।
राजा- नहियें बतियेबौ की ।(घुसकि कऽ राधा लऽग जाइत अछि ।)हम तँ आब भौजीएसँ बतियेबै ।की यै भौजी, बतियेबै ने अपन देउरसँ ?
राधा- हँ हँ, किए ने बतियेबै ।भरि पोख बतियेबै ।
राजा- अच्छे भौजी, एकटा बात बताउ ।अहाँ वियाहल छी वा कुमारि ?
राधा- (हँसैत) हा...हा...हा...ई केहन प्रश्न भेल ?एखने अहाँ पत्नी-पत्नी करैत छलियै आ एखने एहन प्रश्न पुछैत छियै ? की अहाँकेँ नै बुझल अछि जे कोनो नारी पत्नी कखन बनैत छै ?
राजा- बुझल किए ने रहत !नीक जकाँ बुझल अछि, मुदा अहाँक माँगमे सेनूर नै अछि ने तेँ आशंका भेल ।
(राधा चुप रहैत अछि ।)
मुरली- नै बुझलहीं मीता, सेनूर लगेलासँ राधाक माँथ दुखाए लागै छै ।ओनाहितो राधाकेँ कम दामक समान उपयोग करैक आदत नै छै ।सेनूरक दाम तँ बुझिते छहीं पाँच-दस टाका...
राजा- से तँ बुझलियौ, मुदा हिन्दू धर्मक नियम तँ नै तोड़ि सकै छी ने ।सेनूर लगेबाक तँ अपन सभक परम्परा रहल अछि ।वियाहमे सिन्दूर दानक बिध होइ छै । सेनूर नै लगेलासँ वियाहक कोनो महत्वे नै बचै छै ।ओनाहितो विज्ञान कहै छै जे सेनूर वा चानन लगेलासँ एकाग्रता बढ़ै छै ।माँथ दुखाइ बला बात तँ एखन धरि कतौ नै पढ़लियै ।
मुरली- जाए दहीं ।एहि बातपर बहस केलासँ कोनो फायदा नै छै ।हम पति-पत्नीक बीच मजगूत प्रेम हेबाक वकालत करब ।सेनूर-तेनूरसँ की हेतै ।केवल प्रेम हेबाक चाही ।आब ई सब तँ मात्र ढोअल जाइ छै ।आधुनिका सबकेँ गिरने जा रहल छी ।राधा नै चाहै छै तँ नै लगबौ ।प्रेम तँ अछि आ रहबे करत ।
राजा- तैयो...
मुरली- तैयो-बैयो किछु नै ।विश्वमे बहुते समुदाय एहन छै जे सेनूर नै लगबै छै, ओकरा की करबहीं ? सामाजिक आ किनूनी, दुनू द्वारा पति-पत्नी तँ ओकरो मानले जाइ छै ।(राजा हँमे मूड़ि डोलबैत अछि ।) बड घिचम-तिरा भेलै ।माँथ दुखाए लागल ।चल कने चौकपर सँ भऽ आबी ।
राजा- चल चल ।रघुआ हाथक कचरी खेला बड दिन भऽ गेलै ।ओकरो सुआद लऽ लेबै ।
(राजा आ मुरली पर्दाक पाछु चलि जाइत अछि ।)
राधा- (पैघ साँस छोड़ैत ।)ओह, केहन-केहन सबाल पूछऽ लागल रहै !ओ जँ नै सम्हारितथि तँ सब भंडा आइये फूटि जैतै ।एखने पता चलि जैतै जे हमरा दुनूक बीच पति-पत्निक रिश्ता मात्र देखाबा लेल छै ।
(तखने मोबाइलक घण्टी बजैत अछि ।राधा फोन उठबैत अछि ।)
राधा- हेलौ,..हेलौ...के बाजैत छी ?
(फोनपर श्यामक अवाज सुनाइत अछि ।*नोट- श्यामकेँ पर्दाक पाछू राखि संवाद कराएल जाए ।*)
श्याम- नै चिन्हलौं हमरा ?आइ-काल्हि लोक एनाहिते बिसरि जाइ छै ।आब हमर जरूरते कोन अछि अहाँकेँ जे हमरा इयाद राखब ।
राधा- सहीमे हम नै चिन्हलौं ।आब पहेली बुझेनाइ छौरू आ अहाँ के छी से बताउ ।
श्याम- हमरा नै चिन्ह कऽ अहाँ अपने एकटा पहेली ठाढ़ कऽ देने छी ।अहाँ राधा छी ने?
राधा- हँ हँ ।हम राधा छी ।
श्याम- हम श्याम छी ।अहाँक श्याम ।आब चिन्हलौं की नै ?
राधा- अच्छे श्याम...अरे बाप रे बाप...अहाँकेँ कोना नै चिन्ह पेलियै ! बड दिन बाद मोन पाड़लियै...नीक जकाँ छी ने ?
श्याम- हँ हँ ।हम नीक जकाँ छी ।अहाँ बिना कने उदास छी ।अपन बताउ ?
राधा- हमहूँ ठीके-ठाक छी ।ओना उदासी तँ हमरो अहीं जकाँ अछिये ।
श्याम- अहाँक पति केहन छथि...मने केहन मिजाजक छथि ?
राधा- स्वस्थ छथि ।लोकमिल्लू छथि ।लोकक सामने देखार नै हुअऽ दैत छथि ।
श्याम- तखन तँ ठीक अछि ।कहलौं जे आब लाइन क्लियर भऽ गेल अछि ।बड़का भैयाक वियाह भऽ गेल अछि ।आब हमरो वियाहक बात उठि रहल अछि ।हम सब एगंलसँ रेडी छी ।अहाँ हमरासँ वियाह करबाक लेल रेडी छी ने ?
शनिवार, 21 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-7)
सेनूर छै अनमोल (भाग-7)
पट परिवर्तन (दोसर पट)
( मुरलीक घरक दृश्य ।राधा घेंट झुकौने, माँथपर हाथ देने चिन्ताग्रस्त मुद्रामे बैसल अछि ।लऽगमे मुरली पत्रिका पढ़ैत अछि ।)
मुरली- (पत्रिकासँ धियान हटा राधा दिस ताकैत ।) की भेल अहाँकेँ ? किए मुँह लटकेने छी ?जहियासँ सासुर एलौं हेँ अहाँक मुँह लटकले रहैत अछि ।एतेक सुन्दर रूप-रंग देने छथि दैवा, एकरा व्यर्थ किए कऽ रहल छी ?दैवोकेँ तामस चढ़ैत हेतनि ।कखनो काल मुस्कियाएलो करियौ ।
राधा- की करबै ? जिनगियेक नाम उदासी छैक ।जखन करेजक गहराइमे बड़का टा घाव भेल छै जकर टीससँ रहि-रहि कऽ देहक अंग-अंग कानैत रहैत अछि तखन कृत्रिम मुस्कुराहटसँ कोन फायदा ?
मुरली- अहाँक टीस कोनो अहींकेँ तँ नै कनबैत अछि, हमरो कनबैत अछि ।अहाँसँ बेसी दर्द हमरा होइत अछि ।अहाँ हमर अर्द्धांगनी छी ।आधा अंग छी ।देहक आधा भाग दर्दसँ कुहरैत रहतै आ आधा भाग हँसैत रहतै, ई कतौ सम्भव छै ? नै ने ।तखन लोककेँ अपना सक भरि हँसी-खुशीसँ रहबाक चाही ।
राधा- जँ अहाँकेँ हमर एतेक चिन्ता होइत तँ हमर दर्दक दवाइ किए ने आनैत छी ?
मुरली- एकर कारण तँ अहूँकेँ नीक जकाँ बूझल अछि ।ई बात सत्य अछि जे अहाँक नैहर बला सुख-सुविधा एतऽ सम्भव नै अछि, मुदा हम तँ प्रयास कैये रहल छी ?गाममे बिजली नै छै तेँ अहाँकेँ एसी, फ्रीज आ टी॰भी॰ बला सुविधा कोना देब ।हमर आमदनी एतेक बेसी नै अछि जे अहाँकेँ लेल शहरी वेवस्था कऽ देब ।
राधा- हँ...हँ...बुझलौं...बुझलौं ।अहाँ तँ अपन बचाब करबे करबै ने ! एँ यौ दुनियाँमे लोक जँ ठानि लै छै तँ कीसँ की कऽ दै छै आ अहाँकेँ सुनिते चोन्ह लागैत अछि ।हमर उदासी नै हरि सकै छी तँ कमसँ कम बाजैयोसँ परहेज करू ।
मुरली- (तमसाइत) परहेज, परहेज तँ केनाहिते छी ।आब कतेक करी ।सब बातमे तँ अहाँकेँ हमरे गलती देखाइत अछि ।कोनो बात कहब नै कि मुँह लटका लेब ।लोक जाहि सुख लेल वियाह करैत अछि से तँ कहियो देलौं नै, खाली झगड़ैत रहै छी ।जखन अहाँकेँ हम पसीन नै छलौं तँ हमरासँ वियाह किए केलौं ?
राधा- वियाह कोनो हम अपन मरजीसँ केलौं ।जँ हमर वश चलितय तँ अहाँकेँ वेदीयेपर सँ बैलगा दितौं ।हम तँ तखनो मजबूर छलौं आ एखनो मजबूर छी ।
मुरली- मजबूर, झुठौंका मजबूरी अछि ।एखन तँ अहाँक वश चलिते अछि ।एखन कोनो हमरा अपन लऽगमे रखने छी, एखनो तँ हम अहाँसँ दूरे छी ।दूर रहै छी ।दूर सुतै छी ।दूरे हँसै छी ।अहाँसँ हमरा कोन सुख भेटल जे हम अहाँकेँ सुख देब ।
राधा- नै ने दिअ ।अहाँसँ सुखक भीख माँगिते के अछि ? अहाँ किछु नै दिअ बस हमरा छुआछन दऽ दिअ । हमरा तलाक दऽ दिअ ।
मुरली- (नरम होइत) हे जे भेल से भेल, आब एहन बात फेर नै बाजब ।वियाह मने छुट्टमछुट्टा नै होइ छै ।वियाह मने तलाक नै होइ छै ।वियाह मने प्रेम होइ छै ।प्रार्थना करैत छी अहाँसँ, एहन बात नै बाजल करू ।
राधा- तखन हमर दिमाग नै खाउ ।झुट्ठेकेँ केँ-केँ केँ-केँ करैत रहै छी ।चुप रहू ।
(मुरली चुप भऽ जाइत अछि ।राधा एकटा पत्रिका लऽ पढ़ऽ लागैत अछि ।राजाक प्रवेश होइत अछि ।)
राजा- (दुनू हाथ जोड़ैत ।) प्राणाम भौजी...की हाल-समाचार अछि ? नीके ने?
राधा- हँ हँ, नीक अछि ।
राजा- घर-दुआरिमे कने कम जोरसँ बाजल करू ।बाहर धरि ओनाहिते अवाज जाइ छलय ।लोक-वेद सुनतै तँ की सोचतै ?
मुरली- की सोचतै आ किए सोचतै ? आजुक जमानामे पति-पत्नीकेँ प्रेमो करैक लेल घरक कोनटामे सन्हियाए पड़तै की ?
राजा- (व्यंग करैत) नै नै, सन्हियाए किए पड़तै ? आजुक जमानमे छतपर चढ़ि कऽ चिचिया-चिचिया कऽ प्रेम करऽ पड़तै ।(जोरसँ बाजैत) यौ गौआँ-घरुआ, सुनै जाउ, हम प्रेम करैत छी ।हम कनियाँकेँ बाँहिमे पकड़ैत छी ।हम चुम्मा लैत छी... ।हूँह, बड एलखिन प्रेम करै बला ।हमहूँ वियाहल छी मीता ।प्रेम कोना होइत छै से हमरो बुझल अछि ।मुदा एखुनका अवाजमे तँ प्रेम जकाँ किछु नै बुझाइत छलौ ।
मुरली- निकालि ले सबटा जलन एतै ।तूँ अपन करिझुमरी कनियाँ संगे कोना प्रेम करैत छहीं से कोनो हमरा नै बुझल छै ।हम तँ सत्यानाश जानैत छीयै ।तोहर प्रेम तँ लाइत-मुक्का आ बेलनेसँ शुरू होइत छौ ।
राजा- जेना कि हिनका घरमे ई सब नै होइत छन्हि ।पहिने अपन कमजोरी देख, बादमे हमरा कहिहें ।
क्रमश:
पट परिवर्तन (दोसर पट)
( मुरलीक घरक दृश्य ।राधा घेंट झुकौने, माँथपर हाथ देने चिन्ताग्रस्त मुद्रामे बैसल अछि ।लऽगमे मुरली पत्रिका पढ़ैत अछि ।)
मुरली- (पत्रिकासँ धियान हटा राधा दिस ताकैत ।) की भेल अहाँकेँ ? किए मुँह लटकेने छी ?जहियासँ सासुर एलौं हेँ अहाँक मुँह लटकले रहैत अछि ।एतेक सुन्दर रूप-रंग देने छथि दैवा, एकरा व्यर्थ किए कऽ रहल छी ?दैवोकेँ तामस चढ़ैत हेतनि ।कखनो काल मुस्कियाएलो करियौ ।
राधा- की करबै ? जिनगियेक नाम उदासी छैक ।जखन करेजक गहराइमे बड़का टा घाव भेल छै जकर टीससँ रहि-रहि कऽ देहक अंग-अंग कानैत रहैत अछि तखन कृत्रिम मुस्कुराहटसँ कोन फायदा ?
मुरली- अहाँक टीस कोनो अहींकेँ तँ नै कनबैत अछि, हमरो कनबैत अछि ।अहाँसँ बेसी दर्द हमरा होइत अछि ।अहाँ हमर अर्द्धांगनी छी ।आधा अंग छी ।देहक आधा भाग दर्दसँ कुहरैत रहतै आ आधा भाग हँसैत रहतै, ई कतौ सम्भव छै ? नै ने ।तखन लोककेँ अपना सक भरि हँसी-खुशीसँ रहबाक चाही ।
राधा- जँ अहाँकेँ हमर एतेक चिन्ता होइत तँ हमर दर्दक दवाइ किए ने आनैत छी ?
मुरली- एकर कारण तँ अहूँकेँ नीक जकाँ बूझल अछि ।ई बात सत्य अछि जे अहाँक नैहर बला सुख-सुविधा एतऽ सम्भव नै अछि, मुदा हम तँ प्रयास कैये रहल छी ?गाममे बिजली नै छै तेँ अहाँकेँ एसी, फ्रीज आ टी॰भी॰ बला सुविधा कोना देब ।हमर आमदनी एतेक बेसी नै अछि जे अहाँकेँ लेल शहरी वेवस्था कऽ देब ।
राधा- हँ...हँ...बुझलौं...बुझलौं ।अहाँ तँ अपन बचाब करबे करबै ने ! एँ यौ दुनियाँमे लोक जँ ठानि लै छै तँ कीसँ की कऽ दै छै आ अहाँकेँ सुनिते चोन्ह लागैत अछि ।हमर उदासी नै हरि सकै छी तँ कमसँ कम बाजैयोसँ परहेज करू ।
मुरली- (तमसाइत) परहेज, परहेज तँ केनाहिते छी ।आब कतेक करी ।सब बातमे तँ अहाँकेँ हमरे गलती देखाइत अछि ।कोनो बात कहब नै कि मुँह लटका लेब ।लोक जाहि सुख लेल वियाह करैत अछि से तँ कहियो देलौं नै, खाली झगड़ैत रहै छी ।जखन अहाँकेँ हम पसीन नै छलौं तँ हमरासँ वियाह किए केलौं ?
राधा- वियाह कोनो हम अपन मरजीसँ केलौं ।जँ हमर वश चलितय तँ अहाँकेँ वेदीयेपर सँ बैलगा दितौं ।हम तँ तखनो मजबूर छलौं आ एखनो मजबूर छी ।
मुरली- मजबूर, झुठौंका मजबूरी अछि ।एखन तँ अहाँक वश चलिते अछि ।एखन कोनो हमरा अपन लऽगमे रखने छी, एखनो तँ हम अहाँसँ दूरे छी ।दूर रहै छी ।दूर सुतै छी ।दूरे हँसै छी ।अहाँसँ हमरा कोन सुख भेटल जे हम अहाँकेँ सुख देब ।
राधा- नै ने दिअ ।अहाँसँ सुखक भीख माँगिते के अछि ? अहाँ किछु नै दिअ बस हमरा छुआछन दऽ दिअ । हमरा तलाक दऽ दिअ ।
मुरली- (नरम होइत) हे जे भेल से भेल, आब एहन बात फेर नै बाजब ।वियाह मने छुट्टमछुट्टा नै होइ छै ।वियाह मने तलाक नै होइ छै ।वियाह मने प्रेम होइ छै ।प्रार्थना करैत छी अहाँसँ, एहन बात नै बाजल करू ।
राधा- तखन हमर दिमाग नै खाउ ।झुट्ठेकेँ केँ-केँ केँ-केँ करैत रहै छी ।चुप रहू ।
(मुरली चुप भऽ जाइत अछि ।राधा एकटा पत्रिका लऽ पढ़ऽ लागैत अछि ।राजाक प्रवेश होइत अछि ।)
राजा- (दुनू हाथ जोड़ैत ।) प्राणाम भौजी...की हाल-समाचार अछि ? नीके ने?
राधा- हँ हँ, नीक अछि ।
राजा- घर-दुआरिमे कने कम जोरसँ बाजल करू ।बाहर धरि ओनाहिते अवाज जाइ छलय ।लोक-वेद सुनतै तँ की सोचतै ?
मुरली- की सोचतै आ किए सोचतै ? आजुक जमानामे पति-पत्नीकेँ प्रेमो करैक लेल घरक कोनटामे सन्हियाए पड़तै की ?
राजा- (व्यंग करैत) नै नै, सन्हियाए किए पड़तै ? आजुक जमानमे छतपर चढ़ि कऽ चिचिया-चिचिया कऽ प्रेम करऽ पड़तै ।(जोरसँ बाजैत) यौ गौआँ-घरुआ, सुनै जाउ, हम प्रेम करैत छी ।हम कनियाँकेँ बाँहिमे पकड़ैत छी ।हम चुम्मा लैत छी... ।हूँह, बड एलखिन प्रेम करै बला ।हमहूँ वियाहल छी मीता ।प्रेम कोना होइत छै से हमरो बुझल अछि ।मुदा एखुनका अवाजमे तँ प्रेम जकाँ किछु नै बुझाइत छलौ ।
मुरली- निकालि ले सबटा जलन एतै ।तूँ अपन करिझुमरी कनियाँ संगे कोना प्रेम करैत छहीं से कोनो हमरा नै बुझल छै ।हम तँ सत्यानाश जानैत छीयै ।तोहर प्रेम तँ लाइत-मुक्का आ बेलनेसँ शुरू होइत छौ ।
राजा- जेना कि हिनका घरमे ई सब नै होइत छन्हि ।पहिने अपन कमजोरी देख, बादमे हमरा कहिहें ।
क्रमश:
शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-6)
सेनूर छै अनमोल (भाग-6)
श्याम- (आश्चर्यचकित होइत) ककरो दोसर संग वियाह...मने की अछि अहाँक ?
राधा- मने...मने हमर वियाह ठीक भऽ गेल अछि ।किछुए दिनमे हमर वियाह भऽ जाएत ।
श्याम- सचमे ई तँ बड पैघ टेंशन अछि ।किछु तँ करैये पड़तै ।
राधा- श्याम, हम अहाँ बिना नै रहि सकै छी ।हमर वियाह कमजोर घरमे ठीक भेल अछि ।दूर देहातमे रहऽ पड़त ।गोइठा पाथऽ पड़त...नै...नै...हमरासँ ई सब नै हएत ।हम आधुनिक सुख-सुविधाक तियाग नै कऽ सकब ।किछु करू श्याम, किछु करू ।
श्याम- (बेचैन होइत हाथपर मुक्का मारैत अछि ।)आह...की करी...किछु नै फुराइत अछि ।भैयासँ पहिने हमर वियाह, नै नै ई असम्भव अछि ।बाबू किन्नहुँ नै मानथिन ।
राधा- किछु होइ, हम अहाँकेँ छोड़ि ककरो आनकेँ वरण नै कऽ सकब ।हम मरि जाएब मुदा बजार छोड़ि भुच्चर देहातमे नै जाएब ।अहाँकेँ किछु सोचैये पड़त ।जेना होइ तेना एहि संकटसँ उबाड़ैये पड़त अहाँकेँ ।युग-युगसँ घटि आएल ई घटना आब नै भऽ सकत ।आब राधाकेँ छोड़ि कऽ श्याम नै जा सकैत अछि ।आब इतिहास नै दोहरा सकैत अछि ।किछु करू श्याम, किछु करू ।
श्याम- भावनामे नै उधियाउ राधा...भावनामे नै उधियाउ ।कने दिमागसँ सोचियौ ।आब एक्कै टा उपाय अछि ।अहाँकेँ ओकरासँ वियाह करऽ पड़त ।
राधा- (आश्चर्यचकित होइत) वियाह कऽ लियै...एना कोना वियाह कऽ लियै !अहाँकेँ कोना छोड़ि दियै ! अहाँकेँ ई बात बाजैत केहनो नै लागल !
श्याम- देखू राधा, हमरा संग मजबूरी अछि ।बात बुझैक प्रयास करियौ ।अहाँ एखन हुनकासँ वियाह कऽ लिअ ।बादमे जखन हमर भैयाक वियाह भऽ जेतै तखन अहाँसँ हम वियाह कऽ लेब ।
राधा- से कोना सम्भव छै ? की वियाहक बाद अहाँ हमरा स्वीकार कऽ लेब ?
श्याम- किए नै...किए नै स्वीकार करब, मुदा...
राधा- मुदा...मुदा की ?
श्याम- मुदा एक टा शर्त अछि ।
राधा- शर्त...केहन शर्त अछि ।
श्याम- जँ एहि अन्तरालमे अहाँ अपन सतीत्वक रक्षा केने रहबै तँ हम अहाँसँ सहर्ष वियाह कऽ लेब ।
राधा- ठीक छै ।अपन सुख-सुविधा लेल, अहाँ संग रहैक लेल, आधुनिकताक संग जीबैक लेल हमरा ई शर्त स्वीकार अछि ।वियाह कऽ लेब मुदा मोनसँ अहींक रहब ।ओकरा अपनासँ सटैयो नै देबै ।अपनाकेँ कुमाइये बुझब ।झुठउँका सेनूर लगाएब ।ओनाहितो सेनूरक मोले की छै, पाँच-दस टाका ।जखन मोने नै मिलतै तखन सेनूर लगेलासँ की हेतै ?
श्याम- वाह...अहाँ तँ अपने बुझनुक छी, सब गप बूझि गेलौं ।चलू बड भारी टेंशन खतम भेल ।आब तँ हँसि दिअ ।(राधा मुस्कियाइत अछि ।) ई भेलै ने बात ।चलू आब साँझ पड़ि गेलै...ओनाहितो आब वियाहक तैयारी करबाक अछि ।
राधा- (लजाइत) दूर जाउ...अहूँ बड मजाख करै छी ।ई वियाह कोनो वियाह छियै ।
श्याम- से तँ छैहे ।खैर चिन्ता नै ने करू ।जखन हमरासँ वियाह हएत तखन सबटा सऽख-मनोरथ पूरि जाएत ।हँ हनीमून बला बात इयाद राखब ...हा...हा...हा ।
(दुनू हँसऽ लागैत अछि ।नहूँ-नहूँ पर्दा खसैत अछि ।)
क्रमश:
श्याम- (आश्चर्यचकित होइत) ककरो दोसर संग वियाह...मने की अछि अहाँक ?
राधा- मने...मने हमर वियाह ठीक भऽ गेल अछि ।किछुए दिनमे हमर वियाह भऽ जाएत ।
श्याम- सचमे ई तँ बड पैघ टेंशन अछि ।किछु तँ करैये पड़तै ।
राधा- श्याम, हम अहाँ बिना नै रहि सकै छी ।हमर वियाह कमजोर घरमे ठीक भेल अछि ।दूर देहातमे रहऽ पड़त ।गोइठा पाथऽ पड़त...नै...नै...हमरासँ ई सब नै हएत ।हम आधुनिक सुख-सुविधाक तियाग नै कऽ सकब ।किछु करू श्याम, किछु करू ।
श्याम- (बेचैन होइत हाथपर मुक्का मारैत अछि ।)आह...की करी...किछु नै फुराइत अछि ।भैयासँ पहिने हमर वियाह, नै नै ई असम्भव अछि ।बाबू किन्नहुँ नै मानथिन ।
राधा- किछु होइ, हम अहाँकेँ छोड़ि ककरो आनकेँ वरण नै कऽ सकब ।हम मरि जाएब मुदा बजार छोड़ि भुच्चर देहातमे नै जाएब ।अहाँकेँ किछु सोचैये पड़त ।जेना होइ तेना एहि संकटसँ उबाड़ैये पड़त अहाँकेँ ।युग-युगसँ घटि आएल ई घटना आब नै भऽ सकत ।आब राधाकेँ छोड़ि कऽ श्याम नै जा सकैत अछि ।आब इतिहास नै दोहरा सकैत अछि ।किछु करू श्याम, किछु करू ।
श्याम- भावनामे नै उधियाउ राधा...भावनामे नै उधियाउ ।कने दिमागसँ सोचियौ ।आब एक्कै टा उपाय अछि ।अहाँकेँ ओकरासँ वियाह करऽ पड़त ।
राधा- (आश्चर्यचकित होइत) वियाह कऽ लियै...एना कोना वियाह कऽ लियै !अहाँकेँ कोना छोड़ि दियै ! अहाँकेँ ई बात बाजैत केहनो नै लागल !
श्याम- देखू राधा, हमरा संग मजबूरी अछि ।बात बुझैक प्रयास करियौ ।अहाँ एखन हुनकासँ वियाह कऽ लिअ ।बादमे जखन हमर भैयाक वियाह भऽ जेतै तखन अहाँसँ हम वियाह कऽ लेब ।
राधा- से कोना सम्भव छै ? की वियाहक बाद अहाँ हमरा स्वीकार कऽ लेब ?
श्याम- किए नै...किए नै स्वीकार करब, मुदा...
राधा- मुदा...मुदा की ?
श्याम- मुदा एक टा शर्त अछि ।
राधा- शर्त...केहन शर्त अछि ।
श्याम- जँ एहि अन्तरालमे अहाँ अपन सतीत्वक रक्षा केने रहबै तँ हम अहाँसँ सहर्ष वियाह कऽ लेब ।
राधा- ठीक छै ।अपन सुख-सुविधा लेल, अहाँ संग रहैक लेल, आधुनिकताक संग जीबैक लेल हमरा ई शर्त स्वीकार अछि ।वियाह कऽ लेब मुदा मोनसँ अहींक रहब ।ओकरा अपनासँ सटैयो नै देबै ।अपनाकेँ कुमाइये बुझब ।झुठउँका सेनूर लगाएब ।ओनाहितो सेनूरक मोले की छै, पाँच-दस टाका ।जखन मोने नै मिलतै तखन सेनूर लगेलासँ की हेतै ?
श्याम- वाह...अहाँ तँ अपने बुझनुक छी, सब गप बूझि गेलौं ।चलू बड भारी टेंशन खतम भेल ।आब तँ हँसि दिअ ।(राधा मुस्कियाइत अछि ।) ई भेलै ने बात ।चलू आब साँझ पड़ि गेलै...ओनाहितो आब वियाहक तैयारी करबाक अछि ।
राधा- (लजाइत) दूर जाउ...अहूँ बड मजाख करै छी ।ई वियाह कोनो वियाह छियै ।
श्याम- से तँ छैहे ।खैर चिन्ता नै ने करू ।जखन हमरासँ वियाह हएत तखन सबटा सऽख-मनोरथ पूरि जाएत ।हँ हनीमून बला बात इयाद राखब ...हा...हा...हा ।
(दुनू हँसऽ लागैत अछि ।नहूँ-नहूँ पर्दा खसैत अछि ।)
क्रमश:
मंगलवार, 17 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-5)
सेनूर छै अनमोल (भाग-5)
राधा- छोरू हमरा (कछमछाइत हाथ छोड़ेबाक प्रयास करैत अछि ।) एक बेर कहलौं ने... सुनाइ नै दैत अछि...छोरू हमरा ।
श्याम- एते जल्दी कोना छोड़ि देब ।बुझल नै अछि अहाँकेँ !फेविकालसँ बेसी जोरगर होइ छै प्रेमक लस्सा ।एक बेर सटलाक बाद छुटि नै सकै छै ।
राधा- (तमसाइत ) अहाँ नै छोड़बै हाथ ।
श्याम- (नैमे मूड़ी डोलबैत) नै, किन्नहुँ नै ।
राधा- (जोरसँ हाथकेँ झटका दैत अछि ।श्यामक पकड़सँ हाथ छुटि जाइ छै ।राधा अलग भऽ जाइत अछि ।राधा दहिना हाथक मुट्ठी बंद कऽ औंठा ठाढ़ करैत अछि आ फेर औंठाकेँ नीचा कऽ मुँह दुसैत श्यामकेँ खिसियाबैत अछि ।) अहाँसँ कट्टी...कट्टी...कट्टी ।एक दुपहरियासँ अहाँक बाट जोहि रहल छी आ अहाँ एखन एलौं हेँ ।
श्याम- अच्छे...तँ ई बातक गोस्सा छै राधा रानीकेँ ।(कने रूकि कऽ) देखियौ...हमहूँ केहन पागल छियै...मेने बात बिसरि गेलियै ।(हाथ बला पैकेट राधा दिस बढ़बैत अछि ।राधा दोसर दिस मुँह घुमा लैत अछि ।) देखियौ एते रास बात भऽ गेलै आ वेलेन्टाइन गिफ्ट देनाइ बिसरि गेलियै...लिअ...लिअ ने ।(राधा नै लैत अछि ।राधाक एकटा हाथ पकड़ि पैकट ओकर हाथमे दऽ दैत अछि ।) हे एना नखरा जुनि देखाउ ।हमरा लेट करबैमे अहींक कसूर अछि ।
राधा- हँ हँ हमर कसूर किए ने रहतै !भरि दिन हमरा सता कऽ देरसँ ई एलखिन आ गलती ठहरलै हमर...वाह रे वाह...उनटे चोर कोतवालकेँ डाँटय ।
श्याम- अहाँक गलती नै तँ की हमर गलती छै ।अहाँक एतेक सुन्दर होइ लेल के कहने छलय ?एहन सुन्दर नारी लेल तँ गिफ्टो सुन्दरे चाही ने ? आब अहाँ जोकर गिफ्ट एते असानीसँ भेटै बला छैहे नै ।सगरो बजारक चक्कर लगाबऽ पड़लै तखन जा कऽ पसिनक गिफ्ट भेटल ।एहि दौड़-बरहामे देरी भऽ गेलै तँ हमर कोन गलती ?कने प्रेमक बात करत से नै, खाली रुसनाइये तँ जानै छी हमरे अहाँ ।हमरे पोसल बिलाई आ हमरेसँ म्याउँ ।
राधा- के कहने छलय गिफ्ट आनै लेल ?एतऽ टेंशनसँ मगजक नस टुकड़ी-टुकड़ी भेल जा रहल छै आ अहाँकेँ गिफ्ट सुझैए ।
श्याम- (हड़बड़ाइत) टेंशन...केहन टेंशन भऽ गेलै हमर राधा प्यारीकेँ...के दऽ देलकै टेंशन...नाम तँ बताउ...सारकेँ एतै प्राण हरि लेबै ।
राधा- वियाह...वियाह चलते टेंशन बनल अछि ।
श्याम- (उत्साहित होइत) वियाह...अरे वाह...वियाहक नाम सुनिते लोकक टेंशन निपत्ता भऽ जाइ छै आ अहाँकेँ टेंशन बनि गेल अछि ।एहन उलटबासी किए ?
राधा- बात तँ सत्ते कहलौं आहाँ ।वियाहक नाम सुनिते उत्तेजित भेनाइ स्वभाविक अछि, मुदा ई वियाह तँ बड पैघ टेंशन दै बला अछि ।
श्याम- हमरा संग वियाह करबामे कोनो टेंशनक बात नै अछि ।रानी बना कऽ राखब अहाँकेँ ।भारीसँ भारी टेंशनकेँ प्रेमक एक्कै टा फूँकमे दूर उड़ा देब ।हँ, कनेक टा टेंशन अछि ।अपना दुनू गोटाक वियाह लेल किछु दिन बाट जोहऽ पड़त ।ओना तँ हम तैयार छी, मुदा बड़का भैयाकेँ कुमार रहैत... नै नै भैयाक वियाह हुअऽ दियौ तकर बात हमर नम्बर आबि जेतै ।फेर धूम धामसँ दुनू गोटाक वियाह हेतै ।एकटा बात और वियाहक बाद शिमलाक पाँच सितारा होटलमे चलब हनीमून मनबैक लेल ।
राधा- श्याम, ई मजाख करबाक समय नै छै ।(कम जोरसँ) हमर ई वियाह अहाँ संग नै अछि, ककरो दोसर संग अछि ।
क्रमश:
राधा- छोरू हमरा (कछमछाइत हाथ छोड़ेबाक प्रयास करैत अछि ।) एक बेर कहलौं ने... सुनाइ नै दैत अछि...छोरू हमरा ।
श्याम- एते जल्दी कोना छोड़ि देब ।बुझल नै अछि अहाँकेँ !फेविकालसँ बेसी जोरगर होइ छै प्रेमक लस्सा ।एक बेर सटलाक बाद छुटि नै सकै छै ।
राधा- (तमसाइत ) अहाँ नै छोड़बै हाथ ।
श्याम- (नैमे मूड़ी डोलबैत) नै, किन्नहुँ नै ।
राधा- (जोरसँ हाथकेँ झटका दैत अछि ।श्यामक पकड़सँ हाथ छुटि जाइ छै ।राधा अलग भऽ जाइत अछि ।राधा दहिना हाथक मुट्ठी बंद कऽ औंठा ठाढ़ करैत अछि आ फेर औंठाकेँ नीचा कऽ मुँह दुसैत श्यामकेँ खिसियाबैत अछि ।) अहाँसँ कट्टी...कट्टी...कट्टी ।एक दुपहरियासँ अहाँक बाट जोहि रहल छी आ अहाँ एखन एलौं हेँ ।
श्याम- अच्छे...तँ ई बातक गोस्सा छै राधा रानीकेँ ।(कने रूकि कऽ) देखियौ...हमहूँ केहन पागल छियै...मेने बात बिसरि गेलियै ।(हाथ बला पैकेट राधा दिस बढ़बैत अछि ।राधा दोसर दिस मुँह घुमा लैत अछि ।) देखियौ एते रास बात भऽ गेलै आ वेलेन्टाइन गिफ्ट देनाइ बिसरि गेलियै...लिअ...लिअ ने ।(राधा नै लैत अछि ।राधाक एकटा हाथ पकड़ि पैकट ओकर हाथमे दऽ दैत अछि ।) हे एना नखरा जुनि देखाउ ।हमरा लेट करबैमे अहींक कसूर अछि ।
राधा- हँ हँ हमर कसूर किए ने रहतै !भरि दिन हमरा सता कऽ देरसँ ई एलखिन आ गलती ठहरलै हमर...वाह रे वाह...उनटे चोर कोतवालकेँ डाँटय ।
श्याम- अहाँक गलती नै तँ की हमर गलती छै ।अहाँक एतेक सुन्दर होइ लेल के कहने छलय ?एहन सुन्दर नारी लेल तँ गिफ्टो सुन्दरे चाही ने ? आब अहाँ जोकर गिफ्ट एते असानीसँ भेटै बला छैहे नै ।सगरो बजारक चक्कर लगाबऽ पड़लै तखन जा कऽ पसिनक गिफ्ट भेटल ।एहि दौड़-बरहामे देरी भऽ गेलै तँ हमर कोन गलती ?कने प्रेमक बात करत से नै, खाली रुसनाइये तँ जानै छी हमरे अहाँ ।हमरे पोसल बिलाई आ हमरेसँ म्याउँ ।
राधा- के कहने छलय गिफ्ट आनै लेल ?एतऽ टेंशनसँ मगजक नस टुकड़ी-टुकड़ी भेल जा रहल छै आ अहाँकेँ गिफ्ट सुझैए ।
श्याम- (हड़बड़ाइत) टेंशन...केहन टेंशन भऽ गेलै हमर राधा प्यारीकेँ...के दऽ देलकै टेंशन...नाम तँ बताउ...सारकेँ एतै प्राण हरि लेबै ।
राधा- वियाह...वियाह चलते टेंशन बनल अछि ।
श्याम- (उत्साहित होइत) वियाह...अरे वाह...वियाहक नाम सुनिते लोकक टेंशन निपत्ता भऽ जाइ छै आ अहाँकेँ टेंशन बनि गेल अछि ।एहन उलटबासी किए ?
राधा- बात तँ सत्ते कहलौं आहाँ ।वियाहक नाम सुनिते उत्तेजित भेनाइ स्वभाविक अछि, मुदा ई वियाह तँ बड पैघ टेंशन दै बला अछि ।
श्याम- हमरा संग वियाह करबामे कोनो टेंशनक बात नै अछि ।रानी बना कऽ राखब अहाँकेँ ।भारीसँ भारी टेंशनकेँ प्रेमक एक्कै टा फूँकमे दूर उड़ा देब ।हँ, कनेक टा टेंशन अछि ।अपना दुनू गोटाक वियाह लेल किछु दिन बाट जोहऽ पड़त ।ओना तँ हम तैयार छी, मुदा बड़का भैयाकेँ कुमार रहैत... नै नै भैयाक वियाह हुअऽ दियौ तकर बात हमर नम्बर आबि जेतै ।फेर धूम धामसँ दुनू गोटाक वियाह हेतै ।एकटा बात और वियाहक बाद शिमलाक पाँच सितारा होटलमे चलब हनीमून मनबैक लेल ।
राधा- श्याम, ई मजाख करबाक समय नै छै ।(कम जोरसँ) हमर ई वियाह अहाँ संग नै अछि, ककरो दोसर संग अछि ।
क्रमश:
शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-4)
सेनूर छै अनमोल(भाग-4)
भिखमंगा- बिना प्रेक्टिकल केने कोनो थ्योरी नै लिखाइ छै दाइ ।जँ प्रेम नै रहितै तँ आइ अहाँ हाथमे गुलाब लेने अपन प्रेमीक प्रतीक्षामे एतऽ ठाढ़ नै रहितियै ।
राधा- अहाँक कहब ठीक अछि, मुदा अहाँ एहन प्रेम तँ हमरा नै अछि ।हमर प्रेममे अहाँ सन तियाग नै छै ।हम दुनू तँ मात्र अपन स्वार्थक लेल प्रेम कऽ रहल छी ।श्याम पाइ बला अछि, हष्ट-पुष्ट तन्दुरुस्त अछि तेँ हम प्रेम कऽ रहल छी आ हम सुन्दर छी तेँ श्याम प्रेम कऽ रहल अछि ।दुनू दिससँ स्वार्थ, स्वार्थ, स्वार्थ केवल स्वार्थ अछि ।दूर-दूर धरि तियागक कोनो चेन्ह नै देखाइत अछि ।
भिखमंगा- मने जँ अहाँक प्रेमी निर्धन रहितय तँ अहाँ प्रेम नै करितियै ?
राधा- बिल्कुल नै करितियै ।
भिखमंगा- भगवान नै करय काल्हि दिन अहाँक प्रेमी गरीब वा बिमारियाह बनि जेताह तखन अहाँ हुनका छोड़ि देबै ? कोनो अमीर आ शारीरिक बलगर पुरुखसँ वियाह कऽ लेबै ?
राधा- जरूर कऽ लेबै ।हमरा मोनमे ओकरा लेल कनिको टीस नै उठतै ।हम तँ पहिनहिये कहलौं, ई कलयुग नै, टाका युग छै ।सब किछु टाका छै । टाका छै तँ प्रेम छै ।टाका छै तँ संगी छै ।टाका छै तँ जिनगी सुन्नर बगैचा सन छै, नै तँ गेनहाइत खण्डहर, मरूथल सन बनि जाइ छै जीवन ।
भिखमंगा- ई सब बात मात्र कहबाक लेल छै दाइ ।एक चुटकी सेनूरक मोल अहाँ नै जानैत छी तेँ एहन बात बाजै छी ।
राधा- (हँसैत) हा...हा...हा हमरा किए नै बुझल रहतै एक चुटकी सेनूरक मोल !पाँच-दस टाकामे एक डिब्बा भेंट जाइ छै । अहाँकेँ एक्कै चुटकी अनमोल लगैत अछि...हा...हा...हा...
भिखमंगा- ई कोनो चुटकुला नै अछि जे अहाँ हँसि देलियै ।दू टा आत्माक बीच पूलक काज करै छै एक चुटकी सेनूर ।दू टा मोनक विश्वास छियै एक चुटकी सेनूर ।अहाँ की बुझबै एकर मोल !हाय रे हाय, एते घटीया सोच भरल अछि अहाँक दिमागमे !आश्चर्य घोर आश्चर्य भऽ रहल अछि हमरा ।आब तँ अहाँसँ बात करब बेकार लागैत अछि, मुदा एते जरूर कहब, ओ दिन दूर नै जखन अहाँकेँ एक चुटकी सेनूरक मोल बुझाएत ।
( फैशनेबुल कपड़ा पहिरने, हाथमे उपहारक पैकेट लेने श्यामक प्रवेश होइत अछि ।श्यामकेँ देख राधा श्याम लऽग चलि जाइत अछि ।)
राधा- हमर बात नीक नै लगैत अछि तँ रुकल किए छी ! जाउ...जाउ... रोकने के अछि अहाँकेँ ।आब अहाँ संग समय व्यर्थ करबाक जरूरति नै अछि ।एते देर बतियेलौं ताहि लेल धन्यवाद । (श्याम दिस घुरैत ) श्याम, भिखमंगाकेँ किछु टाका दऽ दियौ । बड देरसँ दिमाग खेलक अछि, जल्दीसँ किछु टाका दऽ कऽ भगाउ एकरा ।
(श्याम पर्शसँ एक टा नमरी निकालि कऽ दैत अछि ।भिखमंगा पाइ लऽ लैत अछि ।)
भिखमंगा- जुग, जुग जीबू ।भगवान भरल-पुरल राखथि, नीक बुधि दैथ ।(गाबैत जाए लागैत अछि )
कोनो डागडरक सुइया ने काज करय
लागै जँ एहन बोखार यौ मीता
भऽ जाइ छै जकरा प्यार यौ मीता
भऽ जाइ छै जकरा प्यार. . . . . . . . . .
(राधा आ श्याम एक दोसरसँ गला मिलैत अछि ।)
राधा- हैप्पी वेलेन्टाइन डे, डियर ।(अपन जुट्टीसँ गुलाब नीकालैत अछि आ श्यामकेँ दैत अछि ।श्याम फेरसँ राधाक जुट्टीमे खोंसि दैत अछि ।)
श्याम- अहूँकेँ (धीरे धीरे दुनू हाथ फैलाबैत) एते...एते...एते... बडका टा हैप्पी वेलेन्टाइन डे ।
राधा- चलू अहाँक नम्हर टा मुबारकवाद स्वीकार कएलहुँ ।(रूसैत) अहाँ बड निर्दयी छी ।अहाँसँ हम कट्टी करैत छी ।आब अहाँसँ बात नै करब ।
श्याम -बात नै करब !हमरासँ कोन गलती भेलै जे अहाँ बात नै करब ।
राधा- गलती... गलती तँ बड बड पैघ भेल अछि अहाँसँ ।
श्याम- कने हमहूँ तँ बुझियै जे हमरासँ केहन गलती भेलै जे हमर प्राण हमरासँ रूसि गेल छै ।(राधाक हाथ पकड़ि लैत अछि ।)
क्रमश:
भिखमंगा- बिना प्रेक्टिकल केने कोनो थ्योरी नै लिखाइ छै दाइ ।जँ प्रेम नै रहितै तँ आइ अहाँ हाथमे गुलाब लेने अपन प्रेमीक प्रतीक्षामे एतऽ ठाढ़ नै रहितियै ।
राधा- अहाँक कहब ठीक अछि, मुदा अहाँ एहन प्रेम तँ हमरा नै अछि ।हमर प्रेममे अहाँ सन तियाग नै छै ।हम दुनू तँ मात्र अपन स्वार्थक लेल प्रेम कऽ रहल छी ।श्याम पाइ बला अछि, हष्ट-पुष्ट तन्दुरुस्त अछि तेँ हम प्रेम कऽ रहल छी आ हम सुन्दर छी तेँ श्याम प्रेम कऽ रहल अछि ।दुनू दिससँ स्वार्थ, स्वार्थ, स्वार्थ केवल स्वार्थ अछि ।दूर-दूर धरि तियागक कोनो चेन्ह नै देखाइत अछि ।
भिखमंगा- मने जँ अहाँक प्रेमी निर्धन रहितय तँ अहाँ प्रेम नै करितियै ?
राधा- बिल्कुल नै करितियै ।
भिखमंगा- भगवान नै करय काल्हि दिन अहाँक प्रेमी गरीब वा बिमारियाह बनि जेताह तखन अहाँ हुनका छोड़ि देबै ? कोनो अमीर आ शारीरिक बलगर पुरुखसँ वियाह कऽ लेबै ?
राधा- जरूर कऽ लेबै ।हमरा मोनमे ओकरा लेल कनिको टीस नै उठतै ।हम तँ पहिनहिये कहलौं, ई कलयुग नै, टाका युग छै ।सब किछु टाका छै । टाका छै तँ प्रेम छै ।टाका छै तँ संगी छै ।टाका छै तँ जिनगी सुन्नर बगैचा सन छै, नै तँ गेनहाइत खण्डहर, मरूथल सन बनि जाइ छै जीवन ।
भिखमंगा- ई सब बात मात्र कहबाक लेल छै दाइ ।एक चुटकी सेनूरक मोल अहाँ नै जानैत छी तेँ एहन बात बाजै छी ।
राधा- (हँसैत) हा...हा...हा हमरा किए नै बुझल रहतै एक चुटकी सेनूरक मोल !पाँच-दस टाकामे एक डिब्बा भेंट जाइ छै । अहाँकेँ एक्कै चुटकी अनमोल लगैत अछि...हा...हा...हा...
भिखमंगा- ई कोनो चुटकुला नै अछि जे अहाँ हँसि देलियै ।दू टा आत्माक बीच पूलक काज करै छै एक चुटकी सेनूर ।दू टा मोनक विश्वास छियै एक चुटकी सेनूर ।अहाँ की बुझबै एकर मोल !हाय रे हाय, एते घटीया सोच भरल अछि अहाँक दिमागमे !आश्चर्य घोर आश्चर्य भऽ रहल अछि हमरा ।आब तँ अहाँसँ बात करब बेकार लागैत अछि, मुदा एते जरूर कहब, ओ दिन दूर नै जखन अहाँकेँ एक चुटकी सेनूरक मोल बुझाएत ।
( फैशनेबुल कपड़ा पहिरने, हाथमे उपहारक पैकेट लेने श्यामक प्रवेश होइत अछि ।श्यामकेँ देख राधा श्याम लऽग चलि जाइत अछि ।)
राधा- हमर बात नीक नै लगैत अछि तँ रुकल किए छी ! जाउ...जाउ... रोकने के अछि अहाँकेँ ।आब अहाँ संग समय व्यर्थ करबाक जरूरति नै अछि ।एते देर बतियेलौं ताहि लेल धन्यवाद । (श्याम दिस घुरैत ) श्याम, भिखमंगाकेँ किछु टाका दऽ दियौ । बड देरसँ दिमाग खेलक अछि, जल्दीसँ किछु टाका दऽ कऽ भगाउ एकरा ।
(श्याम पर्शसँ एक टा नमरी निकालि कऽ दैत अछि ।भिखमंगा पाइ लऽ लैत अछि ।)
भिखमंगा- जुग, जुग जीबू ।भगवान भरल-पुरल राखथि, नीक बुधि दैथ ।(गाबैत जाए लागैत अछि )
कोनो डागडरक सुइया ने काज करय
लागै जँ एहन बोखार यौ मीता
भऽ जाइ छै जकरा प्यार यौ मीता
भऽ जाइ छै जकरा प्यार. . . . . . . . . .
(राधा आ श्याम एक दोसरसँ गला मिलैत अछि ।)
राधा- हैप्पी वेलेन्टाइन डे, डियर ।(अपन जुट्टीसँ गुलाब नीकालैत अछि आ श्यामकेँ दैत अछि ।श्याम फेरसँ राधाक जुट्टीमे खोंसि दैत अछि ।)
श्याम- अहूँकेँ (धीरे धीरे दुनू हाथ फैलाबैत) एते...एते...एते... बडका टा हैप्पी वेलेन्टाइन डे ।
राधा- चलू अहाँक नम्हर टा मुबारकवाद स्वीकार कएलहुँ ।(रूसैत) अहाँ बड निर्दयी छी ।अहाँसँ हम कट्टी करैत छी ।आब अहाँसँ बात नै करब ।
श्याम -बात नै करब !हमरासँ कोन गलती भेलै जे अहाँ बात नै करब ।
राधा- गलती... गलती तँ बड बड पैघ भेल अछि अहाँसँ ।
श्याम- कने हमहूँ तँ बुझियै जे हमरासँ केहन गलती भेलै जे हमर प्राण हमरासँ रूसि गेल छै ।(राधाक हाथ पकड़ि लैत अछि ।)
क्रमश:
बुधवार, 11 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-3)
सेनूर छै अनमोल (भाग-3)
भिखमंगा- अच्छे...अच्छे ठीक छै ।हम सब टा कथा कहैत छी ।चलू पहिने कतौ बैसै छी ।(दुनू गोटे घासपर बैस रहै छथि )असलमे हम कमाइ-खटाइ बला आदमी रही ।एकटा कम्पनीक गेटकीपर रही ।छअ हजार दरमाहा छल, मुदा जँ बाजी सुतरि जाइ तँ दसो-बारह हजार धरि कमा लैत रही ।बड नीक जकाँ धूम-धाम नीक घरमे वियाह भेल छल ।जकरा सेनुरा कऽ आनलियै सेहो बड मान आदर करैत छल ।हमहूँ ओकरासँ बड प्रेम करैत छी ।बड नीक जकाँ हँसी-खुशीसँ जिनगीक गाड़ी चलैत छल, मुदा...(चुप भऽ जाइत अछि ।)
राधा- मुदा की ?चुप किए भऽ गेलौं ?मुदा की भेल से तँ कहू ।
भिखमंगा- कहैत छलौं ने दाइ, भगवान बड पैघ दुश्मन होइत छथि ।ककरो तरक्कीसँ हुनका तीव्र जलन होइत छन्हि ।ककरो हँसी हुनका नै नीक लगैत छन्हि ।सदिखन कनबैक फिराकमे रहैत छथि ।दाइ, हमर हँसैत परिवार क्षण भरिमे विलापक सागरमे डूबि गेल ।(करुण होइत ।)हमर प्राणसँ बेसी प्रियगर कनियाँकेँ ब्रेन ट्युमर आ केंसर दुनू एक्कै संग भऽ गेलै ।बिना कोनो चेनावनी देने हमरापर हिमालय पहाड़ खसि पड़लै दाइ ।अस्पतालक चक्कर काटैत-काटैत पएरक चप्पल घसि गेल...नोकरी छूटि गेल...जमा कएल पाइ-कौड़ी खतम भऽ गेल, मुदा ओकरा ठीक नै होइक छलै, नहिये भेलै ।डाक्टर साफ मना कऽ देलकै ।उहो भगवानेक गोहारि करैक लेल कहलकै ।अहीं कहू दाइ, भगवान हमर अरजी सूनि हमरापर दया किए करथिन ।जँ भगवानकेँ दया करैयेक छलै तँ एहन संकट देबे किए केलखिन ।
राधा- सतमे बड पैघ विपति खसल अहाँपर ।धीरज राखू ।सब ठीक भऽ जेतै ।दिन बदलैत बेसी देर नै लागैत छै ।नीक दिन एबै करतै ।एकटा बात बताउ, अहाँक कनियाँ मरि गेली वा जीबिते छथि ?
भिखमंगा- जँ ओ मरि जैतै तँ कि हम जीबैत रहितियै !ओकरे संग हमहूँ मरि गेल रहितियै ।प्राण बिना देह कोना ठाढ़ रहि सकैत अछि !
राधा- मने ओ एखन धरि जीबिते छथि ।तखन ओ कतऽ छथि एखन ?
भिखमंगा- एखन सरकारी अस्पतालमे भर्ती भेल छै ।ओकरे इलाज लेल हम भरि-भरि दिन भीख माँगैत छी ।अपने भूखल रहि ओकर दवाइक जोगार करैत छी ।ओना ओ मना करैत छथि ।हमरा भीख माँगैत देख कऽ ओ जहर माँगै छथि ।कहैत छथि हमरा मरऽ दिअ... अहाँ दोसर वियाह कऽ लिअ ।(कानऽ लागैत अछि ।)अहीं कहू दाइ एहन कतौ भेलैए...लक्ष्मीये नै रहती तँ नारायण रहि कऽ की झालि बजेथिन ।आत्मा बिना शरीर महत्वे की रहतै ?
राधा- चुप भऽ जाउ, चुप भऽ जाउ ।जुनि कानू ।(नम्हर साँस छोड़ैत ।)ओना एकरा दोसर एंगलसँ सोचबै तँ हुनको कथन कोनो गलत नै छै (कने रूकि कऽ)आब हुनक आश छोड़ि दोसर वियाह केनाइये अहाँक हितमे अछि ।(समझाबैत) ओनाहितो आब हुनकासँ कोनो तरहक सुख भेटै बला अछि नै ।आब जते दिन ओ जीबित रहिथिन तते दिन सरकार भोजन देबे करतेन ।सरकारी अस्पतालमे छथि तेँ थोड़-बहुत दवाइ-दारू भेटिये जेतनि ।हुनका लेल बेकारे भीख माँगने फिरैत छी ।कमाउ-खटाउ, दोसर वियाह करू आ नव कनियाँ संग ऐस-मौजसँ जीवन बिताउ ।एहन तँ सब दिनसँ भऽ एलैए ।सब दिनसँ पुरान घर खसै छै आ नव घर उठै छै ।
भिखमंगा- एहन अनर्थ तँ हम सपनोमे नै सोचि सकैत छी ।ओ हमर कनियाँ छथि...हमर प्रिया छथि...हमर अर्द्धांगनी छथि...आधा अंगक तियाग कऽ कहू तँ के जीब सकैए ।प्राण छोड़ि कऽ ककरो जिनगी कोना कटि सकैए ?
राधा- ई सब मात्र खिस्सा-कहानी, फिल्ममे होइ छै ।आजुक जमानामे इमोशनक कोनो जगह नै छै ।लोक अपन स्वार्थ ताकै छै ।लोक आब अपना लेल जीबै छै ।एहन प्रेम मात्र थ्योरी छै जकर प्रैक्टिकल सम्भव नै छै ।
क्रमश:
भिखमंगा- अच्छे...अच्छे ठीक छै ।हम सब टा कथा कहैत छी ।चलू पहिने कतौ बैसै छी ।(दुनू गोटे घासपर बैस रहै छथि )असलमे हम कमाइ-खटाइ बला आदमी रही ।एकटा कम्पनीक गेटकीपर रही ।छअ हजार दरमाहा छल, मुदा जँ बाजी सुतरि जाइ तँ दसो-बारह हजार धरि कमा लैत रही ।बड नीक जकाँ धूम-धाम नीक घरमे वियाह भेल छल ।जकरा सेनुरा कऽ आनलियै सेहो बड मान आदर करैत छल ।हमहूँ ओकरासँ बड प्रेम करैत छी ।बड नीक जकाँ हँसी-खुशीसँ जिनगीक गाड़ी चलैत छल, मुदा...(चुप भऽ जाइत अछि ।)
राधा- मुदा की ?चुप किए भऽ गेलौं ?मुदा की भेल से तँ कहू ।
भिखमंगा- कहैत छलौं ने दाइ, भगवान बड पैघ दुश्मन होइत छथि ।ककरो तरक्कीसँ हुनका तीव्र जलन होइत छन्हि ।ककरो हँसी हुनका नै नीक लगैत छन्हि ।सदिखन कनबैक फिराकमे रहैत छथि ।दाइ, हमर हँसैत परिवार क्षण भरिमे विलापक सागरमे डूबि गेल ।(करुण होइत ।)हमर प्राणसँ बेसी प्रियगर कनियाँकेँ ब्रेन ट्युमर आ केंसर दुनू एक्कै संग भऽ गेलै ।बिना कोनो चेनावनी देने हमरापर हिमालय पहाड़ खसि पड़लै दाइ ।अस्पतालक चक्कर काटैत-काटैत पएरक चप्पल घसि गेल...नोकरी छूटि गेल...जमा कएल पाइ-कौड़ी खतम भऽ गेल, मुदा ओकरा ठीक नै होइक छलै, नहिये भेलै ।डाक्टर साफ मना कऽ देलकै ।उहो भगवानेक गोहारि करैक लेल कहलकै ।अहीं कहू दाइ, भगवान हमर अरजी सूनि हमरापर दया किए करथिन ।जँ भगवानकेँ दया करैयेक छलै तँ एहन संकट देबे किए केलखिन ।
राधा- सतमे बड पैघ विपति खसल अहाँपर ।धीरज राखू ।सब ठीक भऽ जेतै ।दिन बदलैत बेसी देर नै लागैत छै ।नीक दिन एबै करतै ।एकटा बात बताउ, अहाँक कनियाँ मरि गेली वा जीबिते छथि ?
भिखमंगा- जँ ओ मरि जैतै तँ कि हम जीबैत रहितियै !ओकरे संग हमहूँ मरि गेल रहितियै ।प्राण बिना देह कोना ठाढ़ रहि सकैत अछि !
राधा- मने ओ एखन धरि जीबिते छथि ।तखन ओ कतऽ छथि एखन ?
भिखमंगा- एखन सरकारी अस्पतालमे भर्ती भेल छै ।ओकरे इलाज लेल हम भरि-भरि दिन भीख माँगैत छी ।अपने भूखल रहि ओकर दवाइक जोगार करैत छी ।ओना ओ मना करैत छथि ।हमरा भीख माँगैत देख कऽ ओ जहर माँगै छथि ।कहैत छथि हमरा मरऽ दिअ... अहाँ दोसर वियाह कऽ लिअ ।(कानऽ लागैत अछि ।)अहीं कहू दाइ एहन कतौ भेलैए...लक्ष्मीये नै रहती तँ नारायण रहि कऽ की झालि बजेथिन ।आत्मा बिना शरीर महत्वे की रहतै ?
राधा- चुप भऽ जाउ, चुप भऽ जाउ ।जुनि कानू ।(नम्हर साँस छोड़ैत ।)ओना एकरा दोसर एंगलसँ सोचबै तँ हुनको कथन कोनो गलत नै छै (कने रूकि कऽ)आब हुनक आश छोड़ि दोसर वियाह केनाइये अहाँक हितमे अछि ।(समझाबैत) ओनाहितो आब हुनकासँ कोनो तरहक सुख भेटै बला अछि नै ।आब जते दिन ओ जीबित रहिथिन तते दिन सरकार भोजन देबे करतेन ।सरकारी अस्पतालमे छथि तेँ थोड़-बहुत दवाइ-दारू भेटिये जेतनि ।हुनका लेल बेकारे भीख माँगने फिरैत छी ।कमाउ-खटाउ, दोसर वियाह करू आ नव कनियाँ संग ऐस-मौजसँ जीवन बिताउ ।एहन तँ सब दिनसँ भऽ एलैए ।सब दिनसँ पुरान घर खसै छै आ नव घर उठै छै ।
भिखमंगा- एहन अनर्थ तँ हम सपनोमे नै सोचि सकैत छी ।ओ हमर कनियाँ छथि...हमर प्रिया छथि...हमर अर्द्धांगनी छथि...आधा अंगक तियाग कऽ कहू तँ के जीब सकैए ।प्राण छोड़ि कऽ ककरो जिनगी कोना कटि सकैए ?
राधा- ई सब मात्र खिस्सा-कहानी, फिल्ममे होइ छै ।आजुक जमानामे इमोशनक कोनो जगह नै छै ।लोक अपन स्वार्थ ताकै छै ।लोक आब अपना लेल जीबै छै ।एहन प्रेम मात्र थ्योरी छै जकर प्रैक्टिकल सम्भव नै छै ।
क्रमश:
मंगलवार, 10 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-2)
सेनूर छै अनमोल (भाग-2)
राधा- जुनि कानू ।चुप भऽ जाउ ।हमहूँ विपतिक मारल छी तेँ अन्ट-सन्ट बजा गेल (कने रूकि कऽ) अहाँक कहब अछि जे अहाँ भीख दै छलियै, तखन अहाँ भिखमंगा कोना बनि गेलियै ?
भिखमंगा- (नोर पोछैत) की कहब...बइमनमा दैवासँ ककरो हँसी देखल नै जाइ छै दाइ ।छोरू ई सब ।हमर व्यथा सूनि अहूँ उदास भऽ जाएब ।
राधा - एना कोना छोड़ि देब ! अहाँक कथन हमर मोनकेँ अशान्त कऽ देलक अछि ।एकरा शान्त केने बिना अहाँकेँ कोना छोड़ि देब !
भिखमंगा - दाइ, हमर बातपर एते धियान जुनि दिअ ।ऐसँ कोनो फायदा होइ बला नै अछि अहाँकेँ ।गरीबक हिस्सामे अनेरुआ काँट-कुश आबिते रहैत छै ।कते सुन्नर फूल अछि अहाँक हाथमे (राधा अपन हाथक फूल देखैत छथि ) एहि फूलमे हमर हिस्साक काँट जुनि गूथू ।
राधा- एहन कोनो बात नै छै ।हम काँट आ फूलक अदला-बदली तँ नै कऽ रहल छी ।हम तँ मात्र देखय चाहैत छी जे अहाँक करेजमे केहन काँट गड़ल अछि ।ओनाहितो कहल गेल छै जे दुख बँटलासँ घटै छै ।पहाड़ सन भरियाएल दुख ककरो कहि देलासँ मोन तूर सन हल्लुक भऽ जाइ छै ।असलमे अहाँक गप बड रोचक अछि तेँ हम सुनऽ चाहैत छी ।
भिखमंगा - दाइ, अहाँक कहब सोलहो आना सच अछि, मुदा रहीम जी कहि गेलखिन हेँ, ई दोहा तँ सुनने हेबै (कने चुप होइत)
"रहिमन निज मन की व्यथा मन हीं राखों गोय
सुनि अठिलैहें लोग सब बाँटि न लैहें कोय "
दाइ, एकर मतलब तँ अहाँकेँ बुझले हएत ?अहाँ तँ पहिनहिये हमरा भीख दैसँ नठि गेल छी ।अहाँसँ हमर दुख मेटाइ बला अछिए नै...हँ...अहाँ हमर मजाख जरूर उड़ाएब ।ओनाहितो अहाँकेँ हमर दुखड़ामे रोचकता देखाइत अछि ।एँ यै, ऐसँ पैघ मजाख और की भऽ सकै छै !हम भूखल अहाँसँ भीख देबाक गोहारि कऽ रहल छी आ अहाँकेँ हमर दायनिय स्थितिमे रोचकताक दर्शन भऽ रहल अछि ।
राधा - हमर मतलब ई नै छल ।हम तँ अहाँक दुख अपना संग शेयर करऽ चाहैत छी ।विज्ञानक छात्रा छी ने तेँ उत्तर जानबाक जिज्ञासा बढ़ि गेल अछि ।आखिर एकटा भीख दै बला आदमी भिखमंगा कोना भऽ सकैत अछि ?ओनाहितो हम एतऽ बैसल-बैसल बोर भऽ रहल छी ।अहाँक संग बतियाइत किछु समयो कटि जाएत ।रहल बात भीख दैसँ नठैक तँ हम तखन परेशान छलौं तेँ कटु बात बजा गेल ।अहाँ निश्चिन्त रहू ।अहाँकेँ हम टाका जरूर देब ।
भिखमंगा - से तँ बुझलौं, मुदा अहाँक चाल-ढालसँ लगैत अछि जे अहाँ ककरो प्रतिक्षा कऽ रहल छी...शाइत कोनो प्रिय मित्रक...अहाँक हाथक फूलो शाइत ओकरे लेल अछि तेँ हमरा दोसर दुआरि जाए दिअ ।हमर भिखमंगा बनबाक खिस्सा सूनि जँ अहाँक मोनक फूल मौला जाएत तँ प्रिय मित्रकेँ की देबै ?
राधा- सतमे अहाँक नजरि पारखी अछि ।अहाँ गपकेँ बड नीक जकाँ पकड़ैत छी ।अहाँक अनुमान शत प्रतिशत सत्य अछि ।(लजाइत) हम अपन ब्यायफ्रेंडक बाट जोहि रहल छी...मुदा अहाँक बातसँ हमर मोन बेचैन भऽ गेल अछि ।एहन अवस्थामे हम श्याम संग सहज नै भऽ सकब... तेँ अपन बात कहि हमर मोनकेँ शान्त कऽ दिअ ।
क्रमश:
राधा- जुनि कानू ।चुप भऽ जाउ ।हमहूँ विपतिक मारल छी तेँ अन्ट-सन्ट बजा गेल (कने रूकि कऽ) अहाँक कहब अछि जे अहाँ भीख दै छलियै, तखन अहाँ भिखमंगा कोना बनि गेलियै ?
भिखमंगा- (नोर पोछैत) की कहब...बइमनमा दैवासँ ककरो हँसी देखल नै जाइ छै दाइ ।छोरू ई सब ।हमर व्यथा सूनि अहूँ उदास भऽ जाएब ।
राधा - एना कोना छोड़ि देब ! अहाँक कथन हमर मोनकेँ अशान्त कऽ देलक अछि ।एकरा शान्त केने बिना अहाँकेँ कोना छोड़ि देब !
भिखमंगा - दाइ, हमर बातपर एते धियान जुनि दिअ ।ऐसँ कोनो फायदा होइ बला नै अछि अहाँकेँ ।गरीबक हिस्सामे अनेरुआ काँट-कुश आबिते रहैत छै ।कते सुन्नर फूल अछि अहाँक हाथमे (राधा अपन हाथक फूल देखैत छथि ) एहि फूलमे हमर हिस्साक काँट जुनि गूथू ।
राधा- एहन कोनो बात नै छै ।हम काँट आ फूलक अदला-बदली तँ नै कऽ रहल छी ।हम तँ मात्र देखय चाहैत छी जे अहाँक करेजमे केहन काँट गड़ल अछि ।ओनाहितो कहल गेल छै जे दुख बँटलासँ घटै छै ।पहाड़ सन भरियाएल दुख ककरो कहि देलासँ मोन तूर सन हल्लुक भऽ जाइ छै ।असलमे अहाँक गप बड रोचक अछि तेँ हम सुनऽ चाहैत छी ।
भिखमंगा - दाइ, अहाँक कहब सोलहो आना सच अछि, मुदा रहीम जी कहि गेलखिन हेँ, ई दोहा तँ सुनने हेबै (कने चुप होइत)
"रहिमन निज मन की व्यथा मन हीं राखों गोय
सुनि अठिलैहें लोग सब बाँटि न लैहें कोय "
दाइ, एकर मतलब तँ अहाँकेँ बुझले हएत ?अहाँ तँ पहिनहिये हमरा भीख दैसँ नठि गेल छी ।अहाँसँ हमर दुख मेटाइ बला अछिए नै...हँ...अहाँ हमर मजाख जरूर उड़ाएब ।ओनाहितो अहाँकेँ हमर दुखड़ामे रोचकता देखाइत अछि ।एँ यै, ऐसँ पैघ मजाख और की भऽ सकै छै !हम भूखल अहाँसँ भीख देबाक गोहारि कऽ रहल छी आ अहाँकेँ हमर दायनिय स्थितिमे रोचकताक दर्शन भऽ रहल अछि ।
राधा - हमर मतलब ई नै छल ।हम तँ अहाँक दुख अपना संग शेयर करऽ चाहैत छी ।विज्ञानक छात्रा छी ने तेँ उत्तर जानबाक जिज्ञासा बढ़ि गेल अछि ।आखिर एकटा भीख दै बला आदमी भिखमंगा कोना भऽ सकैत अछि ?ओनाहितो हम एतऽ बैसल-बैसल बोर भऽ रहल छी ।अहाँक संग बतियाइत किछु समयो कटि जाएत ।रहल बात भीख दैसँ नठैक तँ हम तखन परेशान छलौं तेँ कटु बात बजा गेल ।अहाँ निश्चिन्त रहू ।अहाँकेँ हम टाका जरूर देब ।
भिखमंगा - से तँ बुझलौं, मुदा अहाँक चाल-ढालसँ लगैत अछि जे अहाँ ककरो प्रतिक्षा कऽ रहल छी...शाइत कोनो प्रिय मित्रक...अहाँक हाथक फूलो शाइत ओकरे लेल अछि तेँ हमरा दोसर दुआरि जाए दिअ ।हमर भिखमंगा बनबाक खिस्सा सूनि जँ अहाँक मोनक फूल मौला जाएत तँ प्रिय मित्रकेँ की देबै ?
राधा- सतमे अहाँक नजरि पारखी अछि ।अहाँ गपकेँ बड नीक जकाँ पकड़ैत छी ।अहाँक अनुमान शत प्रतिशत सत्य अछि ।(लजाइत) हम अपन ब्यायफ्रेंडक बाट जोहि रहल छी...मुदा अहाँक बातसँ हमर मोन बेचैन भऽ गेल अछि ।एहन अवस्थामे हम श्याम संग सहज नै भऽ सकब... तेँ अपन बात कहि हमर मोनकेँ शान्त कऽ दिअ ।
क्रमश:
सोमवार, 9 दिसंबर 2013
सेनूर छै अनमोल (भाग-1)
एकांकी- सेनूर छै अनमोल
पात्र आ उम्र
1. राधा- 20 वर्ष
2. श्याम- 22 वर्ष- राधाक दोस्त
3. मुरली- 24 वर्ष- राधाक पति
4. भिखमंगा- 35 वर्ष
5. राजा- 24 वर्ष- मुरलीक दोस्त
प्रथम पट
( बगैचाक दृश्य ।एकटा गाछक तऽर राधा बैसल अछि ।केशक दू टा जुट्टीमे सँ एकटा आगूमे लटकल अछि ।राधाक हाथमे एकटा गुलाबक फूल अछि जकरा आगू लटकल जुट्टीमे बेर-बेर खोंसैत आ निकालै छथि ।मुँहपर तनावक भाव स्पष्ट देखाइत अछि ।)
राधा- (बैसले बैसल उपर ताकैत )हे दाता दिनानाथ, सब कुशले रखिहऽ (दहिना हाथकेँ पहिने माँथ आ फेर छातीसँ सटबैत ) गोर लागै छियऽ तोरा ।मोन आशंकित भऽ रहल अछि ।जानि नै की भेलैए ?एक दुपहरियासँ एतऽ बैसल झाम गुरैत छी । (ठाढ़ होइत) आह...देखू तँ अंग-अंग अकरि गेल अछि (डाँरसँ उपरका भागकेँ एक बेर दायाँ दोसर बेर वायाँ घुमबैत, ऊँच साँस छोड़ैत) ओह...जानि नै और कते काल बैसऽ पड़तै !बुझू तँ बात कते मीठ-मीठ बजैए ।बाजैत लाजो नै होइ छै छौड़ाकेँ ।कहैए हम समयसँ काज करैत छी ।हमरा संगमे सदिखन घड़ी रहैत अछि ।वाह रे वाह...घड़ी रहैत छन्हि ।आइ की भऽ गेलनि घड़ीकेँ ।किओ चोरा लेलकनि वा भारतक रेल जकाँ धीरे-धीरे चलऽ लागलनि ।एतऽ टेंशनक चलते हमर बी॰पी॰, सुगर सब बढ़ि गेल अछि ।लगैत अछि जे आब प्राण छूटि जाएत आ हुनला लेल धैन सन ।ओतेक बुझा कऽ कहलियनि मुदा बुझै बला होइ तखन ने !रातिये फोनपर कहलियनि जे जरूरी छै भोरे भेंट करू, मुदा...मुदा ओ किए भेंट करताह ।हुनका कोन बेगरता छै !ई सब तँ हमर काज छै ने !
(गीत गाबैत भिखमंगाक प्रवेश )
यौ बाबू भैया यौ काकी काका
हम दस दिनसँ भूखल छी
दऽ दिअ हमरा किछु टाका
यौ काका दऽ दिअ किछु टाका...
(गीत गाबिते राधा लऽग पहुँचैत अछि ।ओकरा देख राधा दोसर दिश घुमि जाइत अछि ।)
भिखमंगा- यै बहिन दाइ...यै...यै अहींकेँ कहैत छी ।
राधा- की...की बात छै ?
भिखमंगा - बात...बात की रहतै !कोनो बेसी भारी नै...(विनती करैत) कने मदद चाही अहाँसँ और कोन बात रहतै ।(पेट दिस इशारा करैत )कने एकर जोगार कऽ दितियै बस एतबे अहाँसँ चाही ।
राधा - जो जो...ककरो दोसर लऽग जो ।हम खूबै-पिबै बाली नै छियौ ।जानि नै कतऽ कतऽसँ आबि जाइ छै वनमनुष सब ।
भिखमंगा- एना किए बाजै छी दाइ ?हम तँ पहिनेसँ विपतिक मारल छी ।एना जुनि दुरदुराउ हमरा।(गाबऽ लागैत अछि ) सब दिन होत न एक समाना . . .
राधा- एँ... ई की गाबैत छें (तमसाएल स्वरमे) तोरा कहैत मने की छौ ?
भिखमंगा- (सकपकाइत) हम कहाँ किछु कहलौं दाइ ! हम तँ निर्गुण गाबैत छलौं ।
राधा- (तामससँ व्यंग्य करैत) हँ...हँ...बड़का एला निर्गुण गाबै बला...सब दिन होत न एक समाना ।जेना की हम नै बुझलियै एकर मतलब ।तोरा मने जँ आइ तोरा बिनु भीख देने एतऽसँ भगा देबौ तँ कहियो हमरो भीख माँगऽ पड़तै ।(अपन कपड़ा देखबैत) आइ हमर देहपर जे सुन्नर कपड़ा छै से काल्हि नै रहतै ।तोरा मने हम तोरे जकाँ सड़क छाप भिखमंगा बनि जेबै ।तोरे जकाँ जंगली बनि जेबै ।सएह ने बाजलें तूँ ?
भिखमंगा- राम...राम...राम एहन बात सोचल कोना गेल अहाँकेँ ।हम तँ अपन हाल बतबै छलौं ।कहियो हमहूँ दोसरकेँ भीख दै छलियै, मुदा ...मुदा आइ हमरा किओ नै दै छै ।( कानैत ) सचमे गरीबक लेल कोनो देवता-पितर नै होइ छै ।लोक कहै छै जे भगवान जकर मुँह चिड़ै छथिन तकरा भोजन जरूर दै छथिन मुदा . . .मुदा हमरा बेर की भेलै ।लागै छै बइमनमा भगवान बिसरि गेलै जे हमरो मुँह चिड़ने छथिन ।
(राधाक तमसाएल मुँह शान्त होइत अछि ।ओ भिखमंगाकेँ चुप करबै छथि ।)
क्रमश:
पात्र आ उम्र
1. राधा- 20 वर्ष
2. श्याम- 22 वर्ष- राधाक दोस्त
3. मुरली- 24 वर्ष- राधाक पति
4. भिखमंगा- 35 वर्ष
5. राजा- 24 वर्ष- मुरलीक दोस्त
प्रथम पट
( बगैचाक दृश्य ।एकटा गाछक तऽर राधा बैसल अछि ।केशक दू टा जुट्टीमे सँ एकटा आगूमे लटकल अछि ।राधाक हाथमे एकटा गुलाबक फूल अछि जकरा आगू लटकल जुट्टीमे बेर-बेर खोंसैत आ निकालै छथि ।मुँहपर तनावक भाव स्पष्ट देखाइत अछि ।)
राधा- (बैसले बैसल उपर ताकैत )हे दाता दिनानाथ, सब कुशले रखिहऽ (दहिना हाथकेँ पहिने माँथ आ फेर छातीसँ सटबैत ) गोर लागै छियऽ तोरा ।मोन आशंकित भऽ रहल अछि ।जानि नै की भेलैए ?एक दुपहरियासँ एतऽ बैसल झाम गुरैत छी । (ठाढ़ होइत) आह...देखू तँ अंग-अंग अकरि गेल अछि (डाँरसँ उपरका भागकेँ एक बेर दायाँ दोसर बेर वायाँ घुमबैत, ऊँच साँस छोड़ैत) ओह...जानि नै और कते काल बैसऽ पड़तै !बुझू तँ बात कते मीठ-मीठ बजैए ।बाजैत लाजो नै होइ छै छौड़ाकेँ ।कहैए हम समयसँ काज करैत छी ।हमरा संगमे सदिखन घड़ी रहैत अछि ।वाह रे वाह...घड़ी रहैत छन्हि ।आइ की भऽ गेलनि घड़ीकेँ ।किओ चोरा लेलकनि वा भारतक रेल जकाँ धीरे-धीरे चलऽ लागलनि ।एतऽ टेंशनक चलते हमर बी॰पी॰, सुगर सब बढ़ि गेल अछि ।लगैत अछि जे आब प्राण छूटि जाएत आ हुनला लेल धैन सन ।ओतेक बुझा कऽ कहलियनि मुदा बुझै बला होइ तखन ने !रातिये फोनपर कहलियनि जे जरूरी छै भोरे भेंट करू, मुदा...मुदा ओ किए भेंट करताह ।हुनका कोन बेगरता छै !ई सब तँ हमर काज छै ने !
(गीत गाबैत भिखमंगाक प्रवेश )
यौ बाबू भैया यौ काकी काका
हम दस दिनसँ भूखल छी
दऽ दिअ हमरा किछु टाका
यौ काका दऽ दिअ किछु टाका...
(गीत गाबिते राधा लऽग पहुँचैत अछि ।ओकरा देख राधा दोसर दिश घुमि जाइत अछि ।)
भिखमंगा- यै बहिन दाइ...यै...यै अहींकेँ कहैत छी ।
राधा- की...की बात छै ?
भिखमंगा - बात...बात की रहतै !कोनो बेसी भारी नै...(विनती करैत) कने मदद चाही अहाँसँ और कोन बात रहतै ।(पेट दिस इशारा करैत )कने एकर जोगार कऽ दितियै बस एतबे अहाँसँ चाही ।
राधा - जो जो...ककरो दोसर लऽग जो ।हम खूबै-पिबै बाली नै छियौ ।जानि नै कतऽ कतऽसँ आबि जाइ छै वनमनुष सब ।
भिखमंगा- एना किए बाजै छी दाइ ?हम तँ पहिनेसँ विपतिक मारल छी ।एना जुनि दुरदुराउ हमरा।(गाबऽ लागैत अछि ) सब दिन होत न एक समाना . . .
राधा- एँ... ई की गाबैत छें (तमसाएल स्वरमे) तोरा कहैत मने की छौ ?
भिखमंगा- (सकपकाइत) हम कहाँ किछु कहलौं दाइ ! हम तँ निर्गुण गाबैत छलौं ।
राधा- (तामससँ व्यंग्य करैत) हँ...हँ...बड़का एला निर्गुण गाबै बला...सब दिन होत न एक समाना ।जेना की हम नै बुझलियै एकर मतलब ।तोरा मने जँ आइ तोरा बिनु भीख देने एतऽसँ भगा देबौ तँ कहियो हमरो भीख माँगऽ पड़तै ।(अपन कपड़ा देखबैत) आइ हमर देहपर जे सुन्नर कपड़ा छै से काल्हि नै रहतै ।तोरा मने हम तोरे जकाँ सड़क छाप भिखमंगा बनि जेबै ।तोरे जकाँ जंगली बनि जेबै ।सएह ने बाजलें तूँ ?
भिखमंगा- राम...राम...राम एहन बात सोचल कोना गेल अहाँकेँ ।हम तँ अपन हाल बतबै छलौं ।कहियो हमहूँ दोसरकेँ भीख दै छलियै, मुदा ...मुदा आइ हमरा किओ नै दै छै ।( कानैत ) सचमे गरीबक लेल कोनो देवता-पितर नै होइ छै ।लोक कहै छै जे भगवान जकर मुँह चिड़ै छथिन तकरा भोजन जरूर दै छथिन मुदा . . .मुदा हमरा बेर की भेलै ।लागै छै बइमनमा भगवान बिसरि गेलै जे हमरो मुँह चिड़ने छथिन ।
(राधाक तमसाएल मुँह शान्त होइत अछि ।ओ भिखमंगाकेँ चुप करबै छथि ।)
क्रमश:
सोमवार, 4 फ़रवरी 2013
हारल विजेता
हारल विजेता
पात्र
1 . रोहित- 20 साल
2.मानू- 20 साल- रोहितक दोस्त
3.चिट्ठी चाचा- 45 साल- डाकिया
4.डाँक्टर बाबू -35 साल- डाक्टर
( रोहितक दलान परक दृश्य एक कोणमे मौसमी फसलक किछु बोझ राखल अछि ।माँझमे टाटक घरपर हरियर तिलकोरक लत्ती लतरल अछि ।एकटा पुरान साइकिल टाटसँ सटा कऽ राखल अछि ।भऽ सकैए तँ एकटा नादि आ खुट्टा देल जा सकैछ ।रोहित साधारण कपड़ामे घरक आगू ,सोचैक मुद्रामे एक कातसँ दोसर कात टहलि रहल अछि ।रोहितसँ नीक परिधानमे मोनू पर्दाक पाछूसँ "रोहित-रोहित" चिकरैत मंचपर आबैत अछि ।आवाज सूनि रोहितक धियान टूटैत अछि आ फेर दुनू गला मिलैत अछि ।)
रोहित- मोनू ,ई क्रिचदार कपड़ा पहिर दुपहरियामे कतऽ जा रहल छें ।की कोनो खास गप छै की?
मोनू- खास गप की रहतै ।मोन भऽ गेलै ,पहिर लेलौं।ओना रहित ,आगूक की प्लान छौ?
रोहित- (आश्चर्यसँ)प्लान।तोहर गप नै बुझलियौ ,कने फरिछा कऽ कह ।
मोनू- अरे मूर्ख करियरकेँ प्लान ।
रोहित- अच्छे-अच्छे बूझि गेलियै ।
मोनू- इएह तँ तोहर प्रोबलेम छौ ,तूँ बुझिते बड देरसँ छेँ ।कने सोच ,इन्टर केला दू वर्ष भऽ गेलै आ एखन धरि बेरोजगारे बैसल छी ।कोना पार हेतै जीवनक डगरिया रे भेया ।
रोहित- ठीके कहलें तूँ ।पिछला एक घण्टासँ हमहूँ इएह सोचै छलौं ।तोरा तँ बाबुओ जीक सहारा छौ मुदा हमर के? एकटा बूढ़ माए जे खाटो परसँ नै उठै छै ।कतौसँ एक्को टाकाक आमदनी नै छै हमरा ।बटैया करै छी ,दूध बेचै छी आ दवाइ-दारूक बाद जँ टाका बचै अछि तँ पोथी कीन पढ़ै छी ।तोरा की कहबौ ,हमर हालत तँ जानिते छें ।
मोनू- हँ हमरा बुझल अछि तेँ ने दुनू गोटाकेँ आब नोकरीक बारेमे सोचऽ पड़तै ।जँ नोकरी नै भेल तँ जीनाइ मोशकिल भऽ जेतै ।
रोहित- गप तँ सत्ते कहलें दोस ।दोस ,चरि चक्किया ए.सी बला गाड़ी देख मोन होइत अछि जे एक बेर हमहूँ चढ़ितौँ ।बजारक गप सूनि बजारेमे अपन छोट परिवार संग रहबाक मोन होइत अछि ।मुखिया जीक हाथमे मोबाइल देख कोनो नेना जकाँ मोन कानि जाइत अछि ।मुदा ई सब एकटा मरनासन्न सपना जकाँ लागैत अछि ,दोस ।भागमे लिखल छै दिल्ली-बम्बइमे बोरा उठेनाइ तँ चरिचक्किया कतऽसँ भेटत ।
मोनू- गलत बात ,बिल्कुल गलत बात ।मनुखकेँ एते उदास नै हेबाक चाही ,जँ जीलाकेँ तेसर टाँपर ,तोरा सन मनुख एते नकारात्मक सोच रखतै तँ बूझें प्रलय आबि गेलै ।
रोहित- सोच नकारात्मक नै छै भाइ ,मुदा हालत एहन नै छै जे सकारात्मक सोचब ।ई घोर मँहगाइक युगमे जीनगी जीबाक लेल टाका चाही आ टाकाक लेल बोरा उठबैये पड़तै ।
मोनू- फेर वएह बात ।अरे हम कहै छीयौ ,तोरा बोरा नै उठबऽ पड़तौ ,तोरा एहन गुणीकेँ तँ नोकरी डिबिया लऽ कऽ ताकै छै ।
रोहित- एहनो कतौ भेलै यै ।आइ-काल्हि सरकारी नोकरी तँ ईदक चाने बनल छै ।
मोनू- आ प्राइवेट ।
रोहित- ओकरो लेल पहुँच चाही ।
मोनू- ( कर जोड़ैत) चूप रहू महराज ,चूप रहू ।एते भाषण जुनि मारू ।नोकरी लेल फारम भरऽ पड़ै छै ,अहाँ कतौ भरलौँ की नै?
रोहित- हँ ,एकटा परीक्षा देने छी ।अपन एक सालक बचाओल टाकाक हवण कऽ कऽ ।
मोनू- तँ फिकिर कथी के ?प्रतिक्षा करू ।एहि हवणक कुण्डसँ अमृतक घैल जरूर बहरेतै ।हमरा विश्वास अछि अहाँ जरूर पास करब ।
रोहित- तोहर मुँहमे मिश्री ।(गम्भीर होइत)जँ अमृत नै बहरेलै तँ बूझ हमर जीवन बेकार भऽ जेतै ।
(मंचक पाछूसँ साइकिलक घण्टी धिरेसँ बजनाइ शुरू होइत अछि आ धिरे-धिरे ध्वनी तीव्र होइत अछि ।रोहित आ मोनू उम्हरे देखऽ लगैत अछि ।पोस्टमैनक ड्रेसमे ।एक हाथमे किछु चिट्ठी आ कन्हपर एकटा बैग ,दोसर हाथसँ साइकिलक हेण्डिल पकड़ने ,मंचक एक कोणसँ चिट्ठी चाचाक प्रवेश होइत अछि ।)
रोहित ,मोनू- (एक साथ ,एक स्वरमे) प्रणाम चिट्ठी चाचा ।
चिट्ठी चाचा - खुश रहऽ बौआ ।
मोनू- कक्का ,आइ हम एकटा बात जानिये कऽ रहब ।
चिट्ठी चाचा- हँ हँ ,किएक नै जानबऽ ,जानि लए ।कोन बात जानबाक छऽ ।
मोनू- रोहित अहाँकेँ चिट्ठी चाचा किए कहै यै?
चिट्ठी चाचा- बड पुरान गप छै ।(रोहित दिश इशारा करैत) ई तीन-चारि वर्षक हेतै ।हम सब दिन चिट्ठी बाँटैक लेल इएह बाटे जाइ छलियै आ एहिना जोरसँ घण्टी बजबैत छलियै ।हमर घण्टीक आबाज सूनि ई नाङटे गाँरि ,हँसैत -कूदैत सड़क धरि आबि जाइ ।
(रोहित लजा जाइत अछि)
मोनू- फेर की होइत छलै ।
चिट्ठी चाचा- पहिने ई सड़क कच्ची छलै ।पैघ-पैघ खाधि छलै सड़कपर ।साउन-भादो सौँसे सड़कपर थाल-कादोक शासन भऽ जाइ ।जखन ई कूदैत आबै तँ चुभ दऽ ओहि खाधिमे खसि पड़ै आ थाल-कादोमे सना कऽ भूत बनि जाइ छलै ।हा . .हा . .हा . . (सब हँसऽ लागैत अछि आ रोहित लाजे मूड़ि गोँति लैत अछि )
रोहित - छोरू ने चाचा ,अहूँ कोन गप उठा देलौँ ।
मोनू- नै नै ,हुअ दिऔ ।
चिट्ठी चाचा- तकरा बाद जखन कखनो इ कानै तँ एकर बाबी कहथिन जे चिट्ठी बाला चाचा आबै छथुन ।ई बात सुनिते ई हँसऽ लागै आ वएह दिनसँ हमर नाम चिट्ठी चाचा पड़ि गेलै ।की हौ रोहित ,इएह गप छै ने?
(रोहित स्वीकार करैत उपर-नीच्चा दू बेर मूड़ि डोलबैत अछि)
मोनू-चाचा ,तखन तँ अहाँक घण्टीमे बड पैघ जादू छै जे एकरा सनक उदास रहै बला मनुखकेँ हँसा दै छलै ।
चिट्ठी चाचा- (आश्चर्यसँ ) उदास ।उदास किए रहै छै ।
मोनू- इएह नोकरी चाकरीक चिन्तामे ।
चिट्ठी चाचा- ले बलैया ।हम तँ गपक चक्करमे ओरिजने गप बिसरि गेलौँ ।नोकरीसँ इयादि आएल ,तोरा दुनूक नामे चिट्ठी एलै यै ।(दू टा चिट्ठी निकालि ,रोहित दिश घूमि) ई तोहर (मोनूकेँ दैत) आ ई तोहर ।
(दुनू लिफाफा फाड़ि , चिट्ठी पढ़ऽ लागैत अछि ।धिरे-धिरे रोहितक मौलाइल मुँहपर हर्षक रेखा आबऽ लागै छै ।एहने सन मोनूक मुँहपर सेहो )
मोनू- (खुशीसँ चिकरैत) मीता ,हमरा नोकरि लागि गेल ।
रोहित- (खुशीसँ) मीता ,हमहूँ परीक्षा पास कऽ गेलौँ ।इन्टरभ्यू परसू अछि ।
चिट्ठी चाचा- भगवानक घर देर छै ,अन्हेर नै ।तोरा दुनूकेँ नोकरी लगाइये देलखुन मैया रानी ।
रोहित- चाचा ,एखन नोकरी नै लागल ।एकटा मौखिक परीक्षा एखनो बाँकिए अछि ।
चिट्ठी चाचा- अरे जखन लिखित निकलि गेलै तँ मौखिको निकलिए जेतै ।चिन्ता जुनि करऽ ।नीके नीके जा ,परीक्षा दऽ ,नोकरी लऽ कऽ आबऽ ।मैया रानी भला करथुन ।अच्छेए ,हमरा और चिट्ठी बँटबाक अछि हम जाइ छीअ ।
रोहित- ठीक छै चाचा ।
(घण्टी बजबैत चिट्ठी चाचा चलि जाइत छथि )
रोहित- मीता ,तोरा कतऽसँ चिट्ठी एलौ ,कोन ठाम ,कोन कम्पनीमे ,केहन नोकरी लागलौ?
मोनू- कने साँस लऽ कऽ बाज ।एना जँ एक्के बेर प्रश्नक बाढ़ि आनबें तखन तँ हम भसिआइये जाएब ।
रोहित- बुझलियै ,बुझलियै ।नै एक फेर ,बेरा-बेरी तँ उत्तर दे ।
मोनू- दिल्लीसँ चिट्ठी आएल छलै ।जाहि कम्पनीमे बाबू काज करै छथिन ,ओहि कम्पनीमे सुपरवाइजरकेँ जरूरति छलै ,वएह पोस्ट हमरा भेटल अछि ।
रोहित- मुदा कोना?
मोनू- ओकर ठिकेदार अपने इम्हरकेँ छलै ।बाबूजी ओकरा हमर पैरवी केलखिन तँ ओ तैयार भऽ गेलै ।बाबू जी दिल्ली एबाक लेल चिट्ठी भेजने छथिन ।
रोहित- मीता ,जखन एगो दोस्त कामयाब होइ छै तखन दोसर दोस्तक करेजक एक कोणमे खुशीक वर्षा होइ छै आ दोसर कोणमे दुखक ठनका खसै छै ।खैर ,तोहर कामयाबीसँ हम खुश छी ,बड खुश छी ।हमर कामयाबी तँ एखनो माँझ सागरमे हेल रहल छै ,जानि नै भेटतै कि नै भेटतै ।
मोनू- अपनेक बहुत-बहुत धन्यवाद खुश हेबाक लेल ।आब अहूँ इन्टरभ्यू देबाक ओरियान करू ,हमहूँ जाइ छी दिल्लीक लेल रिजर्वेसन कराबऽ ।
रोहित- ठीक छै ।फेर इन्टरभ्यूसँ एलाक बाद भेँट हेतै ।
मोनू- बेस्ट आफ लक ।
रोहित- रूक ।एकटा बात और हमरा आबै धरि तूँ गामेमे रहिहेँ ।
मोनू- से किएक ?
रोहित- जँ हम कामयाब भऽ जेबै तँ खुश हेबाक लेल ।
मोन- हम तँ सदिखन खुश रहै छी ।ओना तोरा आबै धरि हम दिल्ली नै जेबौ ।
रोहित- धन्यवाद ।
मोनू-(गाबैत अछि) हम होगेँ कामयाब ,हम होगेँ कामयाब ।
(दुनू पर्दाक पाछू चलि जाइत अछि )
*************** पट-परिवर्तन **********************
(मंचपर बाटक दृश्य अछि ।पर्दाक एक कोणसँ रोहित मंचपर आबैत अछि ।पीठपर एकटा बैग लादल छै ,केश छिड़ियाएल ।उदास ,कननमुँह केने ,मंद चालसँ चलि रहल अछि ।तखने गीत गाबैत मोनूक मंचपर प्रवेश)
मोनू- आबि गेलें नोकरी लऽ कऽ ।
(रोहित बिनु किछु बाजने चलिते रहैत अछि)
मोनू- अरे रोहित ,तोरे कहै छीयौ ।रूक . .रूक ने ।
(रोहित फेर बिनु बाजने चलिते रहैत अछि ।मोनू दौड़ कऽ रोहित लऽग पहुँचैत अछि आ रोहितक हाथ पकरि लैत अछि ।रोहित रूकि जाइत अछि ।)
मोनू- कते देरसँ तोरा सोर करै छीयौ ।तूँ किछु सुनिते नै छें ।किछु तँ बाज ।कि भेलौ ।
(रोहित चूप अछि)
मोनू- धन्य छी महराज ।एक दिश बाजैत-बाजैत हमर मुँह दुखा गेल आ दोसर दिश अहाँ फेविकाँलसँ अपन ठोर साटि लेने छी ।ठीके कहै छै परचारमे ,एक बार सट गया तो सौ साल धरि नै उखड़ेगा ।
(रोहित बिनु उत्तर देने चलबाक कोशिश करैत अछि ।मुदा मोनू बाँहि पकड़ि रोकि लैत अछि ।)
मोनू- लगैत अछि बौआ नोकरी लऽ लेलनि । ई जीतक खुशीमे बौक भऽ गेलनि ।की महराज ,जीतैये बला गप छै ने?
रोहित- (दुख भरल आवाजमे ,धिरेसँ) नै ,हम ई खेल हारि गेलौं मीता ,हम नाकामयाब भऽ गेलौँ ।
मोनू- झूठ ,सरासर झूठ ।हम मानिये नै सकै छी ।तोरा सन मेधावी छात्र ई परीक्षामे फेल नै भऽ सकै छै ,किन्नौह नै ।
रोहित- हम सत्त कहै छी मीता। एहि रेसमे जीतलौँ तँ मुदा सबसँ पाछु रहि कऽ ।
(मोनूक हँसैत मुँह उदास भऽ जाइत अछि )
मोनू- मूदा ई भेलै कोना?
रोहित- टाका और पैरवीक चलते ।
मोनू- नै बुझलियौ ।कने फरिछा कऽ कह ।
रोहित- संगमे पाइ नै छल । दस किलोमीटर धरि पैदल चलऽ पड़ल ।
मोनू- की ओतऽ देरीसँ पहुँचलहीं ।
रोहित- नै ,पहुँचलियै तँ सबेरे मुदा अंग-अंग थाकि गेल ।
मोनू - तखन की भेलै |
रोहित- सब छात्रकेँ बेरा-बेरी बजाओल जाइत छलै ।इन्टरभ्यू कक्षसँ किओ मुस्कैत तँ किओ काननमुँह केने निकलै छलै ।बेसी कानिते निकलै ।थाकल तँ पहिनेसँ छलौं ओकरा सबकेँ देख हम बड डरि गेलौं ।
मोनू- अच्छए ,से बात ।आब बुझलौं ।महराज डरि कऽ भागि एलनि ।
रोहित- नै नै ,एहन गप नै छै ।
मोनू- तँ केहन छै से ने कह ।
रोहि- पहिने पूरा सुन तँ बीच्चेमे लोकि लै छेँ ।
मोनू- कह ।
रोहित- साँझ होइत-होइत सबहक इन्टरभ्यू भऽ गेलै ।सबसँ अंतीममे हमर बारी एलै ।हमरा बजाओल गेल ।डेराइत-डेराइत हम अंदर गेलौं ।एकटा बड़का टाबूलक एक दिश तीन टा अफसर बैसल छलै ।दोसर दिश एकटा कुर्सी खाली छलै ।हमरा बैसै लेल कहलकै तँ हम ओहि कुर्सीपर बैस गेलौं ,मुदा थाकल मोन एखनो डेराएले छल ।हम अपन सबटा सार्टिफिकेट देलियै ।ओ तीनू अफसर सार्टिफिकेट देखऽ लागलै ।
मोनू-सार्टिफिकेट देख तँ प्रसन्न भऽ गेल हेतै अफसर सब ।
रोहित- हँ ।ओकर बाद तीनू बेरा-बेरी प्रश्न पूछऽ लागल ।अलग-अलग क्षेत्रसँ अलग-अलग तरहकेँ प्रश्न ।पहिने तँ हम घबरा गेलौं मुदा बादमे हमहूँ सब प्रश्नक उत्तर फटाक-फटाक देबऽ लगलियै ।जतबे जबाब दियै ततबे प्रश्न पूछै ।हमर जबाब सूनि तीनू अफसरक ठोरपर मुश्कान नाचऽ लागलै ।दस-पनरह मीनट धरि प्रश्न पुछिते गेलै आ हम जबाब दैत गेलियै ।अन्तमे ओ सब चुप भऽ गेल आ अपनामे तीनू कानाफूसी करऽ लागल ।ओहिमेसँ एकटा एजगर अफसर उठि कऽ हमरा लग आबि गेल ।हमहूँ ठाढ़ भऽ गेलौं ।ओ हमर पीठ ठोकि देलक आ बाहर जाइ लेल कहलक ।हम अपन सार्टिफिकेट सब समटि बाहर आबऽ लागलौं ।
मोनू- जखन एते नीक इन्टरभ्यू गेलौ ।अफसर तोहर पीठ ठोकि देलकौ तखन नौकरी किएक नै भेटलौ ?तूँ फेल कोना कऽ गेलेँ ?शाइद तूँ मजाक करै छें ।झूठ बाजै छेँ ।
रोहित- नै नै ।ने हम मजाक करै छी आ ने झूठ बाजै छी ।हम बिल्कुल सत्त बाजि रहल छी ।
मोनू- तखन असलमे भेलै की?
रोहित- जखन हम बाहर आबै छलियै तखने एकटा अफसरक मोबाइल बाजलै ।ओ फोन उठा कऽ बतियाए लागलै ।ओकर बार्तालापसँ बुझना गेल जे कोनो बड़का नेताक फोन छै ।ओम्हरसँ किछु कहलकै तँ ओ अफसर कहलकै जे "सर ,आपका कनडिडेट इस लड़का से बहुत ज्यादा कमजोर है ।एक हीं सीट बचा है इसलिए नौकरी इसी लड़के को मिलेगा ।"उम्हरसँ और किछु किछु कहल गेलै मुदा अफसर ना-नुकुर करैत रहल ।अन्तमे अफसर कहलकै"अब सर आप नहीँ मानियेगा तो आपका काम करना हीँ पड़ेगा लेकिन दाम दस लाख लगेगा ।" ई कहि ओ फोन काटि देलकै ।तखन धरि हम बाहर आबि गेल छलौं ।
मोनू- लागै छै पैरवीकेँ दानव पहुँच गेल छलै ।
रोहित- शाइद ।एकर बाद जखन पास भेल छत्रक लिस्ट साटल गेलै तँ ओहिमे हमर नाम नै छलै ।
मोनू- आब सब गप हम साफ-साफ बूझि गेलियै ।जा धरि टाका आ पैरवी बला रहतै ,जा धरि घूस लै बला लोभी अफसर रहतै ,ता धरि कोनो गरीबक कल्याण नै भऽ सकै छै ।
रोहित- हम तँ पहिने कहने छलियौ , हमर कर्ममे सरकारी नोकरी नै ,बोरा उठेनाइ लिखल छै ।
मोनू- चिन्ता जुनि कर ।मेहनत आ इन्तजारक फल मीठ होइ छै ।आइ नै तँ काल्हि तूँ सफल हेबे करबेँ ।
रोहित- मोनू ।आब नै टाका अछि आ नै साहस बचल अछि ।आब कतौ कोनो परीक्षा देबाक इच्छा नै बचल अछि ।एतबेमे हमर जिनगी तहस-नहस भऽ गेल ।
मोनू- एना जुनि फाज ।सदिखन अपन सोच पोजीटीभ बना कऽ राख ।
रोहित- पोजीटीभ नै बनि पाबै छै यार ।माएक दबाइ खतम छै ।हाथमे एक्को टाका नै छै ।पहिनेसँ कर्जाक बोझ तऽर दबल छी ।आब तँ किओ कर्जो-पैंचो नै दै छै ।की करब ,कोना जीयब ,किछु नै फुराइत अछि ।एहनमे तूँ कहै छें पोजीटीभ सोचैक लेल ।एतऽ जीवन नीगेटीभ भेल अछि ,पोजीटीभ सोच कोन कुम्हारक चाकपर गढ़ब ।
मोनू- मीता टाकाक चिन्ता जुनि कर ।काल्हि हम दिल्ली जा रहल छी ।हम अपन दरमाहा भेज देल करबौ ।तूँ खाली मेहनत कर ।मोन लगा कऽ पढ़ आ सरकारी नोकरी ले ।
रोहित -- तूँ भेजबेँ वा किओ और देत ,हएत तँ कर्जे ने?
मोनू- हमर मदतिकेँ कर्जा नै मान ।एते दिन पढ़ैमे तूँ हमर मदति अपन ज्ञानसँ केलें ,हमर टास्क बना कऽ केलें ,आइ हम तोहर मदति पाइसँ करबौ ।हिसाब बराबर ।
रोहित- तैयो ।
मोनू- तैयो ,तैयो की? तैयो-बैयो किछु नै ।मोन बेसी छोट नै कर ।सफरसँ थाकल हेबेँ ।जो स्नान -धियान कऽ ,पेट पूजा कर ।कने कालमे हमहूँ आबै छीयौ ।
रोहित- की करबै पेट पूजा ।चाउरो-दालि तँ नै छै घरमे ।जीनगी गाराक घेघ भऽ गेल अछि ।कखनो कऽ होइत अछि एहन जीनगीसँ मरनाइ नीक ।
मोनू- बेसी बात नै बना ।खुशी खुशी जो ।आराम कर ।थाकल देह छौ तेँ अल-बल सोचाइ छौ ।जो . . .जो . . . ।
(दुनू पर्दाक पाछू चलि जाइत अछि)
********************** पट -परिवर्तन ********************
(रोहितक दलानक दृश्य ।रोहित धरतीपर बेहोश पड़ल अछि ।वायाँ हाथक कलाइसँ खून बहि रहल अछि ।दायाँ हाथक लऽग एकटा चक्कू राखल अछि ।पर्दाक पाछूसँ रमेशकेँ सोर पाड़ैत मोनूक प्रवेश)
मोनू- देखू ।यात्रासँ एतेक थाकि गेलै जे बीच्चे दलानपर सूति रहलै ।(रोहितक लऽग आबि ।घबराएल) ।अरे बाप रे बाप ।ई की भेलै? एकरा हाथसँ तँ खून बहै छै । (झूकि कऽ चक्कू उठा लैत अछि) अशांत मोनमे शाइद आत्महत्या करबाक प्रयास केलक ।अपनेसँ हाथक नस काटि लेलक ।अरे बाप रे बाप ।आब की करियै हम . . .डाँक्टर . . .डाँक्टर . . .किओ डाँक्टर के बजा . . .के . . .के . . .के जे . . .हमरे जाए पड़तै ।(चिकरैत) डाँक्टर बाबू ,यौ डाँक्टर बाबू ,दौरू यौ डाँक्टर बाबू . . .अनर्थ भऽ गेलै ,अनर्थ ।
(डाँक्टर बाबूकेँ सोर करैत मोनू मंचक एक कोणसँ पर्दाक पाछू जाइत अछि आ दोसर कोणसँ डाँक्टर बाबूक संग मंचपर आबैत अछि ।)
डाँक्टर बाबू- की भेलै? मरीज कतऽ छै?
मोनू- (रोहित दिश इशारा करैत अछि) इएह छै मरीज डाँक्टर बाबू ।
डाँक्टर बाबू- की भेलै एकरा?
मोनू- हाथक नस काटि लेलकै ।बड खून बहि रहल छै ।जल्दी करू नै तँ मरि जेतै ।
डाँक्टर बाबू- हम एकर इलाज नै कऽ सकै छी ।ई पुलिस केस अछि ,हम फँसि जाएब ।
(डाँक्टर बाबू बैग उठा जाए लागै छथि ,मोनू लपकि कऽ हुनक गट्टा पकड़ि लैत अछि )
मोनू- (कानैत) अहाँ एहि धरती परक भगवान छी ।अहाँ एना जुनि बाजू ।एकर इलाज कऽ दिऔ । कर प्राण बचा लिऔ ।(डाँक्टर बाबूक पएर पकड़ैत) हम अहाँक पएर पकड़ै छी ,हमर मीतकेँ जीया दिअ ।अहाँकेँ हमर सप्पत ।इलाज शुरू करू ।
डाँक्टर बाबू- पएर छोड़ हमर ।हम एकर इलाज कोनो कीमतपर नै करबै ।एकर इलाज कऽ कोनो संकट मोल नै लेब ।पहिने पुलिसकेँ बजा ।ओकरा एलाक बादे किछु हेतै ।
(डाँक्टर बाबू पएर छोड़बैक लेल जोरसँ झटका दैत अछि ।मोनू कने दूर गुरकि जाइ छै ।डाँक्टर बाबू जाए लागै छथि ।मोनू फेर हुनक बैग पकड़ि लैत अछि ।)
मोनू- जखन धरि पुलिस एतै तखन धरि हमर मीता मरि जेतै ।
डाँक्टर बाबू- मरि जेतै तँ हम की करी?अपन प्राण दऽ दी ।मरि जेतै तँ मरऽ दहीं ई हमर टेन्सन नै छै ।
मोनू- (जोरसँ बाजैत) धिक्कार अछि एहन डाँक्टरीपर ।एतऽ लोक मरि रहल छै आ अहाँ प्रवचण दऽ रहल छी ,कानून पढ़ा रहल छी ।की इएह सिखाओल गेल छल डाँक्टरी कालेजमे ।धिक्कार अछि एहन डिग्रीपर ।धिक्कार अछि मनुखतापर ।जाहि मनुखकेँ करेजमे मसियो दरेग नै हेतै ।जकरामे मनुखताकेँ सड़लो-गलल अंश नै बचल हेतै ,हमरा हिसाबसँ ओ एक माए-बापक जनमल भैये नै सकै छै ।
डाँक्टर बाबू- (पिनकैत) रे छौड़ा ,तूँ हमरा गारि पढ़लें ।थम्ह तोरा देखबै छीयौं ।
मोनू- (उपहास करैत) गारि ककरो उमरि देख नै पढ़ल जाइ छै ।किओ अपन नीक कर्मक प्रतापे इज्जत पाबै छै तँ किओ अपन खराप कर्मक प्रतापसँ गारि सुनै छै ।मुदा अफसोस अहाँ दुनूमे सँ एक्को टामे नै छी ।मनुखते नै तँ कर्म कतऽसँ ।
(तखने साइकिलक घण्टी बजबैत चिट्टी चाचाक प्रवेश)
चिट्ठी चाचा - की भेलै ।एते हल्ला किए करै छऽ ।
मोनू- हित आत्महत्या करबाक प्रयास केलक ।ओ वेहोश अछि ,आ ई (डाँक्टर बाबू दिश इशारा करैत) डाँक्टर इलाज करैसँ मना करै छथिन ।
चिट्ठी चाचा- हौ डाँक्टर ।तोरा लऽग लूरि छऽ तखन तँ लोक पूछारि करै छऽ ।समाजक प्राणी भऽ समाजसँ एते कतिआएल रहनाइ नीक नै छै ।(हाथ जोड़ैत) हम तोरा आगू हाथ जोड़ै छीअ ।तोरासँ जेठ भऽ विनती करै छीअ ।एकरा जीया दहक ।एकरा गरीबक कल्याण कऽ दहक ।
डाँक्टर बाबू- नै कक्का ।हमरा माँफ करू ।कोर्ट कचहरीक चक्करमे हम नै पड़ब ।
(डाँक्टर चलनाइ शुरू करैत अछि ।मोनू पाछूसँ डाँक्टरक गर्दनपर चक्कू राखि दैत अछि ।)
मोनू- (चिकरैत) डाँक्टर बाबू ।आइ जँ एतऽसँ हमर मीताक लहाश उठतै तँ हम अहूँक राम नाम सत्य कऽ देब ।
डाँक्टर बाबू- (घबराइत) हे ,हे ,चक्कू हटा ,चक्कू हटा ।ई गलत कऽ रहल छें ।
मोनू- आब सही -गलत फरिछेबाक शक्ति नै अछि हमरामे ।हम बस एतबे जानै छी ।आइ जँ एकर इलाज नै हेतै तँ हम एखने तोहर इलाज कऽ देबौ ।
(डाँक्टर घूरि कऽ रोहित लऽग आबैत अछि ।बैगसँ रूइ निकालि खून साफ करैत अछि ।मरहम पट्टी करैत अछि ।)
चिट्ठी चाचा- केहन युग आबि गेलै ।युवा वर्गमे आब लड़ैक साहस बचबे नै केलै ।छोट-छोट सन दुख भेलापर आत्महत्या ।लागैछ एहि यांत्रिक युगमे लोको सब रोबोट बनि गेलै ,जकरामे कोनो संवेदना नै होइ छै ।नीक- बेजाए सोचबाक शक्ति नै होइ छै ।प्रतिस्पर्धाक दौड़मे जानि नै कते युवा मृत्युक माला पहिर लै छै ।छोट-छोट विपतिसँ डारा कऽ प्राण तियागि दै छै ।जानि नै कतऽ जा रहल छै ई देश ।जानि नै कहिया जागतै युवामे चेतना ।
(रोहितकेँ होश आबै छै ।ओ उठि कऽ ठाढ़ हुअ लागै छै ।मोनू सहारा दऽ कऽ उठबै छै ।)
रोहित- (चारू कात घूमि) की हम स्वर्गमे छी ? की हमरा संग पूरा समाज मरि गेलै ?
मोनू- (चिट्टी चाचा दिश घूमि ।) चाचा होश आबि गेलै ।देखियौ ,देखियौ ,हमर मीत बचि गेलै ।जी गेलै ।
(डाँक्टर बाबू आ चिट्ठी चाचा रोहित लऽग आबि जाइ छथि ।)
रोहित- हम मरऽ चाहै छी । हमरा किए जीएलें ।हमरा मरऽ दे ।
डाँक्टर बाबू- भगवान जीवन देलखिन जीबाक लेल ,मरबाक लेल नै ।जँ मरनाइ नीक बात रहितै तँ आइ दुनियाँमे एक्को टा मनुख नै रहितै ।सब स्वर्गवासी भऽ गेल रहितै ।जीवनमे सदिखन खुश रहबाक चाही ,मरबाक नै ।देखै छऽ ,तोहर केस तँ हमर आँखि खोलि देलक ,तोरा सन युवाक आँखि आब कहिया खुलतै ?जानि नै ।
रोहित- खुश ,कोना रहब खुश ।जीनगीमे जखन हारक सामना होइ छै तँ हँसी-खुशी ओहि हारक संग हेरा जाइ छै ,तखन मरनाइये नीक लागै छै ।
चिट्ठी चाचा- एक बेर हारि जेबाक मतलब ई तँ नै छै जे जीवन भरि लेल हारि गेलियै ।एकटा घोंघा बेर-बेर देवालपर चढ़ैत अछि ,बेर-बेर खसैत अछि ,मुदा हारि नै मानैत अछि ।लगातार प्रयास करैत अछि आ एक दिन ओ देबालपर चढ़िये जाइत अछि ।हारि कऽ जीतैमे जे मजा छै से और किछुमे नै ।
डाँक्टर बाबू- जे सब दिन जीतै छै ओ अपना-आपकेँ बलगर समझि लै छै ।ओकरा घमण्ड भऽ जाइ छै आ फेर ओ कहियो मेहनत नै करै छै ।मुदा जे सब दिन हारै छै ,ओ सब दिन मेहनत करै छै आ ओ जखन जीतै छै तँ विश्वविजेता बनै छै ।बुझलऽ ।
मोनू - अरे ,एकटा परीक्षामे फेल भेलासँ कोनो प्रलय नै आबि जेतै ।जीवनमे एखन कतेको परीक्षा बाँकिए छै । मनुखक जिनगीत दोसर नाम थिक परीक्षा ।मनुख कते परीक्षासँ भागत ।डेग-डेगपर एकटा नव चुनौती भेटै छै ।तेँ हिम्मर राख आ सब किला फतह कर ।
चिट्ठी चाचा- दू सए साल धरि प्रत्येक दिन ,प्रत्येक क्षण अंग्रेजसँ हम सब हारैत एलौं ।मुदा एक ने एक दिन जीत भेटबे केलै ।मनुखक जीवनमे हार जीत तँ चलिते रहै छै ।एहिमे आश्चर्यक कोन गप ? घबराइकेँ कोन गप ?
डाँक्टर बाबू- मनुखकेँ अपन सब हारसँ सीख लेबाक चाही ।अपन कमजोरी दूर करबाक चाही ,नै अनुतिर्ण भेलापर परेशान भऽ आत्महत्या सन खराप डेग उठेबाक चाही । अजुक युवाकेँ ई सोच दिमागसँ निकालऽ पड़तै जे कोनो काजमे फेल भेलाक बाद एकर समाधान मात्र आत्महत्या छै ।
चिट्ठी चाचा- रोहित । ई हार तोहर हार नै छलौ ।ई हार तँ ओ पैरवी बलाकेँ हार छलै जे तोहर ज्ञानक आगू हारि गेलै ।तूँ आब नव उर्जा संग ठाढ़ हो ,नव शक्तिक संग चोट कर ।तोहर विजय जरूर है ।कहाबत तँ सुनने हेबेँ , सए सोनारकेँ तँ एक लोहारकेँ ।एक ने एक दिन जिनगीक सब बाधा ,सब परीक्षा तूँ उतिर्ण हेबेँ ।
मोनू- हँ मीता ,तूँ एखनो जीतल छेँ ।सब दिन जीतल रहबेँ ।
रोहित- क्षमा करू ।माँफ करू ।हमर आत्मबल डोलि गेल छल ।हम भटकि गेल छलौं ।मुदा आब हम देबर मेहनत करब ।तखन धरि मेहनत करब जखन धरि ओ जीतल टाका आ पैरवी बलाक गालपर ई हारल विजेताक जीतक थप्पर नै पड़ि जाइ ।हम हमरा सन सब युवासँ कहऽ चाहब जे हमरा जकाँ आत्महत्या सन डेग किओ नै उठबू ।फेल भेलापर और बेसी जोशक संग जीतक मार्गपर आगू बढ़ैत चलू ।जीत भेटबे करत ।जाइ छी हमहूँ आब बेसी मेहनत कऽ अपन लक्ष्य धरि पहुँचब । हँ ,ई कहाबत सदिखन मोन राखब ,सए दिन सोनारकेँ तँ एक दिन लोहारकेँ ।
(मंचपर सब हँसऽ लागैत अछि आ धिरे-धिरे पर्दा खसऽ लगैत अछि ।)
समाप्त
अमित मिश्र
करियन ,समस्तीपुर
(मिथिला ,बिहार)
1 . रोहित- 20 साल
2.मानू- 20 साल- रोहितक दोस्त
3.चिट्ठी चाचा- 45 साल- डाकिया
4.डाँक्टर बाबू -35 साल- डाक्टर
( रोहितक दलान परक दृश्य एक कोणमे मौसमी फसलक किछु बोझ राखल अछि ।माँझमे टाटक घरपर हरियर तिलकोरक लत्ती लतरल अछि ।एकटा पुरान साइकिल टाटसँ सटा कऽ राखल अछि ।भऽ सकैए तँ एकटा नादि आ खुट्टा देल जा सकैछ ।रोहित साधारण कपड़ामे घरक आगू ,सोचैक मुद्रामे एक कातसँ दोसर कात टहलि रहल अछि ।रोहितसँ नीक परिधानमे मोनू पर्दाक पाछूसँ "रोहित-रोहित" चिकरैत मंचपर आबैत अछि ।आवाज सूनि रोहितक धियान टूटैत अछि आ फेर दुनू गला मिलैत अछि ।)
रोहित- मोनू ,ई क्रिचदार कपड़ा पहिर दुपहरियामे कतऽ जा रहल छें ।की कोनो खास गप छै की?
मोनू- खास गप की रहतै ।मोन भऽ गेलै ,पहिर लेलौं।ओना रहित ,आगूक की प्लान छौ?
रोहित- (आश्चर्यसँ)प्लान।तोहर गप नै बुझलियौ ,कने फरिछा कऽ कह ।
मोनू- अरे मूर्ख करियरकेँ प्लान ।
रोहित- अच्छे-अच्छे बूझि गेलियै ।
मोनू- इएह तँ तोहर प्रोबलेम छौ ,तूँ बुझिते बड देरसँ छेँ ।कने सोच ,इन्टर केला दू वर्ष भऽ गेलै आ एखन धरि बेरोजगारे बैसल छी ।कोना पार हेतै जीवनक डगरिया रे भेया ।
रोहित- ठीके कहलें तूँ ।पिछला एक घण्टासँ हमहूँ इएह सोचै छलौं ।तोरा तँ बाबुओ जीक सहारा छौ मुदा हमर के? एकटा बूढ़ माए जे खाटो परसँ नै उठै छै ।कतौसँ एक्को टाकाक आमदनी नै छै हमरा ।बटैया करै छी ,दूध बेचै छी आ दवाइ-दारूक बाद जँ टाका बचै अछि तँ पोथी कीन पढ़ै छी ।तोरा की कहबौ ,हमर हालत तँ जानिते छें ।
मोनू- हँ हमरा बुझल अछि तेँ ने दुनू गोटाकेँ आब नोकरीक बारेमे सोचऽ पड़तै ।जँ नोकरी नै भेल तँ जीनाइ मोशकिल भऽ जेतै ।
रोहित- गप तँ सत्ते कहलें दोस ।दोस ,चरि चक्किया ए.सी बला गाड़ी देख मोन होइत अछि जे एक बेर हमहूँ चढ़ितौँ ।बजारक गप सूनि बजारेमे अपन छोट परिवार संग रहबाक मोन होइत अछि ।मुखिया जीक हाथमे मोबाइल देख कोनो नेना जकाँ मोन कानि जाइत अछि ।मुदा ई सब एकटा मरनासन्न सपना जकाँ लागैत अछि ,दोस ।भागमे लिखल छै दिल्ली-बम्बइमे बोरा उठेनाइ तँ चरिचक्किया कतऽसँ भेटत ।
मोनू- गलत बात ,बिल्कुल गलत बात ।मनुखकेँ एते उदास नै हेबाक चाही ,जँ जीलाकेँ तेसर टाँपर ,तोरा सन मनुख एते नकारात्मक सोच रखतै तँ बूझें प्रलय आबि गेलै ।
रोहित- सोच नकारात्मक नै छै भाइ ,मुदा हालत एहन नै छै जे सकारात्मक सोचब ।ई घोर मँहगाइक युगमे जीनगी जीबाक लेल टाका चाही आ टाकाक लेल बोरा उठबैये पड़तै ।
मोनू- फेर वएह बात ।अरे हम कहै छीयौ ,तोरा बोरा नै उठबऽ पड़तौ ,तोरा एहन गुणीकेँ तँ नोकरी डिबिया लऽ कऽ ताकै छै ।
रोहित- एहनो कतौ भेलै यै ।आइ-काल्हि सरकारी नोकरी तँ ईदक चाने बनल छै ।
मोनू- आ प्राइवेट ।
रोहित- ओकरो लेल पहुँच चाही ।
मोनू- ( कर जोड़ैत) चूप रहू महराज ,चूप रहू ।एते भाषण जुनि मारू ।नोकरी लेल फारम भरऽ पड़ै छै ,अहाँ कतौ भरलौँ की नै?
रोहित- हँ ,एकटा परीक्षा देने छी ।अपन एक सालक बचाओल टाकाक हवण कऽ कऽ ।
मोनू- तँ फिकिर कथी के ?प्रतिक्षा करू ।एहि हवणक कुण्डसँ अमृतक घैल जरूर बहरेतै ।हमरा विश्वास अछि अहाँ जरूर पास करब ।
रोहित- तोहर मुँहमे मिश्री ।(गम्भीर होइत)जँ अमृत नै बहरेलै तँ बूझ हमर जीवन बेकार भऽ जेतै ।
(मंचक पाछूसँ साइकिलक घण्टी धिरेसँ बजनाइ शुरू होइत अछि आ धिरे-धिरे ध्वनी तीव्र होइत अछि ।रोहित आ मोनू उम्हरे देखऽ लगैत अछि ।पोस्टमैनक ड्रेसमे ।एक हाथमे किछु चिट्ठी आ कन्हपर एकटा बैग ,दोसर हाथसँ साइकिलक हेण्डिल पकड़ने ,मंचक एक कोणसँ चिट्ठी चाचाक प्रवेश होइत अछि ।)
रोहित ,मोनू- (एक साथ ,एक स्वरमे) प्रणाम चिट्ठी चाचा ।
चिट्ठी चाचा - खुश रहऽ बौआ ।
मोनू- कक्का ,आइ हम एकटा बात जानिये कऽ रहब ।
चिट्ठी चाचा- हँ हँ ,किएक नै जानबऽ ,जानि लए ।कोन बात जानबाक छऽ ।
मोनू- रोहित अहाँकेँ चिट्ठी चाचा किए कहै यै?
चिट्ठी चाचा- बड पुरान गप छै ।(रोहित दिश इशारा करैत) ई तीन-चारि वर्षक हेतै ।हम सब दिन चिट्ठी बाँटैक लेल इएह बाटे जाइ छलियै आ एहिना जोरसँ घण्टी बजबैत छलियै ।हमर घण्टीक आबाज सूनि ई नाङटे गाँरि ,हँसैत -कूदैत सड़क धरि आबि जाइ ।
(रोहित लजा जाइत अछि)
मोनू- फेर की होइत छलै ।
चिट्ठी चाचा- पहिने ई सड़क कच्ची छलै ।पैघ-पैघ खाधि छलै सड़कपर ।साउन-भादो सौँसे सड़कपर थाल-कादोक शासन भऽ जाइ ।जखन ई कूदैत आबै तँ चुभ दऽ ओहि खाधिमे खसि पड़ै आ थाल-कादोमे सना कऽ भूत बनि जाइ छलै ।हा . .हा . .हा . . (सब हँसऽ लागैत अछि आ रोहित लाजे मूड़ि गोँति लैत अछि )
रोहित - छोरू ने चाचा ,अहूँ कोन गप उठा देलौँ ।
मोनू- नै नै ,हुअ दिऔ ।
चिट्ठी चाचा- तकरा बाद जखन कखनो इ कानै तँ एकर बाबी कहथिन जे चिट्ठी बाला चाचा आबै छथुन ।ई बात सुनिते ई हँसऽ लागै आ वएह दिनसँ हमर नाम चिट्ठी चाचा पड़ि गेलै ।की हौ रोहित ,इएह गप छै ने?
(रोहित स्वीकार करैत उपर-नीच्चा दू बेर मूड़ि डोलबैत अछि)
मोनू-चाचा ,तखन तँ अहाँक घण्टीमे बड पैघ जादू छै जे एकरा सनक उदास रहै बला मनुखकेँ हँसा दै छलै ।
चिट्ठी चाचा- (आश्चर्यसँ ) उदास ।उदास किए रहै छै ।
मोनू- इएह नोकरी चाकरीक चिन्तामे ।
चिट्ठी चाचा- ले बलैया ।हम तँ गपक चक्करमे ओरिजने गप बिसरि गेलौँ ।नोकरीसँ इयादि आएल ,तोरा दुनूक नामे चिट्ठी एलै यै ।(दू टा चिट्ठी निकालि ,रोहित दिश घूमि) ई तोहर (मोनूकेँ दैत) आ ई तोहर ।
(दुनू लिफाफा फाड़ि , चिट्ठी पढ़ऽ लागैत अछि ।धिरे-धिरे रोहितक मौलाइल मुँहपर हर्षक रेखा आबऽ लागै छै ।एहने सन मोनूक मुँहपर सेहो )
मोनू- (खुशीसँ चिकरैत) मीता ,हमरा नोकरि लागि गेल ।
रोहित- (खुशीसँ) मीता ,हमहूँ परीक्षा पास कऽ गेलौँ ।इन्टरभ्यू परसू अछि ।
चिट्ठी चाचा- भगवानक घर देर छै ,अन्हेर नै ।तोरा दुनूकेँ नोकरी लगाइये देलखुन मैया रानी ।
रोहित- चाचा ,एखन नोकरी नै लागल ।एकटा मौखिक परीक्षा एखनो बाँकिए अछि ।
चिट्ठी चाचा- अरे जखन लिखित निकलि गेलै तँ मौखिको निकलिए जेतै ।चिन्ता जुनि करऽ ।नीके नीके जा ,परीक्षा दऽ ,नोकरी लऽ कऽ आबऽ ।मैया रानी भला करथुन ।अच्छेए ,हमरा और चिट्ठी बँटबाक अछि हम जाइ छीअ ।
रोहित- ठीक छै चाचा ।
(घण्टी बजबैत चिट्ठी चाचा चलि जाइत छथि )
रोहित- मीता ,तोरा कतऽसँ चिट्ठी एलौ ,कोन ठाम ,कोन कम्पनीमे ,केहन नोकरी लागलौ?
मोनू- कने साँस लऽ कऽ बाज ।एना जँ एक्के बेर प्रश्नक बाढ़ि आनबें तखन तँ हम भसिआइये जाएब ।
रोहित- बुझलियै ,बुझलियै ।नै एक फेर ,बेरा-बेरी तँ उत्तर दे ।
मोनू- दिल्लीसँ चिट्ठी आएल छलै ।जाहि कम्पनीमे बाबू काज करै छथिन ,ओहि कम्पनीमे सुपरवाइजरकेँ जरूरति छलै ,वएह पोस्ट हमरा भेटल अछि ।
रोहित- मुदा कोना?
मोनू- ओकर ठिकेदार अपने इम्हरकेँ छलै ।बाबूजी ओकरा हमर पैरवी केलखिन तँ ओ तैयार भऽ गेलै ।बाबू जी दिल्ली एबाक लेल चिट्ठी भेजने छथिन ।
रोहित- मीता ,जखन एगो दोस्त कामयाब होइ छै तखन दोसर दोस्तक करेजक एक कोणमे खुशीक वर्षा होइ छै आ दोसर कोणमे दुखक ठनका खसै छै ।खैर ,तोहर कामयाबीसँ हम खुश छी ,बड खुश छी ।हमर कामयाबी तँ एखनो माँझ सागरमे हेल रहल छै ,जानि नै भेटतै कि नै भेटतै ।
मोनू- अपनेक बहुत-बहुत धन्यवाद खुश हेबाक लेल ।आब अहूँ इन्टरभ्यू देबाक ओरियान करू ,हमहूँ जाइ छी दिल्लीक लेल रिजर्वेसन कराबऽ ।
रोहित- ठीक छै ।फेर इन्टरभ्यूसँ एलाक बाद भेँट हेतै ।
मोनू- बेस्ट आफ लक ।
रोहित- रूक ।एकटा बात और हमरा आबै धरि तूँ गामेमे रहिहेँ ।
मोनू- से किएक ?
रोहित- जँ हम कामयाब भऽ जेबै तँ खुश हेबाक लेल ।
मोन- हम तँ सदिखन खुश रहै छी ।ओना तोरा आबै धरि हम दिल्ली नै जेबौ ।
रोहित- धन्यवाद ।
मोनू-(गाबैत अछि) हम होगेँ कामयाब ,हम होगेँ कामयाब ।
(दुनू पर्दाक पाछू चलि जाइत अछि )
*************** पट-परिवर्तन **********************
(मंचपर बाटक दृश्य अछि ।पर्दाक एक कोणसँ रोहित मंचपर आबैत अछि ।पीठपर एकटा बैग लादल छै ,केश छिड़ियाएल ।उदास ,कननमुँह केने ,मंद चालसँ चलि रहल अछि ।तखने गीत गाबैत मोनूक मंचपर प्रवेश)
मोनू- आबि गेलें नोकरी लऽ कऽ ।
(रोहित बिनु किछु बाजने चलिते रहैत अछि)
मोनू- अरे रोहित ,तोरे कहै छीयौ ।रूक . .रूक ने ।
(रोहित फेर बिनु बाजने चलिते रहैत अछि ।मोनू दौड़ कऽ रोहित लऽग पहुँचैत अछि आ रोहितक हाथ पकरि लैत अछि ।रोहित रूकि जाइत अछि ।)
मोनू- कते देरसँ तोरा सोर करै छीयौ ।तूँ किछु सुनिते नै छें ।किछु तँ बाज ।कि भेलौ ।
(रोहित चूप अछि)
मोनू- धन्य छी महराज ।एक दिश बाजैत-बाजैत हमर मुँह दुखा गेल आ दोसर दिश अहाँ फेविकाँलसँ अपन ठोर साटि लेने छी ।ठीके कहै छै परचारमे ,एक बार सट गया तो सौ साल धरि नै उखड़ेगा ।
(रोहित बिनु उत्तर देने चलबाक कोशिश करैत अछि ।मुदा मोनू बाँहि पकड़ि रोकि लैत अछि ।)
मोनू- लगैत अछि बौआ नोकरी लऽ लेलनि । ई जीतक खुशीमे बौक भऽ गेलनि ।की महराज ,जीतैये बला गप छै ने?
रोहित- (दुख भरल आवाजमे ,धिरेसँ) नै ,हम ई खेल हारि गेलौं मीता ,हम नाकामयाब भऽ गेलौँ ।
मोनू- झूठ ,सरासर झूठ ।हम मानिये नै सकै छी ।तोरा सन मेधावी छात्र ई परीक्षामे फेल नै भऽ सकै छै ,किन्नौह नै ।
रोहित- हम सत्त कहै छी मीता। एहि रेसमे जीतलौँ तँ मुदा सबसँ पाछु रहि कऽ ।
(मोनूक हँसैत मुँह उदास भऽ जाइत अछि )
मोनू- मूदा ई भेलै कोना?
रोहित- टाका और पैरवीक चलते ।
मोनू- नै बुझलियौ ।कने फरिछा कऽ कह ।
रोहित- संगमे पाइ नै छल । दस किलोमीटर धरि पैदल चलऽ पड़ल ।
मोनू- की ओतऽ देरीसँ पहुँचलहीं ।
रोहित- नै ,पहुँचलियै तँ सबेरे मुदा अंग-अंग थाकि गेल ।
मोनू - तखन की भेलै |
रोहित- सब छात्रकेँ बेरा-बेरी बजाओल जाइत छलै ।इन्टरभ्यू कक्षसँ किओ मुस्कैत तँ किओ काननमुँह केने निकलै छलै ।बेसी कानिते निकलै ।थाकल तँ पहिनेसँ छलौं ओकरा सबकेँ देख हम बड डरि गेलौं ।
मोनू- अच्छए ,से बात ।आब बुझलौं ।महराज डरि कऽ भागि एलनि ।
रोहित- नै नै ,एहन गप नै छै ।
मोनू- तँ केहन छै से ने कह ।
रोहि- पहिने पूरा सुन तँ बीच्चेमे लोकि लै छेँ ।
मोनू- कह ।
रोहित- साँझ होइत-होइत सबहक इन्टरभ्यू भऽ गेलै ।सबसँ अंतीममे हमर बारी एलै ।हमरा बजाओल गेल ।डेराइत-डेराइत हम अंदर गेलौं ।एकटा बड़का टाबूलक एक दिश तीन टा अफसर बैसल छलै ।दोसर दिश एकटा कुर्सी खाली छलै ।हमरा बैसै लेल कहलकै तँ हम ओहि कुर्सीपर बैस गेलौं ,मुदा थाकल मोन एखनो डेराएले छल ।हम अपन सबटा सार्टिफिकेट देलियै ।ओ तीनू अफसर सार्टिफिकेट देखऽ लागलै ।
मोनू-सार्टिफिकेट देख तँ प्रसन्न भऽ गेल हेतै अफसर सब ।
रोहित- हँ ।ओकर बाद तीनू बेरा-बेरी प्रश्न पूछऽ लागल ।अलग-अलग क्षेत्रसँ अलग-अलग तरहकेँ प्रश्न ।पहिने तँ हम घबरा गेलौं मुदा बादमे हमहूँ सब प्रश्नक उत्तर फटाक-फटाक देबऽ लगलियै ।जतबे जबाब दियै ततबे प्रश्न पूछै ।हमर जबाब सूनि तीनू अफसरक ठोरपर मुश्कान नाचऽ लागलै ।दस-पनरह मीनट धरि प्रश्न पुछिते गेलै आ हम जबाब दैत गेलियै ।अन्तमे ओ सब चुप भऽ गेल आ अपनामे तीनू कानाफूसी करऽ लागल ।ओहिमेसँ एकटा एजगर अफसर उठि कऽ हमरा लग आबि गेल ।हमहूँ ठाढ़ भऽ गेलौं ।ओ हमर पीठ ठोकि देलक आ बाहर जाइ लेल कहलक ।हम अपन सार्टिफिकेट सब समटि बाहर आबऽ लागलौं ।
मोनू- जखन एते नीक इन्टरभ्यू गेलौ ।अफसर तोहर पीठ ठोकि देलकौ तखन नौकरी किएक नै भेटलौ ?तूँ फेल कोना कऽ गेलेँ ?शाइद तूँ मजाक करै छें ।झूठ बाजै छेँ ।
रोहित- नै नै ।ने हम मजाक करै छी आ ने झूठ बाजै छी ।हम बिल्कुल सत्त बाजि रहल छी ।
मोनू- तखन असलमे भेलै की?
रोहित- जखन हम बाहर आबै छलियै तखने एकटा अफसरक मोबाइल बाजलै ।ओ फोन उठा कऽ बतियाए लागलै ।ओकर बार्तालापसँ बुझना गेल जे कोनो बड़का नेताक फोन छै ।ओम्हरसँ किछु कहलकै तँ ओ अफसर कहलकै जे "सर ,आपका कनडिडेट इस लड़का से बहुत ज्यादा कमजोर है ।एक हीं सीट बचा है इसलिए नौकरी इसी लड़के को मिलेगा ।"उम्हरसँ और किछु किछु कहल गेलै मुदा अफसर ना-नुकुर करैत रहल ।अन्तमे अफसर कहलकै"अब सर आप नहीँ मानियेगा तो आपका काम करना हीँ पड़ेगा लेकिन दाम दस लाख लगेगा ।" ई कहि ओ फोन काटि देलकै ।तखन धरि हम बाहर आबि गेल छलौं ।
मोनू- लागै छै पैरवीकेँ दानव पहुँच गेल छलै ।
रोहित- शाइद ।एकर बाद जखन पास भेल छत्रक लिस्ट साटल गेलै तँ ओहिमे हमर नाम नै छलै ।
मोनू- आब सब गप हम साफ-साफ बूझि गेलियै ।जा धरि टाका आ पैरवी बला रहतै ,जा धरि घूस लै बला लोभी अफसर रहतै ,ता धरि कोनो गरीबक कल्याण नै भऽ सकै छै ।
रोहित- हम तँ पहिने कहने छलियौ , हमर कर्ममे सरकारी नोकरी नै ,बोरा उठेनाइ लिखल छै ।
मोनू- चिन्ता जुनि कर ।मेहनत आ इन्तजारक फल मीठ होइ छै ।आइ नै तँ काल्हि तूँ सफल हेबे करबेँ ।
रोहित- मोनू ।आब नै टाका अछि आ नै साहस बचल अछि ।आब कतौ कोनो परीक्षा देबाक इच्छा नै बचल अछि ।एतबेमे हमर जिनगी तहस-नहस भऽ गेल ।
मोनू- एना जुनि फाज ।सदिखन अपन सोच पोजीटीभ बना कऽ राख ।
रोहित- पोजीटीभ नै बनि पाबै छै यार ।माएक दबाइ खतम छै ।हाथमे एक्को टाका नै छै ।पहिनेसँ कर्जाक बोझ तऽर दबल छी ।आब तँ किओ कर्जो-पैंचो नै दै छै ।की करब ,कोना जीयब ,किछु नै फुराइत अछि ।एहनमे तूँ कहै छें पोजीटीभ सोचैक लेल ।एतऽ जीवन नीगेटीभ भेल अछि ,पोजीटीभ सोच कोन कुम्हारक चाकपर गढ़ब ।
मोनू- मीता टाकाक चिन्ता जुनि कर ।काल्हि हम दिल्ली जा रहल छी ।हम अपन दरमाहा भेज देल करबौ ।तूँ खाली मेहनत कर ।मोन लगा कऽ पढ़ आ सरकारी नोकरी ले ।
रोहित -- तूँ भेजबेँ वा किओ और देत ,हएत तँ कर्जे ने?
मोनू- हमर मदतिकेँ कर्जा नै मान ।एते दिन पढ़ैमे तूँ हमर मदति अपन ज्ञानसँ केलें ,हमर टास्क बना कऽ केलें ,आइ हम तोहर मदति पाइसँ करबौ ।हिसाब बराबर ।
रोहित- तैयो ।
मोनू- तैयो ,तैयो की? तैयो-बैयो किछु नै ।मोन बेसी छोट नै कर ।सफरसँ थाकल हेबेँ ।जो स्नान -धियान कऽ ,पेट पूजा कर ।कने कालमे हमहूँ आबै छीयौ ।
रोहित- की करबै पेट पूजा ।चाउरो-दालि तँ नै छै घरमे ।जीनगी गाराक घेघ भऽ गेल अछि ।कखनो कऽ होइत अछि एहन जीनगीसँ मरनाइ नीक ।
मोनू- बेसी बात नै बना ।खुशी खुशी जो ।आराम कर ।थाकल देह छौ तेँ अल-बल सोचाइ छौ ।जो . . .जो . . . ।
(दुनू पर्दाक पाछू चलि जाइत अछि)
********************** पट -परिवर्तन ********************
(रोहितक दलानक दृश्य ।रोहित धरतीपर बेहोश पड़ल अछि ।वायाँ हाथक कलाइसँ खून बहि रहल अछि ।दायाँ हाथक लऽग एकटा चक्कू राखल अछि ।पर्दाक पाछूसँ रमेशकेँ सोर पाड़ैत मोनूक प्रवेश)
मोनू- देखू ।यात्रासँ एतेक थाकि गेलै जे बीच्चे दलानपर सूति रहलै ।(रोहितक लऽग आबि ।घबराएल) ।अरे बाप रे बाप ।ई की भेलै? एकरा हाथसँ तँ खून बहै छै । (झूकि कऽ चक्कू उठा लैत अछि) अशांत मोनमे शाइद आत्महत्या करबाक प्रयास केलक ।अपनेसँ हाथक नस काटि लेलक ।अरे बाप रे बाप ।आब की करियै हम . . .डाँक्टर . . .डाँक्टर . . .किओ डाँक्टर के बजा . . .के . . .के . . .के जे . . .हमरे जाए पड़तै ।(चिकरैत) डाँक्टर बाबू ,यौ डाँक्टर बाबू ,दौरू यौ डाँक्टर बाबू . . .अनर्थ भऽ गेलै ,अनर्थ ।
(डाँक्टर बाबूकेँ सोर करैत मोनू मंचक एक कोणसँ पर्दाक पाछू जाइत अछि आ दोसर कोणसँ डाँक्टर बाबूक संग मंचपर आबैत अछि ।)
डाँक्टर बाबू- की भेलै? मरीज कतऽ छै?
मोनू- (रोहित दिश इशारा करैत अछि) इएह छै मरीज डाँक्टर बाबू ।
डाँक्टर बाबू- की भेलै एकरा?
मोनू- हाथक नस काटि लेलकै ।बड खून बहि रहल छै ।जल्दी करू नै तँ मरि जेतै ।
डाँक्टर बाबू- हम एकर इलाज नै कऽ सकै छी ।ई पुलिस केस अछि ,हम फँसि जाएब ।
(डाँक्टर बाबू बैग उठा जाए लागै छथि ,मोनू लपकि कऽ हुनक गट्टा पकड़ि लैत अछि )
मोनू- (कानैत) अहाँ एहि धरती परक भगवान छी ।अहाँ एना जुनि बाजू ।एकर इलाज कऽ दिऔ । कर प्राण बचा लिऔ ।(डाँक्टर बाबूक पएर पकड़ैत) हम अहाँक पएर पकड़ै छी ,हमर मीतकेँ जीया दिअ ।अहाँकेँ हमर सप्पत ।इलाज शुरू करू ।
डाँक्टर बाबू- पएर छोड़ हमर ।हम एकर इलाज कोनो कीमतपर नै करबै ।एकर इलाज कऽ कोनो संकट मोल नै लेब ।पहिने पुलिसकेँ बजा ।ओकरा एलाक बादे किछु हेतै ।
(डाँक्टर बाबू पएर छोड़बैक लेल जोरसँ झटका दैत अछि ।मोनू कने दूर गुरकि जाइ छै ।डाँक्टर बाबू जाए लागै छथि ।मोनू फेर हुनक बैग पकड़ि लैत अछि ।)
मोनू- जखन धरि पुलिस एतै तखन धरि हमर मीता मरि जेतै ।
डाँक्टर बाबू- मरि जेतै तँ हम की करी?अपन प्राण दऽ दी ।मरि जेतै तँ मरऽ दहीं ई हमर टेन्सन नै छै ।
मोनू- (जोरसँ बाजैत) धिक्कार अछि एहन डाँक्टरीपर ।एतऽ लोक मरि रहल छै आ अहाँ प्रवचण दऽ रहल छी ,कानून पढ़ा रहल छी ।की इएह सिखाओल गेल छल डाँक्टरी कालेजमे ।धिक्कार अछि एहन डिग्रीपर ।धिक्कार अछि मनुखतापर ।जाहि मनुखकेँ करेजमे मसियो दरेग नै हेतै ।जकरामे मनुखताकेँ सड़लो-गलल अंश नै बचल हेतै ,हमरा हिसाबसँ ओ एक माए-बापक जनमल भैये नै सकै छै ।
डाँक्टर बाबू- (पिनकैत) रे छौड़ा ,तूँ हमरा गारि पढ़लें ।थम्ह तोरा देखबै छीयौं ।
मोनू- (उपहास करैत) गारि ककरो उमरि देख नै पढ़ल जाइ छै ।किओ अपन नीक कर्मक प्रतापे इज्जत पाबै छै तँ किओ अपन खराप कर्मक प्रतापसँ गारि सुनै छै ।मुदा अफसोस अहाँ दुनूमे सँ एक्को टामे नै छी ।मनुखते नै तँ कर्म कतऽसँ ।
(तखने साइकिलक घण्टी बजबैत चिट्टी चाचाक प्रवेश)
चिट्ठी चाचा - की भेलै ।एते हल्ला किए करै छऽ ।
मोनू- हित आत्महत्या करबाक प्रयास केलक ।ओ वेहोश अछि ,आ ई (डाँक्टर बाबू दिश इशारा करैत) डाँक्टर इलाज करैसँ मना करै छथिन ।
चिट्ठी चाचा- हौ डाँक्टर ।तोरा लऽग लूरि छऽ तखन तँ लोक पूछारि करै छऽ ।समाजक प्राणी भऽ समाजसँ एते कतिआएल रहनाइ नीक नै छै ।(हाथ जोड़ैत) हम तोरा आगू हाथ जोड़ै छीअ ।तोरासँ जेठ भऽ विनती करै छीअ ।एकरा जीया दहक ।एकरा गरीबक कल्याण कऽ दहक ।
डाँक्टर बाबू- नै कक्का ।हमरा माँफ करू ।कोर्ट कचहरीक चक्करमे हम नै पड़ब ।
(डाँक्टर चलनाइ शुरू करैत अछि ।मोनू पाछूसँ डाँक्टरक गर्दनपर चक्कू राखि दैत अछि ।)
मोनू- (चिकरैत) डाँक्टर बाबू ।आइ जँ एतऽसँ हमर मीताक लहाश उठतै तँ हम अहूँक राम नाम सत्य कऽ देब ।
डाँक्टर बाबू- (घबराइत) हे ,हे ,चक्कू हटा ,चक्कू हटा ।ई गलत कऽ रहल छें ।
मोनू- आब सही -गलत फरिछेबाक शक्ति नै अछि हमरामे ।हम बस एतबे जानै छी ।आइ जँ एकर इलाज नै हेतै तँ हम एखने तोहर इलाज कऽ देबौ ।
(डाँक्टर घूरि कऽ रोहित लऽग आबैत अछि ।बैगसँ रूइ निकालि खून साफ करैत अछि ।मरहम पट्टी करैत अछि ।)
चिट्ठी चाचा- केहन युग आबि गेलै ।युवा वर्गमे आब लड़ैक साहस बचबे नै केलै ।छोट-छोट सन दुख भेलापर आत्महत्या ।लागैछ एहि यांत्रिक युगमे लोको सब रोबोट बनि गेलै ,जकरामे कोनो संवेदना नै होइ छै ।नीक- बेजाए सोचबाक शक्ति नै होइ छै ।प्रतिस्पर्धाक दौड़मे जानि नै कते युवा मृत्युक माला पहिर लै छै ।छोट-छोट विपतिसँ डारा कऽ प्राण तियागि दै छै ।जानि नै कतऽ जा रहल छै ई देश ।जानि नै कहिया जागतै युवामे चेतना ।
(रोहितकेँ होश आबै छै ।ओ उठि कऽ ठाढ़ हुअ लागै छै ।मोनू सहारा दऽ कऽ उठबै छै ।)
रोहित- (चारू कात घूमि) की हम स्वर्गमे छी ? की हमरा संग पूरा समाज मरि गेलै ?
मोनू- (चिट्टी चाचा दिश घूमि ।) चाचा होश आबि गेलै ।देखियौ ,देखियौ ,हमर मीत बचि गेलै ।जी गेलै ।
(डाँक्टर बाबू आ चिट्ठी चाचा रोहित लऽग आबि जाइ छथि ।)
रोहित- हम मरऽ चाहै छी । हमरा किए जीएलें ।हमरा मरऽ दे ।
डाँक्टर बाबू- भगवान जीवन देलखिन जीबाक लेल ,मरबाक लेल नै ।जँ मरनाइ नीक बात रहितै तँ आइ दुनियाँमे एक्को टा मनुख नै रहितै ।सब स्वर्गवासी भऽ गेल रहितै ।जीवनमे सदिखन खुश रहबाक चाही ,मरबाक नै ।देखै छऽ ,तोहर केस तँ हमर आँखि खोलि देलक ,तोरा सन युवाक आँखि आब कहिया खुलतै ?जानि नै ।
रोहित- खुश ,कोना रहब खुश ।जीनगीमे जखन हारक सामना होइ छै तँ हँसी-खुशी ओहि हारक संग हेरा जाइ छै ,तखन मरनाइये नीक लागै छै ।
चिट्ठी चाचा- एक बेर हारि जेबाक मतलब ई तँ नै छै जे जीवन भरि लेल हारि गेलियै ।एकटा घोंघा बेर-बेर देवालपर चढ़ैत अछि ,बेर-बेर खसैत अछि ,मुदा हारि नै मानैत अछि ।लगातार प्रयास करैत अछि आ एक दिन ओ देबालपर चढ़िये जाइत अछि ।हारि कऽ जीतैमे जे मजा छै से और किछुमे नै ।
डाँक्टर बाबू- जे सब दिन जीतै छै ओ अपना-आपकेँ बलगर समझि लै छै ।ओकरा घमण्ड भऽ जाइ छै आ फेर ओ कहियो मेहनत नै करै छै ।मुदा जे सब दिन हारै छै ,ओ सब दिन मेहनत करै छै आ ओ जखन जीतै छै तँ विश्वविजेता बनै छै ।बुझलऽ ।
मोनू - अरे ,एकटा परीक्षामे फेल भेलासँ कोनो प्रलय नै आबि जेतै ।जीवनमे एखन कतेको परीक्षा बाँकिए छै । मनुखक जिनगीत दोसर नाम थिक परीक्षा ।मनुख कते परीक्षासँ भागत ।डेग-डेगपर एकटा नव चुनौती भेटै छै ।तेँ हिम्मर राख आ सब किला फतह कर ।
चिट्ठी चाचा- दू सए साल धरि प्रत्येक दिन ,प्रत्येक क्षण अंग्रेजसँ हम सब हारैत एलौं ।मुदा एक ने एक दिन जीत भेटबे केलै ।मनुखक जीवनमे हार जीत तँ चलिते रहै छै ।एहिमे आश्चर्यक कोन गप ? घबराइकेँ कोन गप ?
डाँक्टर बाबू- मनुखकेँ अपन सब हारसँ सीख लेबाक चाही ।अपन कमजोरी दूर करबाक चाही ,नै अनुतिर्ण भेलापर परेशान भऽ आत्महत्या सन खराप डेग उठेबाक चाही । अजुक युवाकेँ ई सोच दिमागसँ निकालऽ पड़तै जे कोनो काजमे फेल भेलाक बाद एकर समाधान मात्र आत्महत्या छै ।
चिट्ठी चाचा- रोहित । ई हार तोहर हार नै छलौ ।ई हार तँ ओ पैरवी बलाकेँ हार छलै जे तोहर ज्ञानक आगू हारि गेलै ।तूँ आब नव उर्जा संग ठाढ़ हो ,नव शक्तिक संग चोट कर ।तोहर विजय जरूर है ।कहाबत तँ सुनने हेबेँ , सए सोनारकेँ तँ एक लोहारकेँ ।एक ने एक दिन जिनगीक सब बाधा ,सब परीक्षा तूँ उतिर्ण हेबेँ ।
मोनू- हँ मीता ,तूँ एखनो जीतल छेँ ।सब दिन जीतल रहबेँ ।
रोहित- क्षमा करू ।माँफ करू ।हमर आत्मबल डोलि गेल छल ।हम भटकि गेल छलौं ।मुदा आब हम देबर मेहनत करब ।तखन धरि मेहनत करब जखन धरि ओ जीतल टाका आ पैरवी बलाक गालपर ई हारल विजेताक जीतक थप्पर नै पड़ि जाइ ।हम हमरा सन सब युवासँ कहऽ चाहब जे हमरा जकाँ आत्महत्या सन डेग किओ नै उठबू ।फेल भेलापर और बेसी जोशक संग जीतक मार्गपर आगू बढ़ैत चलू ।जीत भेटबे करत ।जाइ छी हमहूँ आब बेसी मेहनत कऽ अपन लक्ष्य धरि पहुँचब । हँ ,ई कहाबत सदिखन मोन राखब ,सए दिन सोनारकेँ तँ एक दिन लोहारकेँ ।
(मंचपर सब हँसऽ लागैत अछि आ धिरे-धिरे पर्दा खसऽ लगैत अछि ।)
समाप्त
अमित मिश्र
करियन ,समस्तीपुर
(मिथिला ,बिहार)
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