एहि रक्षाबंधक अहाँ सबके शुभकामनाक संग प्रस्तुत अछि हमर ई बाल गजल
बाल गजल-34
आ गै बहिन रानी हमर
आबेँ लऽ तूँ राखी हमर
भोरेसँ जोहै छी बाट
चानन लगा लाली हमर
कर आरती थारी सजल
अक्षत लगा चानी हमर
पेड़ासँ रसगुल्ला मीठ
भरि गेल छौ बाटी हमर
की देब टाका हम आइ
नै रूस गै रानी हमर
तोरे तऽ छौ साँसो हमर
रक्षा करब लाली हमर
मुस्तफइलुन-मफऊलात
2212-2221
बहरे-मुन्सरह
अमित मिश्र
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बुधवार, 21 अगस्त 2013
बुधवार, 20 मार्च 2013
कविता-जमाना बदल गेलै यै
बुचनू काका कहै छैथ .
जे भिखमंगा के देख
समझ अबै यै
ओकरा देह पर कपड़ा कम किएक छै ।
कारण ओ गरीब छै
नै किन सकै छै .
मुदा ई समझ नै आबै यै .
अमिरक देह पर कपड़ा कम किएक छै .
कारण पाइ के कमी त' नै भ' सकै यै .
आइ देखलौं त' लागै यै .
जे वर्षोँ सँ' अन्हार कोन मे बैसल छलौँ .
आइ बहरेलौँ त' देखै छी
जमाना बदली(Change) गेलै यै
{अमित मिश्र }
जे भिखमंगा के देख
समझ अबै यै
ओकरा देह पर कपड़ा कम किएक छै ।
कारण ओ गरीब छै
नै किन सकै छै .
मुदा ई समझ नै आबै यै .
अमिरक देह पर कपड़ा कम किएक छै .
कारण पाइ के कमी त' नै भ' सकै यै .
आइ देखलौं त' लागै यै .
जे वर्षोँ सँ' अन्हार कोन मे बैसल छलौँ .
आइ बहरेलौँ त' देखै छी
जमाना बदली(Change) गेलै यै
{अमित मिश्र }
रविवार, 17 मार्च 2013
सात समुद्र पार सँ
विहनि कथा--सात समुद्र पार सँ
मनोहर बाबू इलाका कए नामी डाँक्टर छलाह । बजार मे तीन तल्ला घर मे अपने , कनियाँ दू टा बेटा संग माँ-बाबू सेहो रहै छलथिन । अथाह रूपैया तेंए कोनो चिजक कमी नहि ।अपनो नव जमाना कए आ कनियो कलजुगी ,अपना मोनक मालिक छलनि । हुनक कनियाँ शरबत जकाँ घोरि क ' इ बात पिया देलकनि जे माँ-बाबू बिमार रहै छथि ,तेंए बच्चा कए इनफेक्सन भ' सकै यै , दोसर देखभाल करबाक लेल फुरसतो नहि अछि तेंए दुनू गोटे कए वृद्धा-आश्रम द' आबियौ । मनोहर बाबू सब बात माँ-बाबू कए कहखिन । तै पर बाबू नोराएल नैन सँ कहलनि ,"अपन संस्कृति इ आदेश नहि दै छै , हम कते दिन जीबे करब ,तोहर मूँह देखैत मरब त' शांती भेटत , हमरा संगे रह' दए , "
मनोहर बाबू जबाब देलनि ," जहिना अंग्रेजी ,पहिराबा , खान-पान , रहन-सहनसंग बहुतो रास तकनीक दोसर संस्कृती सँ आबि अपन भ' गेल , तहिना वृद्धा आश्रम भेजबाक संस्कृती अपनाब' परत किएक त' इ सात समुद्र पार सँ एलै यै ,एकरा छोड़ल नहि जा सकै यै "
दुनू प्राणी बेटा कए मूँह ताकैत सोच' लागलाह जे केहन जमाना छै लोक कोना बदलि रहल छै अपन संस्कृति कए सात समुद्र पार सँ . . . । ।
अमित मिश्र
शुक्रवार, 7 सितंबर 2012
bal gajal
भोरे-भोरे मुर्गा बाजै छै
सोना बौआ के उठाबै छै
नबकी बाछी दूध देतै
तीरो कक्का दूध दूहै छै
माँ देलनि चुसनि भरि
गुटुर-गुटुर पिबै छै
दूये दाँत के हँसै बौआ
आ हपकुनियाँ काटै छै
भरल कठौत पानि मे
बौआ नहाइ छै कूदै छै
पाउडर काजर ठोप्पा
नव कपड़ा चमकै छै
हाथी घोड़ा आ झुनझुना
"अमित" बौआ बजबै छै
वर्ण-9
**********************10*********************
डरकडोरि मे झुनझुना बड मीठ बाजै छै
जुता मे लागल पिपहू पीँ पीँ राग सुनाबै छै
तीन टंगा गुरकुन्ना धेधै बौआ घूमै अंगना
बकरी के बच्चा देखिते कूदि कूदि क' नाचै छै
भालू वला नाच देखाबै बौआ के दलान पर
दू टाँग पर नाचल भालू बौओ नाचि हँसै छै
भरि कटोरी दूध पिबै लेए ढंग ध' कानै छै
जखन पूछौँ नाम त' माएक नाम बताबै छै
नाचैत रहैए सब ललना एहि संसार मे
बोआ के हँसी देख "अमित" कलम चलाबै छै
वर्ण-17
शनिवार, 14 जुलाई 2012
बाल गजल
hamar ekhan dharik bal gajal
बाल गजल
****************************** ****************************** *
भनसा धर दिश दौड़लनि बौआ
अपन जलखइ माँगलनि बौआ
बीच आँगन मे ऊँच पिढ़ी लगेलाछरपला , डोलल खसलनि बौआ
देखलनि माँ के ठाढ़ हाथ फैलेने
चोट बिसरि कोरा बैसलनि बौआ
दादी एलखिन लेने बाटी बौआ के
दूध देख क' बाटी फेकलनि बौआ
बाबू खेलखिन मिरचाइ सोहारी
हुँनको चाही से जीद धेलनि बौआ
गेँद गुड्डा हाथी , देब मोटर कार
बहुते मनेलौँ नै मानलनि बौआ
संग मे जाएब घुमै लए सर्कस
"अमित" सँ चारि लड्डू लेलनि बौआ
बर्ण-13
****************************** *
सखी सब गेल लागल छैक रेला चल
चलेँ गै माइ घूमै लेल मेला चल
कहै छल सरबतीया सजल छै सर्कस
कुकुर बानरक देखै लेल खेला चल
कते छै भीड़ छोड़े नै पकड़ आँङुर
उठा ले अपन गोदी तखन मेला चल
स सीँ पू पीँ करत बड पीपही फूक्का
गुड़ीया कीन दे सब भरल ठेला चल
कने छै भूख झिल्ली देख लागल गै
गरम कचरी कने मुरही ल' केला चल
मफाईलुन[1222 तीन बेर सब पाँतिमे]
बहरे_हजज
************** ******************
कुकुर उनटल पड़ल लार पर
बंदरो बैसलै चार पर
मूस दौगै गहुँम भरल घर
कोइली तन दै तार पर
नादि पर गाय दै दूध छै
नजर देने श्रवन ढार पर
स्वागत लेल बौआ कए
फूल मुस्कै गुथल हार पर
भोर भेलै उठल राजा यौ
"अमित " बौआ चढ़ल कार पर
*दीर्घ _हर्स्व _दीर्घ ३ बेर*
बहरे -मुतदारिक
******************* ********************
आइ तारा केर नगरीसँ एथिन माँ
अपन कोरा झट द' हमरा उठेथिन माँ
खेलबै माँ संग आ रूसबै हँसबै
पकड़ि आँङुर गाम-घर मे बुलेथिन माँ
थाकि जेबै जखन भोजन करा हमरा
गाबि लोड़ी आँचरक त'र सुतेथिन माँ
राम कक्का के परू छैक मरखहिया
सुरज के बकरी सँ हमरा बचेथिन माँ
हमर संगी संग माँ के घुमै सर्कस
आबि घर हमरो सिनेमा ल' जेथिन माँ
कत' सँ एलै मेघ कारी इ अंबर मे
"अमित" मन डेराइ यै कखन एथिन माँ
फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
2122-2122-1222
बहरे-कलीब
******************** ********************
कोइली कहलकै सूगासँ
हम बड पैघ छी तोरासँ
सूगा कहलकै जुनि बाज
तोड़िये देबौ लोल रोड़ासँ
गाछी-बिरछी तूँ घुमै छहीँ
कारी रूप देख ले ऐनासँ
कोइली तुनकि क' बाजल
मीठ बाजै छी हम तोरासँ
हम घुमै छी अप्पन मोनेँ
बान्हल रहेँ तूँ पिँजरासँ
उठम-बजड़ा , धक्का -मुक्की
खूने-खूनाम भेल पैनासँ
मोर जी तखन कहलनि
नै ल'ड़ तूँ अपने भैयासँ
सूगा "अमित" राम गाबै छेँ
सीख ले कोइली गबैयासँ
वर्ण- 10
****************************** ******
माँटिक चाउर पानिक दूध पातक थारी बनेबै
माँटिक चुल्हि पर खीर राइन्ह तरकारी बनेबै
बालुक चिन्नी कादो के दही गेना फूलक चूरा हेते
घैलक चकुला सनठी के बेलना सँ पूरी बनेबै
मैया के फोटो आनि झूठ-मूठ के पूजा-पाठ करब
बाबी सँ एकरंगा माँगि कुमारि लेल साड़ी बनेबै
फेर करब गुड्डा के वियाह गुड़िया खूब सजेबै
साजि एतै बरियाती बाबा के लाठी के गाड़ी बनेबै
नै डर मास्टर के आइ छुट्टी छै चल मीता खेलब
आइ ''अमित'' नाचबै-गेबै बड़का खेलाड़ी बनेबै
वर्ण -१९
*********************** *******************
संग चल ने मिल क' सब खेल खेलेबै
एक दोसर के पकड़ि रेल देड़ेबै
कोइली के गीत बंदर नचेबै हम
चान तारा धरि पहुँचि आइ देखेबै
कागजक नैया बना फूल कमलक चल
चल बड़ी पोखरि भसा नाव नेहेबै
दीप माटिक गढ़ि क' सब देबता पूजब
रोपि अरहुल खेत मे चल पटा एबै
माँटि लोटाएब आ साँझ धरि खेलब
"अमित" पढ़बै मन सँ बड़का त' बनि जेबै
फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
बहरे-कलीब
******************* **************
बौआ एहिठाम कानै छै
माँ जलखइ बनबै छै
बाबा आनलनि टिकुला
बाबी चटनी बनबै छै
कक्का लगाबै छथि सानी
काकीयो अंगना नीपै छै
बलहा बाली पानि भरै
जुगेसरो चेरा फारै छै
पापा छथि परदेश मे
ट्रिन-ट्रिन फोन बाजै छै
दीदी पढ़' गेल इस्कुल
सोनू भैया खेत जोतै छै
सब लागल छै काज मे
तेँ "अमित" बौआ कानै छै
वर्ण-9
********************** *****************
भोरे-भोरे मुर्गा बाजै छै
सोना बौआ के उठाबै छै
नबकी बाछी दूध देतै
तीरो कक्का दूध दूहै छै
माँ देलनि चुसनि भरि
गुटुर-गुटुर पिबै छै
दूये दाँत के हँसै बौआ
आ हपकुनियाँ काटै छै
भरल कठौत पानि मे
बौआ नहाइ छै कूदै छै
पाउडर काजर ठोप्पा
नव कपड़ा चमकै छै
हाथी घोड़ा आ झुनझुना
"अमित" बौआ बजबै छै
वर्ण-9
****************************** *************
डरकडोरि मे झुनझुना बड मीठ बाजै छै
जुता मे लागल पिपहू पीँ पीँ राग सुनाबै छै
तीन टंगा गुरकुन्ना धेधै बौआ घूमै अंगना
बकरी के बच्चा देखिते कूदि कूदि क' नाचै छै
भालू वला नाच देखाबै बौआ के दलान पर
दू टाँग पर नाचल भालू बौओ नाचि हँसै छै
भरि कटोरी दूध पिबै लेए ढंग ध' कानै छै
जखन पूछौँ नाम त' माएक नाम बताबै छै
नाचैत रहैए सब ललना एहि संसार मे
बोआ के हँसी देख "अमित" कलम चलाबै छै
वर्ण-17
****************************** *****
आइ नौला* मे माछ चल मारब कने
जाल मच्छरदानी वला फेकब कने
बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै
ओकरो झोरी भरि क' चल आनब कने
माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ
डोलपाती चल संग मे खेलब कने
छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ
आब कखनो संसार नै बाँटब कने
एक छी हम सब एक थारी मे रहब
" अमित" नवका मिथिला अपन माँगब कने
फाइलातुन-मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन
2122-2212-2212
बहरे-हमीम
*नौला{पोखरि के नाम}
******************** *************
सूगाके आइ वियाह हेतै
मैना रानी कनियाँ बनलै
पेड़ा वर्फी और रसगुल्ला
पूरी सब्जी पलाऊ बनतै
कोइली बहिन गीत गेतै
जुगनू संगी बाँल्ब जरेतै
बंदर मामा ढोल बजेतै
मोर चाची झूमि क' नाचतै
हाथी दादा लड़का ल' जेतै
खरहा खूब बम फोड़तै
जंगल के सब बरियाती
भालू भैया सब के बैसेतै
शेर देतै आशीष "अमित"
गीदर सब मंत्र पढ़ेतै
सरल वार्णिक बहर
वर्ण-10
*****************************8
सखी सब चल तोड़ब आमके गै
सफेदा गाछपर फेकब झामके गै
बहै छै पवन केहन मीठगर छै मन
भयानक रौद जड़बै छै चामके गै
कने ले बरफ बोतल मे पानि भरि ले
करब वनभोज छै बड़का जामके गै
झहड़तै मारतै चोभा जखन कौआ
ठकै छै फेँकि ढेपा नव नामके गै
अपन झोरी भरल हेतै साँझमे गै
"अमित" कतरा कते हेतै दामके गै
मफाईलुन-मफाईलुन-फाइलातुन
1222-1222-2122
वहरे-करीब-
****************** *****************
पीठ पर छै बैग बौआ चलल इस्कुल
लाल पियर ड्रेस चमकै भरल इस्कुल
मांथ टोपी घेँट मे छै लंच लटकल
दाइ संगे चलल मोने रमल इस्कुल
खेल सेहो नीक खेलै छोट बौआ
वर्ग छै मैदान खेलक बनल इस्कुल
चित्र पाड़ै मे लगै छै मोन ओकर
मीठ झगड़ो पर त' खूबे हँसल इस्कुल
नै पहाड़ा पढ़ब नै सीखब ककहरा
आब छै कंपुटर सीखा रहल इस्कुल
भेल छुट्टी संग हल्ला घर चलल ओ
नाम जहिया "अमित" अपनो लिखल इस्कुल
फाइलातुन
2122 तीन बेर
बहरे-रमल
*****************************
माँ धरा मामा चान छै
सूर्य दादा नै आन छै
छै बिलाई मौसी चतुर
लैत मूसा के जान छै
कुकुर खेहारे चोर के
उड़ल चोरक त' प्राण छै
आम सब बनरा खेलकै
डाढ़ि तोड़ै शैतान छै
चलल हाथी जी ट्रेन चढ़ि
सूढ़ बड़का टा कान छै
बाघ छै हम सब छी तखन
शेर जंगाल के शान छै
फाइलातुन-मुस्तफाइलुन
2122-2212
दौरू कक्का दौरू काकी
देखू बौआ छीनै बाटी
दाँतो काटै केशो घीचै
मारै छै लेने ओ लाठी
चिन्नी लेतै चूरा लेतै
छाली लेए माँगै चाभी
दीदी छी तोरे रौ बौआ
तोरे लेए कीनै राखी
कोरा मे तूँ शोभै छेँ रौ
मानेँ खेबै संगे रोटी
आठ टा दीर्घ सब पाँति मे
अमित मिश्र
************************
बाल गजल
फूलल कचौरी छै मीठगर छै खीर
सुअदगर छै छोला छौँक मे छल जीर
रूसल किए सोना आब खेबै संग
जल्दी चलू खा जाएत कौआ खीर
टाँछी ल' इस्कूलो चलब खेलब पढ़ब
ओतौ अहाँ सन नेनाक लागल भीड़
छै लाल कक्काके लाल पाकल आम
जामुन खसल कारी , भेल कारी चीर
दिनकर अहाँ चन्ना राम आ लक्षमण
जीतब अहाँ माँछक आँखि मारू तीर
मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु
2212-2221-2221
बहरे-- सलीम
अमित मिश्र
************************8
बाल गजल
बौआ पानि बरसै कखन
फाटै जखन मेघक वसन
नाचै मोर बजबै ढोल
गाबै कोइली नव भजन
हरियर गाछ फूलाएत
देता रौद दिनकर जखन
खरहा तखन जीतत दौड़
आलस छोड़ि काजे मगन
छै एरोपलेनक आश
पढ़ि लिख लिअ त' चानो अपन
धरती के बसेलनि राम
भोरे भोर करियौ नमन
आँङुर पकड़ि बढ़बै डेग
राखू "अमित" खुजले नयन
मफऊलातु{2221} दू बेर सब पाँतिमे
अमित मिश्र
*********************
बाल गजल
उड़ल सबटा चिड़ैयाँ गाछपर फुर्रसँ
जँ बैसल चारपर चारो खसल चुर्रसँ
हमर गाड़ी लतामक डाढ़ि आ सनठी
चलै छै तेज अपने मुँह करै हुर्रसँ
गिलासक दूध मिसियो नीक नै लागै
भरल तौला दही आँङुर लगा सुर्रसँ
अपन बाछी अपन गैया त ता थैया
अपन झबरा करै अपनपर नै गुर्रसँ
फटक्का फूटलै ब्राम ब्रम ब्रूमसँ
जड़ै छै छूरछूरी छूर्र छू छुर्रसँ
मफाईलुन
1222 तीन बेर
बहरे हजज
अमित मिश्र
********************
बाल गजल
कारी महिस के दूध उज्जर छै कते
भरि मोन पारी पीबि दुब्बर छै कते
रसगर जिलेबी गरम नरमे नरम छै
लड्डू बनल बेसनक बज्जर छै कते
छै पात हरियर फूल शोभित गाछ छै
जामुन लिची आमक इ मज्जर छै कते
दू एक दू आ चारि दूनी आठ छै
अस्सी कते नै जानि सत्तर छै कते
भालू बला देखाब' सबके नाँच हौ
झट आगि छड़पै दौड़ चक्कर छै कते
बाल गजल
फाटले पहिरब भूखले हम रहब गै
माइ गै हम इस्कूल जेबे करब गै
महिस पोसब सब दिन चराएब साँझक'
बैस ओकर पीठपर पोथी पढ़ब गै
खेत जोतब कोरब पटाएब मोनसँ
मस्त पानिक धारा जकाँ हम बहब गै
चान के पूजै छै सगर लोक जग मे
नाम चमकाबै लेल चन्ना बनब गै
छीन ले खेलौना हमर ढोल डमरू
आब हम काँपी कलम बिन नै रहब गै
फाइलातुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2122-2212-2122
बहरे-खफीफ
अमित मिश्र
******************
बाल गजल
रानी मेघ सगरो जल पटाएत ना
बौआ हमर खेलत आ नहाएत ना
चलतै ढेह पानिक बीच सड़कपर ना
तै पर कागजक नैया बहाएत ना
देहसँ घाम चूबै रौद छै काल ना
हीटर आब तन के नै बनाएत ना
रोपत धान बैसल खेत के आड़ि ना
कादो करत पालो ह'र चलाएत ना
हेलत साल भरि पोखरि भरल पानि ना
बौआ "अमित" माँछक झोर खाएत ना
मफऊलातु-मफऊलातु-मुस्तफइलुन
2221-2221-2212
बहरे--कबीर
अमित मिश्र
&&&&&&&&&&&
बाल गजल
पाकल पियर पियर केरा
खाएत सब मीठ पेड़ा
खाजा मिठाई जिलेबी
बौआ भरल छै चगेँरा
मुँह मोर राजाक सुन्नर
चन्ना लजा गेल डेरा
डाँरक त' घुँघरु छनकलै
लेलक जखन घरक फेरा
माएक ओ करत सेबा
फाड़त "अमित" खूब चेरा
मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2212-2122
बहरे मुजस्सम
अमित मिश्र
बाल गजल
******************************
भनसा धर दिश दौड़लनि बौआ
अपन जलखइ माँगलनि बौआ
बीच आँगन मे ऊँच पिढ़ी लगेलाछरपला , डोलल खसलनि बौआ
देखलनि माँ के ठाढ़ हाथ फैलेने
चोट बिसरि कोरा बैसलनि बौआ
दादी एलखिन लेने बाटी बौआ के
दूध देख क' बाटी फेकलनि बौआ
बाबू खेलखिन मिरचाइ सोहारी
हुँनको चाही से जीद धेलनि बौआ
गेँद गुड्डा हाथी , देब मोटर कार
बहुते मनेलौँ नै मानलनि बौआ
संग मे जाएब घुमै लए सर्कस
"अमित" सँ चारि लड्डू लेलनि बौआ
बर्ण-13
******************************
सखी सब गेल लागल छैक रेला चल
चलेँ गै माइ घूमै लेल मेला चल
कहै छल सरबतीया सजल छै सर्कस
कुकुर बानरक देखै लेल खेला चल
कते छै भीड़ छोड़े नै पकड़ आँङुर
उठा ले अपन गोदी तखन मेला चल
स सीँ पू पीँ करत बड पीपही फूक्का
गुड़ीया कीन दे सब भरल ठेला चल
कने छै भूख झिल्ली देख लागल गै
गरम कचरी कने मुरही ल' केला चल
मफाईलुन[1222 तीन बेर सब पाँतिमे]
बहरे_हजज
************** ******************
कुकुर उनटल पड़ल लार पर
बंदरो बैसलै चार पर
मूस दौगै गहुँम भरल घर
कोइली तन दै तार पर
नादि पर गाय दै दूध छै
नजर देने श्रवन ढार पर
स्वागत लेल बौआ कए
फूल मुस्कै गुथल हार पर
भोर भेलै उठल राजा यौ
"अमित " बौआ चढ़ल कार पर
*दीर्घ _हर्स्व _दीर्घ ३ बेर*
बहरे -मुतदारिक
******************* ********************
आइ तारा केर नगरीसँ एथिन माँ
अपन कोरा झट द' हमरा उठेथिन माँ
खेलबै माँ संग आ रूसबै हँसबै
पकड़ि आँङुर गाम-घर मे बुलेथिन माँ
थाकि जेबै जखन भोजन करा हमरा
गाबि लोड़ी आँचरक त'र सुतेथिन माँ
राम कक्का के परू छैक मरखहिया
सुरज के बकरी सँ हमरा बचेथिन माँ
हमर संगी संग माँ के घुमै सर्कस
आबि घर हमरो सिनेमा ल' जेथिन माँ
कत' सँ एलै मेघ कारी इ अंबर मे
"अमित" मन डेराइ यै कखन एथिन माँ
फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
2122-2122-1222
बहरे-कलीब
******************** ********************
कोइली कहलकै सूगासँ
हम बड पैघ छी तोरासँ
सूगा कहलकै जुनि बाज
तोड़िये देबौ लोल रोड़ासँ
गाछी-बिरछी तूँ घुमै छहीँ
कारी रूप देख ले ऐनासँ
कोइली तुनकि क' बाजल
मीठ बाजै छी हम तोरासँ
हम घुमै छी अप्पन मोनेँ
बान्हल रहेँ तूँ पिँजरासँ
उठम-बजड़ा , धक्का -मुक्की
खूने-खूनाम भेल पैनासँ
मोर जी तखन कहलनि
नै ल'ड़ तूँ अपने भैयासँ
सूगा "अमित" राम गाबै छेँ
सीख ले कोइली गबैयासँ
वर्ण- 10
******************************
माँटिक चाउर पानिक दूध पातक थारी बनेबै
माँटिक चुल्हि पर खीर राइन्ह तरकारी बनेबै
बालुक चिन्नी कादो के दही गेना फूलक चूरा हेते
घैलक चकुला सनठी के बेलना सँ पूरी बनेबै
मैया के फोटो आनि झूठ-मूठ के पूजा-पाठ करब
बाबी सँ एकरंगा माँगि कुमारि लेल साड़ी बनेबै
फेर करब गुड्डा के वियाह गुड़िया खूब सजेबै
साजि एतै बरियाती बाबा के लाठी के गाड़ी बनेबै
नै डर मास्टर के आइ छुट्टी छै चल मीता खेलब
आइ ''अमित'' नाचबै-गेबै बड़का खेलाड़ी बनेबै
वर्ण -१९
*********************** *******************
संग चल ने मिल क' सब खेल खेलेबै
एक दोसर के पकड़ि रेल देड़ेबै
कोइली के गीत बंदर नचेबै हम
चान तारा धरि पहुँचि आइ देखेबै
कागजक नैया बना फूल कमलक चल
चल बड़ी पोखरि भसा नाव नेहेबै
दीप माटिक गढ़ि क' सब देबता पूजब
रोपि अरहुल खेत मे चल पटा एबै
माँटि लोटाएब आ साँझ धरि खेलब
"अमित" पढ़बै मन सँ बड़का त' बनि जेबै
फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
बहरे-कलीब
******************* **************
बौआ एहिठाम कानै छै
माँ जलखइ बनबै छै
बाबा आनलनि टिकुला
बाबी चटनी बनबै छै
कक्का लगाबै छथि सानी
काकीयो अंगना नीपै छै
बलहा बाली पानि भरै
जुगेसरो चेरा फारै छै
पापा छथि परदेश मे
ट्रिन-ट्रिन फोन बाजै छै
दीदी पढ़' गेल इस्कुल
सोनू भैया खेत जोतै छै
सब लागल छै काज मे
तेँ "अमित" बौआ कानै छै
वर्ण-9
********************** *****************
भोरे-भोरे मुर्गा बाजै छै
सोना बौआ के उठाबै छै
नबकी बाछी दूध देतै
तीरो कक्का दूध दूहै छै
माँ देलनि चुसनि भरि
गुटुर-गुटुर पिबै छै
दूये दाँत के हँसै बौआ
आ हपकुनियाँ काटै छै
भरल कठौत पानि मे
बौआ नहाइ छै कूदै छै
पाउडर काजर ठोप्पा
नव कपड़ा चमकै छै
हाथी घोड़ा आ झुनझुना
"अमित" बौआ बजबै छै
वर्ण-9
******************************
डरकडोरि मे झुनझुना बड मीठ बाजै छै
जुता मे लागल पिपहू पीँ पीँ राग सुनाबै छै
तीन टंगा गुरकुन्ना धेधै बौआ घूमै अंगना
बकरी के बच्चा देखिते कूदि कूदि क' नाचै छै
भालू वला नाच देखाबै बौआ के दलान पर
दू टाँग पर नाचल भालू बौओ नाचि हँसै छै
भरि कटोरी दूध पिबै लेए ढंग ध' कानै छै
जखन पूछौँ नाम त' माएक नाम बताबै छै
नाचैत रहैए सब ललना एहि संसार मे
बोआ के हँसी देख "अमित" कलम चलाबै छै
वर्ण-17
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आइ नौला* मे माछ चल मारब कने
जाल मच्छरदानी वला फेकब कने
बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै
ओकरो झोरी भरि क' चल आनब कने
माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ
डोलपाती चल संग मे खेलब कने
छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ
आब कखनो संसार नै बाँटब कने
एक छी हम सब एक थारी मे रहब
" अमित" नवका मिथिला अपन माँगब कने
फाइलातुन-मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन
2122-2212-2212
बहरे-हमीम
*नौला{पोखरि के नाम}
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सूगाके आइ वियाह हेतै
मैना रानी कनियाँ बनलै
पेड़ा वर्फी और रसगुल्ला
पूरी सब्जी पलाऊ बनतै
कोइली बहिन गीत गेतै
जुगनू संगी बाँल्ब जरेतै
बंदर मामा ढोल बजेतै
मोर चाची झूमि क' नाचतै
हाथी दादा लड़का ल' जेतै
खरहा खूब बम फोड़तै
जंगल के सब बरियाती
भालू भैया सब के बैसेतै
शेर देतै आशीष "अमित"
गीदर सब मंत्र पढ़ेतै
सरल वार्णिक बहर
वर्ण-10
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सखी सब चल तोड़ब आमके गै
सफेदा गाछपर फेकब झामके गै
बहै छै पवन केहन मीठगर छै मन
भयानक रौद जड़बै छै चामके गै
कने ले बरफ बोतल मे पानि भरि ले
करब वनभोज छै बड़का जामके गै
झहड़तै मारतै चोभा जखन कौआ
ठकै छै फेँकि ढेपा नव नामके गै
अपन झोरी भरल हेतै साँझमे गै
"अमित" कतरा कते हेतै दामके गै
मफाईलुन-मफाईलुन-फाइलातुन
1222-1222-2122
वहरे-करीब-
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पीठ पर छै बैग बौआ चलल इस्कुल
लाल पियर ड्रेस चमकै भरल इस्कुल
मांथ टोपी घेँट मे छै लंच लटकल
दाइ संगे चलल मोने रमल इस्कुल
खेल सेहो नीक खेलै छोट बौआ
वर्ग छै मैदान खेलक बनल इस्कुल
चित्र पाड़ै मे लगै छै मोन ओकर
मीठ झगड़ो पर त' खूबे हँसल इस्कुल
नै पहाड़ा पढ़ब नै सीखब ककहरा
आब छै कंपुटर सीखा रहल इस्कुल
भेल छुट्टी संग हल्ला घर चलल ओ
नाम जहिया "अमित" अपनो लिखल इस्कुल
फाइलातुन
2122 तीन बेर
बहरे-रमल
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माँ धरा मामा चान छै
सूर्य दादा नै आन छै
छै बिलाई मौसी चतुर
लैत मूसा के जान छै
कुकुर खेहारे चोर के
उड़ल चोरक त' प्राण छै
आम सब बनरा खेलकै
डाढ़ि तोड़ै शैतान छै
चलल हाथी जी ट्रेन चढ़ि
सूढ़ बड़का टा कान छै
बाघ छै हम सब छी तखन
शेर जंगाल के शान छै
फाइलातुन-मुस्तफाइलुन
2122-2212
दौरू कक्का दौरू काकी
देखू बौआ छीनै बाटी
दाँतो काटै केशो घीचै
मारै छै लेने ओ लाठी
चिन्नी लेतै चूरा लेतै
छाली लेए माँगै चाभी
दीदी छी तोरे रौ बौआ
तोरे लेए कीनै राखी
कोरा मे तूँ शोभै छेँ रौ
मानेँ खेबै संगे रोटी
आठ टा दीर्घ सब पाँति मे
अमित मिश्र
************************
बाल गजल
फूलल कचौरी छै मीठगर छै खीर
सुअदगर छै छोला छौँक मे छल जीर
रूसल किए सोना आब खेबै संग
जल्दी चलू खा जाएत कौआ खीर
टाँछी ल' इस्कूलो चलब खेलब पढ़ब
ओतौ अहाँ सन नेनाक लागल भीड़
छै लाल कक्काके लाल पाकल आम
जामुन खसल कारी , भेल कारी चीर
दिनकर अहाँ चन्ना राम आ लक्षमण
जीतब अहाँ माँछक आँखि मारू तीर
मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु
2212-2221-2221
बहरे-- सलीम
अमित मिश्र
************************8
बाल गजल
बौआ पानि बरसै कखन
फाटै जखन मेघक वसन
नाचै मोर बजबै ढोल
गाबै कोइली नव भजन
हरियर गाछ फूलाएत
देता रौद दिनकर जखन
खरहा तखन जीतत दौड़
आलस छोड़ि काजे मगन
छै एरोपलेनक आश
पढ़ि लिख लिअ त' चानो अपन
धरती के बसेलनि राम
भोरे भोर करियौ नमन
आँङुर पकड़ि बढ़बै डेग
राखू "अमित" खुजले नयन
मफऊलातु{2221} दू बेर सब पाँतिमे
अमित मिश्र
*********************
बाल गजल
उड़ल सबटा चिड़ैयाँ गाछपर फुर्रसँ
जँ बैसल चारपर चारो खसल चुर्रसँ
हमर गाड़ी लतामक डाढ़ि आ सनठी
चलै छै तेज अपने मुँह करै हुर्रसँ
गिलासक दूध मिसियो नीक नै लागै
भरल तौला दही आँङुर लगा सुर्रसँ
अपन बाछी अपन गैया त ता थैया
अपन झबरा करै अपनपर नै गुर्रसँ
फटक्का फूटलै ब्राम ब्रम ब्रूमसँ
जड़ै छै छूरछूरी छूर्र छू छुर्रसँ
मफाईलुन
1222 तीन बेर
बहरे हजज
अमित मिश्र
********************
बाल गजल
कारी महिस के दूध उज्जर छै कते
भरि मोन पारी पीबि दुब्बर छै कते
रसगर जिलेबी गरम नरमे नरम छै
लड्डू बनल बेसनक बज्जर छै कते
छै पात हरियर फूल शोभित गाछ छै
जामुन लिची आमक इ मज्जर छै कते
दू एक दू आ चारि दूनी आठ छै
अस्सी कते नै जानि सत्तर छै कते
भालू बला देखाब' सबके नाँच हौ
झट आगि छड़पै दौड़ चक्कर छै कते
बाल गजल
फाटले पहिरब भूखले हम रहब गै
माइ गै हम इस्कूल जेबे करब गै
महिस पोसब सब दिन चराएब साँझक'
बैस ओकर पीठपर पोथी पढ़ब गै
खेत जोतब कोरब पटाएब मोनसँ
मस्त पानिक धारा जकाँ हम बहब गै
चान के पूजै छै सगर लोक जग मे
नाम चमकाबै लेल चन्ना बनब गै
छीन ले खेलौना हमर ढोल डमरू
आब हम काँपी कलम बिन नै रहब गै
फाइलातुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2122-2212-2122
बहरे-खफीफ
अमित मिश्र
******************
बाल गजल
रानी मेघ सगरो जल पटाएत ना
बौआ हमर खेलत आ नहाएत ना
चलतै ढेह पानिक बीच सड़कपर ना
तै पर कागजक नैया बहाएत ना
देहसँ घाम चूबै रौद छै काल ना
हीटर आब तन के नै बनाएत ना
रोपत धान बैसल खेत के आड़ि ना
कादो करत पालो ह'र चलाएत ना
हेलत साल भरि पोखरि भरल पानि ना
बौआ "अमित" माँछक झोर खाएत ना
मफऊलातु-मफऊलातु-मुस्तफइलुन
2221-2221-2212
बहरे--कबीर
अमित मिश्र
&&&&&&&&&&&
बाल गजल
पाकल पियर पियर केरा
खाएत सब मीठ पेड़ा
खाजा मिठाई जिलेबी
बौआ भरल छै चगेँरा
मुँह मोर राजाक सुन्नर
चन्ना लजा गेल डेरा
डाँरक त' घुँघरु छनकलै
लेलक जखन घरक फेरा
माएक ओ करत सेबा
फाड़त "अमित" खूब चेरा
मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2212-2122
बहरे मुजस्सम
अमित मिश्र
सोमवार, 30 अप्रैल 2012
बाल गजल
सूगाके आइ वियाह हेतै
मैना रानी कनियाँ बनलै
पेड़ा वर्फी और रसगुल्ला
पूरी सब्जी पलाऊ बनतै
कोइली बहिन गीत गेतै
जुगनू संगी बाँल्ब जरेतै
बंदर मामा ढोल बजेतै
मोर चाची झूमि क' नाचतै
हाथी दादा लड़का ल' जेतै
खरहा खूब बम फोड़तै
जंगल के सब बरियाती
भालू भैया सब के बैसेतै
शेर देतै आशीष "अमित"
गीदर सब मंत्र पढ़ेतै
सरल वार्णिक बहर
वर्ण-10
अमित मिश्र
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