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रविवार, 3 जून 2018

अथ गाम कथा

3.18 अथ गाम कथा

एकटा पंडितक गाम छल ।इलाका भरिमे एतुका पंडिताइयक डंका बाजै छल ।कोनो शुभ काज होइ, पंडित ओहि गामसँ जाइ छलथि ।विद्वानक गामक रूपमे चिन्हल जाइ बला गाम दिनो दिन उन्नतिक शिखरपर चढ़ल जा रहल छलै ।सरस्वतीक असीम कृपा एहन छलै जे एकहकटा नवका पीढ़ी  विद्वाने निकलै ।किओ ककरोसँ कम नै ।एक बेर सभक इच्छा भेलै जे गाममे एकटा यज्ञ हेबाक चाही ।गाममे सरस्वती संग लक्ष्मी विराजथि तकरा लेल ई अनुष्ठान परम आवश्यक छल ।सभ ग्रामीणकेँ ई विचार पसीन पड़लै आ शुरू भ' गेलै ओकर ओरियान ।घरे घरे चन्दा भेल ।किओ घी गछलकै त' किओ तिल ।किओ हवनक लकड़ी देलकै त' किओ बाँस, खर ।दूध, चाउर, शक्कर सभक इंतजाम भ' गेलै ।हवन कुण्ड तैयार भ' गेलै । पूजन मंडप बनि गेलै ।अंतमे बात एलै पंडितपर ।पूजा के करेतै ? गामक नामी विद्वान सभ पतनुकान ध' लेलनि ।एना व्यवहार करअ लागलनि जेना हुनका किछु आबिते नै छै ।सभक सरस्वती मंद भ' गेल छलै ।कारण मात्र एकटा चिन्ता छलै ।चिन्ता ई छलै जे अपन गाममे दक्षिणा कोना क' लेब ? आ बिना दक्षिणाकेँ पूजा किए कराएब ? अंतमे विचार भेलै जे बाहरसँ पंडित बजाओल जाए ।सएह भेलै, एगारह टा अनगौआ अक्षरकट्टु पंडितकेँ बजाओल गेलै ।गामक लोक आ गामक जजमान सभ आश्चर्यमे पड़ल छलै ।नै रहल गेलै त' डेराइत-डेराइत एकटा जजमान गामक सभसँ पैघ पंडितकेँ पूछि देलकै," यौ पंडित जी, अहाँ सभ सन पैघ विद्वान पंडितकेँ रहने बाहरसँ किए बजेलियनि हिनका सभकेँ ?"
पंडित जी चतुराइमे कहलनि - नै बुझलियै, ई सभ बड पैघ विद्वान छथिन ।हिनका सभ लग हमर की मजाल जे एको टा मंत्र पढ़ि लेबै ।हिनका सभ लग गामक एकोटा पंडितक बकार खुलिए नै सकै छै ।"
जजमान माँथ नोचैत ओत'सँ चलि गेल ।एहि घटनाक असर ई भेलै जे गामक बाहर अरजल सभटा सम्मान रसे रसे कम भ' गेलै ।विद्वता रहितो बहरैयाकेँ लागअ लागलै जे गाममे विद्वानक कमी छै ।

सोमवार, 9 अप्रैल 2018

पुरना चाउर

3.17 पुरना चाउर

आइ जखनसँ मकान मालिक रेन्ट बढ़बैक बात केलकै तखनेसँ सुलेखाक माँथ दर्द क' रहल छलै ।एकटा मध्यम वर्गीय परिवार लेल शहरमे रहब कोनो हल्लुक बात त' नहियें छै ।2017 मे जखन घरपर भैयारीसँ झगड़ा क' शहर आएल छलै तखन रेन्ट मात्र पाँच हजार लागै छलै ।सुलेखाक पति सेहो प्राइवेटोमे 20-25 हजार कमा लैत छलै ।जिनगी मजामे कटै छलै ।दिनानुदिन बाल-बच्चा बढ़ैत गेलै आ तकरे संग बढ़ैत गेलै महगाइ, घरक खर्चा आ मकानक रेन्ट ।मुदा एकर वनिस्पत आमदनी नै बढ़लै ।प्राइवेटक काज त' फिक्स रेटपर होइते छै।मुदा खर्चा ...फिक्स थोड़े छलै।बोझ बढ़िते जा रहल छलै । स्थिति ई छै जे एखन जनवरी 2045 मे मकान बला सुना गेलै जे आब रेन्ट पचास हजार लागतै ।ई सुनितहिं सुलेखाक मोन भरिया गेल छलै ।की करी, की नै करी ?किछु फुराइत नै छलै ।खूब सोचि-बिचारि क' सुलेखा गामपर फोन लगेलक "दीदी, की करियै ?आब शहरमे रहनाइ आ एकर बोझ उठेनाइ  पहाड़ जकाँ लागि रहल छै ?"
बड़की दियादनी सभ बात बुझि गेलै ।साहस दैत कहलकै,"चिन्ता नै करू कनियाँ, सब किछु बेच देलाक बादो घरारी त' बचल अछि ।पुरना बात सभ बिसरि क' आबि जाउ ।सब दिनसँ पुरने चाउरक पथ पड़ै छै ।घरारी अहाँक बाट जोहि रहल अछि ।"
सुलेखाक आँखि नोरा गेलै ।फोन काटलक आ पैकिंगमे लागि गेल ।

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

दया

अझुका रचना- लघुकथा
3.16 दया

"जय जय सीताराम ।भगवान भला करताह ...यौ घरबारी बाबाकेँ किछु दियौ ।"साधु बाबाक स्वर सुनि मोहन घरसँ बहर एलै ।
"बाबा कत'सँ आबि रहल छी ।"मोहनक प्रश्न सुनि बाबा कने सोचमे पड़ि गेलाह ।एकटा नम्हर साँस छोड़ि कहलनि
"साधुक कोनो घरबार त' होइ नै छै ।कोन ठामक नाम कहब ।बस एते बुझू जे घुमन्तू छी ।"
"तैयो कतौ त' अहाँक अपन गाम हेतै !"
"हँ छलै, मुदा आब नै छै ।सब किछु खत्म भ' गेल ।"बाबाक मोन कने दुखित जकाँ भ' गेलै ।
"ओह !लागैए हम अनावश्यक गप शुरू क' देलौं ।ई कहु जे अहाँक की सेवा कएल जाए ।"
"किछु टाका-ताका द' दिअ ।पापी पेट जे ने कराबय ।"
"एकटा काज करू बाबा ...अहाँ हाथ-मुँह धो क' आउ भोजने क' लेल जाए कमसँ कम एक सप्ताह हमर आतिथ्य स्वीकार करू ।एहन कमजोर देह ल' कत' रौदमे बोआएब ?"
"जय सीताराम, भगवान अहाँकेँ औरदा दैथि बौआ ।अहाँ बड पैघ आदमी बनब ।अहाँकेँ धन-धान्यक अभाव नै रहत ।"
"से कोना कहि सकै छी ।ओ सब त' भगवानक हाथमे छै ।"
"हम अहाँक आतिथ्य देख कहि सकै छी जे अहाँक हृदय बड पैघ अछि ।अहाँकेँ बुढ़-बुजुर्गपर बड दया आबैत अछि ।जँ एकर दशांशो दया हमर बेटा सभकेँ रहितै त' आइ हम अहाँ ओहिठाम नै, अपन गाममे रहितौन ।" बाबाक आँखिसँ नोरक दू टा बुन्न बलुआह माँटिकेँ सिक्त क' देलकै ।

नजरि-गुजरि


3.15 .  नजरि-गुजरि

बौआकेँ देख क' बुढ़िया बाबी मने परदादी कहलनि-बौआ त' बड़ सुन्दर छै ।आँखि नम्हर आ गोल मुँह नीक लागै छै ।कने पएरक घुच्ची टेढ़ लागै छै बस।
घरसँ सुनैत नवकी परपुतौह मुँह बिचका रहल छलै ।कने काल बाद जखन घरबला एलै त' ओ मुँह लटका बैसल छलै ।घरबला बड मनेलकै त' बाजल- अहाँ जँ हमरासँ प्रेम करै छी त' बौआकेँ दादी कोरा नै जाए दियौ ।
"किए, की भेलै से ?"
"किछो भेलै ने मुदा भ' जेतै ।बुढ़िया बौआकेँ नजरियाबैत छलय ।"
"मुदा ..."
"मुदा तुदा किछ नै ।जे कहि देलौं सएह हेतै |नै त' हमरा नैहर द' आउ ।"
बेचरा घरबला किछु नै बाजि सकल ।मोनमे सोचैत रहल वएह बुढ़िया त' कबुला क' पोता माँगने छलै ।तखन ओ कोना....।

रविवार, 19 नवंबर 2017

कथीपर कानी?

214
कथीपर कानी ?

हम गाममे रहि खेती करैत छी आ हमर भाइ शहरमे सपरिवार रहि नोकरी करैत छथि ।एहि बेर छठिमे सपरिपार दिनकर-दिनानाथकेँ दुआरिपर हाजरी दै लेल आएल छलथि ।हमर छोटका बेटा आ हुनकर बौआ प्रिंस एकदतरिये छथि ।दुनू चौथामे पढ़ै छथि ।एक साँझ हम खेतक आरि-कोन ठीक क' आयलौं आ दलानपर बैसि कने सुस्ताइ छलौ त' दुनू भैयारीकेँ बतियाइत सुनलौं ।प्रिंस हमर बौआसँ पुछलक-"तोरा इसँकूलमे प्रेयर के बाद सर जी की सब करै छथुन ?"
हमर बौआ कहलक-"भनसियाकेँ चाउर-दालि-आलू सब दै छथिन ।"
प्रिंस आश्चर्य करैत बाजल-"से किए !...अच्छे क्लासमे सरजी नीकसँ पढ़बै छथुन ने ?"
हमर बौआ फेर जबाब देलक-"नै, हाजरिये बनबैमे आ हल्ला शांत करैमे बीजी रहै छथिन ।डेढ़ सौ विद्यार्थी छियै ने ।"
"ओह...लंच कते देरकेँ होइ छौ ?"
"दू घंटा ।छौ सौ बच्चा पाँतिमे खाइ छै ने ।"
प्रिंस आश्चर्यसँ आँखि नम्हर करैत बाजल-"बाप रे बाप, ई त' लंच नै भेलै, भोज भ' गेलै ।अच्छे तकर बाद की होइ छौ ?"
हमर बौआ खुश होइत बाजल-" तकर बाद छुट्टी होइ छै..कुट्टी काटै लए ।"
"एँ...मने खेल, ड्रॉइंग, म्यूजिक सब नै होइ छौ की ?"प्रिंस नाँक टेढ़ करैत बाजल जेना कि घृणा क' रहल होइ ।
"होइ छै ने ।भरि दिन त' क्लासमे खेलते रहै छी ।" बौआक जबाब सुनि प्रिंस कहलक-"मने तोरा इस्कुलमे पढ़ाइ छोड़ि बाँकी सब चीज होइ छौ ...हा ..हा..हा ।
प्रिंसक हँसी हमर छातीकेँ छलनी क' देलक ।हम सोचि नै पाबि रहल छलौं जे हम अपन गरीबीपर भोकारि पारि कानी वा अपन सरकारी शिक्षा व्यवस्थापर ?

अमित मिश्र

सोमवार, 10 जुलाई 2017

मैथिली लघुकथा-भार

213. भार

दुनू पक्ष आर्थिक रूपेँ कमजोर छल ।बियाहक मासे भरि बाद लड़काक बाबू आ लड़कीक बाबूमे घमासान तर्क-वितर्क शुरू भ' गेलै ।लड़काक बाबू समधिकेँ कहलनि-" सावन आबैसँ पहिने बिदागरी क' दियौन ।"
"रह' दियौ ने, एखन ओत' मोनो नै लागतै ।नव विवाह भेलैए, खेलै खेलाइक दिन छै एखन ।"
"ई त' केवल मोनक वहम छै ।मोन लागनि वा नै लागनि रहैक त' एतै ने छै ?"
"हँ से त' छैहे, मुदा सावनमे मधुश्रामनी होइ छै ।कने रमन-चमन होइ छै ।ई सब त' नैहरेमे नीक लागै छै ने ।"
"रमन-चमन करैसँ मतलब छै आकि पूजा करैसँ ? एतै पूजि लेथिन ।कोनो दिक्कत नै हेतै ।"
"यौ एखन पढ़ै छै ।ओत' जेतै त' ट्यूशन सब छूटि जेतै ।अहाँ त' बुझिते छी ने, इन्टर सबमे एक दिन ट्यूशन छुटलाक बाद आगू किछु समझ नै आबै छै ।"
"ओकर चिन्ता हमरो छै ने ।एत' कि ट्यूशन नै भेटै छै ? एतै ट्यूशन पकड़ा देबै ।"
"मुदा..."
"मुदा-तुदा किछ नै ।या त' बिदा क' दियौन आ नै जीवन भरि ओतै राखियौ ।कुटमैती आदमीक जरूरत पूरा करै लेल केने छलियै, कोनो मुँह देखै लेल नै ।"
समधिक एहि धमकीसँ लड़कीक बाबू मजबूर भ' गेलनि आ बिदागरी क' देलनि ।एक दिस नैहर, दोस्त आ पढाइ छुटि जेबाक कारणे पुतौह दुखी छलनि त' दोसर दिस मधुश्रामनीक भार दैक योग्य नै हेबाक कारणे बेइज्जत होइसँ बचि जेबाक लेल सासुरके खुशी छलनि ।

मैथिली कथा- नाइट ड्यूटी

212. नाइट ड्यूटी

गर्मी बहुत बेसी छलै आ तेँ एसियोमे नींद छुमंतर भ' गेल छलै ।रातिक 12 बाजि रहल छल ।लॉनमे टहलैत देखलियै जे सामने बला मकानसँ एकटा युवती बाहर निकललै ।कद-काठी देख आंदाज लागल जे ई शर्माक बेटी छै ।बड नीक पान बनबैत छै शर्मा ।एत्तै गलीक शुरूआतेमे एकटा कटघारा बैसेने छै ।ओहि दोकानसँ घरक किराया आ पाँच प्राणीक भोजन-साजन कहुना क' चला लै छै ।बड मिलनसार छै शर्मा आ तेँ हमरासँ खूब मेल बैसै छै ।एसगर जाइत देख कने आश्चर्य भेल मुदा फेर सोचलौं जे ट्रेन-त्रेन पकड़ै लेल जाइत हेतै ।हमरा ऐ सँ की !दू-दिन बाद फेर निन्न नै भेल आ लॉनसँ शर्माक बेटीकेँ फेर देखलियै ।मोन कने आशंकित भेल ।आब त' हम जबरदस्तियो जागि क' ओकरापर नजर राख' लागलियै ।ओ सब दिन नियत समयपर बनि-ठनि क' जाइ छलै ।बगलमे रेलवेक पुरना क्वार्टर छलै आ हवाहवाइमे सुनने रहियै जे ओत' गर्म माँउस किरायापर भेटै छै ।मोनमे घनेरो  प्रश्न उठि गेल ।शर्मा आ ओकर बेटी हमर नजरिमे खसि रहल छल मुदा असलियत जनबाक लेल हमर सी.आइ.डी मोन कछमछा रहल छल ।अगिला दिन ओकर पछोर ध' लेलियै ।रेलवे क्वार्टर पार भ' गेल ।ओकरा रोकि पुछबाक मोन होइ छल ,"गै छौड़ी एते राति क' कत' जाइ छहीं ?"
मुदा मंत्रमुग्ध भेल ओकरे पाछू भम चलल जा रहल छलियै ।ओ एकटा बड़का बिल्डिंग लग किछु पल ठार भेल ।अगल-बगल देख बिल्डिंगमे घुसि गेल ।ओकरे पाछू हमहूँ घुसि गेलौं ।बोर्डपर नाम देखलियै एयरटेल कस्टमर केयर ।जा किछु सोचितौं गार्ड हमरा रोकि लेलक ।हम भीतर जाइ लेल जोर लगाब' लागलौं ।जा धरि हमर चेतना घुरल ता धरि हो-हल्ला भ' गेलै ।आवाज सुनि लोक जुटि गेल ।हमरा देख शर्माक बेटीक कंठ सुखि गेलै ।ओ निहोरा कर' लागल "अंकल, हमर पापाकें किछु नै कहबै ।हम सबसँ नुका क' एत' पार्ट टाइम जॉब करैत छी ।घरक हालत हमरा नै देखल गेल ।गरीबीक जीवन बड दुखदाइ होइ छै ।प्लीज अंकल पापाकेँ नै कहबै ।"
हम शंकाक चलते लाजे धरतीमे धसल जा रहल छलहुँ आ  ओ रसे रसे ड्यूटी निभेबाक लेल सीढ़ी चढ़ल जा रहल छलै ।

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

मजबूरीमे

211. मजबूरीमे

घरमे वियाहक माहोल छल ।शहनाईक रेकॉर्डेड धुन बाजि रहल छल ।जिम्हरे देखू तिम्हरे हँसी-ठहक्काक स्वर उत्पन्न भ' रहल छल ।रेशमा स्थिर मुर्ती जकाँ मेंहदीक विध पूरा करबा रहल छली ।सखी सब ओकरा चारू कातसँ मधुमाँछीक छत्ता जकाँ घेरने छल ।चारि टा एक्सपर्ट हुनरबाज सखी ओकर दुनू हाथमे मेंहदीक डिजाइन बनाबैमे व्यस्त छल ।तखने एकटा सखि चौल करैत पुछलकै-"एँ गै पहुनक नाममे की लिखियौ जानू, डार्लिंग या स्वीटीपाइ ?"
"किछु नै ।पूरा नाम लिख दहीं अर्णव" रेशमा उदासे स्वरमे कहलकै ।
"मुदा तोहर मिस्टरक नाम त' आलोक छौ ने !"सखि आश्चर्यसँ आँखि पैघ करैत पुछलक ।
"हँ मुदा प्रेम त' हम अर्णवसँ केलियै ।मजबूरी आ दबावमे ई वियाह क' लेबै तकर मने ई त नै छै जे हमर मिस्टर राइटक नाम चेन्ज भ' जेतै ।"
रेशमाक जबाब सुनि सखि सबकेँ किछु नै फुरा रहल छलै जे मजबूरीमे लेल एतेक पैघ फैसलाक परिणाम कतेक दिन धरि मर्यादाक पालन क' सकतै !दाम्पत्य जीवनमे ई कतेक दिन धरि अमृत घोरबाक काज करैत रहतै !

रविवार, 2 जुलाई 2017

मैथिली लघुकथा - पहुँनाइ

210.
पहुँनाइ

छप्पनो भोग बना क' परसि देलाक बाद सरहोजि पुछलनि- एँ यौ मिसर सासुरमे नीक लागैत अछि ने ?
एहि प्रश्नक दोसर कोनो उत्तर त' देले नै जा सकै छल तेँ हम कहलौं जे, हँ हमरा नीक लागैत अछि ।
फेर सरहोजि कहलनि-घरपर माए एते व्यंजन बना क' त' नहिये दैत हेताह ?
हम कहलियनि जे नै, उहो बनबैत अछि मुदा जते खेबै ततबे ने ?ओहुना अहाँ जकाँ बनब' एतै तखन ने?
सरहोजि प्रसन्न भ' मुस्कान पसारि देलनि ।
हम मोने मोन कहलौं जे जँ घरोपर छप्पन भोग होइ त' लोक पहुनाइ किए करत !

रविवार, 8 जनवरी 2017

लप्रेक- अगत्ती

#लप्रेक- अगत्ती
- रौ बजरखसुआ, एना घंटी किए टुनटुनाबै छें रौ ?
-गै मुहफट्टी, एना ठिठियाइ किए छहीं गै ?
- हमर मुँह, हम कुच्छो करब तोहर बापकेँ कथी जाइ छौ रौ ?
- हमरो घंटी, हमर मर्जी, तोहर बपहियाकेँ कथी जाइ छौ ?
- हे बेसी मुँह नै लगा, नै त' मुँह नछोरि लेबौ ।तोरा बुझल नै छौ जे घंटी सुनि हमर मोन कोनादन कर' लागै छै ।
- तोरा बुझल नै छौ जे तोरा मुस्कैत देख हमर करेजा धकधकाए लागै छै ।
- रे जोनपिट्टा सरधुआ, तोहर कहैक कथी मतलब छौ ?
- गै हुरहुट्टी, हमर वैह मतलब छै जे तोहर मतलब छौ ।
- त' बकौर लागल छौ की ? साफ साफ नै बोलि होइ छौ ?
- तूँ किए नै बाजै छहीं ? तूँ की भगवत्ती बनबहीं ?
- तूँ कहबहीं त' अगत्ती बनि जेबौ ।
- बनि जो ।
- भक् ।

लप्रेक-बन्धन

#लप्रेक- बन्धन
-एकटा बात पुछौं अहाँसँ ?
- हँ यै सजनी, एकटा किए, दस टा पुछू ।
- ओना त' हमर-अहाँक बन्धन जनम-जनम धरि जुड़ल रहत मुदा जँ अगिला जनममे हम मनुख बनि गेलियै आ अहाँकेँ मनुखक योनि नै भेटय तखन की करबै ?
- तखन...तखन किछु और बनबै ।
- तखन की बनबै ?
- तखन हम कपासक गाछ बनबै ।
- से किए ।
- ऐ लेल जे तखन हम धागा बनि अहाँक कपड़ामे सजि क' सदिखन अहाँ संग आलिंगनवद्ध रहब ।
- भक् !

लप्रेक- नया साल

#लप्रेक - नया साल
- ओह, कने काल और सुतू ने ।एखन अन्हारे छै ।एतेक भोरे ऊठि क' कोन पहाड़ तोड़बै !
- दुर जाउ, सदिखन अहाँ मजाखे करै छी ।सुतबै त' चुल्हा के फुकतै ?
- एँ ! चुल्हा...आइ की छै जे चुल्हाक चक्करमे जाइ छी ?
- जाउ, अहाँ सब दिन बुड़बके रहि गेलौं ।यौ आइ नया साल छै, नया साल ।
- गोली मारू एहन नया सालकेँ ।अहाँ संग कोनो दिन पुरान थोड़बे बुझाइ छै ।नीन खुलै आ अहाँक सुन्दर मुँह आँखिक आगू आबि जाइ आ अहाँ नन्हकी मुस्की द' करेजासँ साटि लेब।बस ओ दिन हमरा लेल नये साल जकाँ बिततै ।
- भक्, अहूँ ने भोरे-भोरे बौरा जाइ छी ।

शनिवार, 31 दिसंबर 2016

नोटबंदी

-रौ बहिं, मलिकबा अन्हराकेँ हाइकोट देखबै छलै ।
- की भेलौ से ?
- की कहियौ, आइ गजब भ' गेलै ।पिछला सब वकाया द' बोनस सेहो देलकै...मुदा...
-मुदा की ?
-बदलामे अपन दू किओ सोना गाम ल' जा क' नुकाबै लेल कहलकै ।ओ त' बुझलकै जे हम किछु जानिते नै छीयै ।हम मना क देलियै ।
- नीक केलें ।तें ने एकरा सबपर नोटबंदीक असर नै पड़लै ।गरीब-गुरबाकें बहला-फुसला क' ई चोर सब बचि जाइ छै आ हम सब पकड़ा जाइ छी ।
- जे ने कराबय नोटबंदी ।

गिफ्ट

- यै, नया साल आबि गेलै ।कहू ने की गिफ्ट लेब ?
- दुर जाउ, इहो कोनो माँगि क' लेल जाइ छै ?
- नै, तैयो कहू ने ।
- जे अहाँकेँ मोन होइ |
- हमरा त' चान-तरेगण सब द' दैके मोन होइ छै मुदा अहाँ की लेब से पता नै ने छै ।अहीं कहू ने प्लीज ।
- और किछु नै, बस अहाँ चाही ।

गुरुवार, 9 जून 2016

लप्रेक

- हाइ रे दैवा, आइ मरदाबा साँझे कोना आबि गेलै !
- हे गै आइसँ दारू बन्द भ' गेलै ने तेँ...
-ले बलैया, ई सरकरबो हमरे टेंशन बढ़ा देलकै ।एकरा कतौ पीने बिना रहि हेतै जे ।
-तेँ ने आइ जल्दीए तोरा लग आबि गेलियौ गै ।
-हम कोनो दारू रखने छीयौ जेँ तोरा पिया देबौ ।
-त' तोरा मने की ।तोहर पिरेममे जते निशा छै तते सार ई दारूओमे कहाँ छलै ।देखलहीं ने झख मारि क' तोरे लग आब' पड़लै ...आ ने कने पिरेम क' लै छीयै...धियापुता बड पैघ भेलौ..एगो टेहलुक चाही कि ने ।
-मार बाढ़नि ।सत्ते मरदाबा बौरा गेल छै ।आर-दर बाजि रहल छै ।
ई कहिते कहिते मौगियाक श्यामला गाल ललिया गेल छलै ।

बुधवार, 8 जून 2016

डर

209. डर

बड खराब मौसम छलै ।पारा 45℃ पार क' चुकल छलै ।रघुनाथ एसी कारसँ बाहर निकल कन्सट्रक्सन साइटपर पहुँचल ।लंचक समय छलै तेँ ओत' एक्का-दुक्का मजदूर सब छलै आ छलहियो से लंचक भाद आराममे  छल ।रघुनाथ आइ भेल सब काजकेँ देख रहल छल ।जखन गोदाममे गेल त' देखलक जे एकटा अधवयसु मजदूर असगरे ट्रकसँ सिमेंटक बोरा उतारि क' गोदाममे राखि रहल छल ।ओकरा देख रघुनाथके कने आश्चर्यो भेलै आ तेँ पूछि देलक-'अरे तूँ लंचपर नै गेलहीं ।
-नै साहेब,सोचली जे खाना त' घरोपर हेतै ताले कने काजे क' लै छिकियै ।' घामक बुन्न आंगुरसँ पोछैत ओ जबाब देलक ।
- एना कोना काज चलतै ।बिन खेने ऐ गर्मीमे तूँ नै सकबिहीं ।जो ने जखन कंपनी सबकेँ खाना दै छै त खाइमे कोन हर्ज छौ !
-छोड़ि दियौ मालिक ।एक लोटा पानि पीब लेलियै एखने ।ओनाहितो त' लंच टाइम समाप्ते भ' गेल छिकै ने ।
- नै नै, ई सब नै चलतौ ।टाइम खतम भ' गेलै तैसँ की? चल तोरा हम खाना मँगा दै छियौ ।
मजदूरक हाथ-पैर बुझू जे फूलि गेलै ।ओ टस-से-मस ने भेल ।जखन रघुनाथ बेसी तमसेलै त' ओ डेराइत बाजल- मालिक हम खाना टिफिनमे ल' लेने छीयै ।घर ल' क' चलि जेबै ।
- से किए रौ ।खेलहीं किए नै ।
- मालिक धिया-पुता लेल ल' जेबै ।ओकरा आरकेँ दालि-भातक दर्शनो नै ने होइ छै ।असल बात त' ई छिकै मालिक जे दालि-भात हमरो नीक लागै छै ।सोचै छिकियै जे एखन छौड़ा आरकेँ खुएबै तखने ने हमरा बुढ़ारीमे दालि-भात खुएतै ।बुढ़ारीमे गंजन नै होइ ताहि डरे भुखलो रहि धिया-पुताकेँ नीक-नीकुत खुबै छिकियै मालिक ।
रघुनाथक आँखि डबडबा गेल छलै ।

मंगलवार, 7 जून 2016

सारा परक तुलसी

208
सारा परक तुलसी

- बाबू अपन कलम बाग बेच दहक ।
-से किए रौ ?
-हमरा टाकाक खगता अछि ।दरभंगामे 30 लाखक कट्ठा जमीन द' रहल छै सएह किनबैं ।
- एँ रौ, अपने रहै छें दिल्ली आ जमीन लेबें दरभंगामे !एना किए ?
- हौ बाबू, तूँ सब किछ नै बुझै छहो ।ओत' घर बना भाड़ापर लगा देबै ।बड प्रॉफिट छै एहिमे।
- वाह रे , कहबी छै ने जे पूत कपूत भयो त' कालक डर गयो ।गाममे हवेली भकोभण्ड पड़ल छौ आ शहरमे फाइबस्टार ठाढ़ करता बुड़िबान नहितन ।कियो सारा परक तुलसी उपाड़ि आंगनमे रोपलकैए जे तूँ सोचि लेलहीं ई सब ।
- ई की सारा- तारा सब बकि रहल छहो ।किछ माँथमे नै घुसलै ।
- ते ने तोरा बकलेल कहै छीयौ ।गाममे अरजल सम्पतिकेँ मरघट पहुचा क' शहरक रमन-चमन किनब नीक बात नै ।आबि जो अपन माँटिपर ।मरनासन्न पड़ल ई बाप आ एतुका सम्पतिपर उगल अशा रूपी तुलसीकेँ जुनि उपाड़ ।

गुरुवार, 19 मई 2016

एग्जाम

लप्रेक-18

- गै आइ मोन कोनादन क' रहल छौ ।करेज धकधकाइ छौ ।
- हाय रे दैवा, किछ भ' त' तँ नै ने गेलौ तोरा ?डाकडर लग चल ने ।
- नै नै, ऐमे डाकडर किछु नै क' पेतै ।ई सब रिएल्ट फोविया छै ।आइ मैट्रिक क रिजल्ट एतै ने तें डरे ठोर सुखाइ छै ।
- हँ रै, ई डर त' हमरो लागल छै ।एतै टाइट परीक्षामे की हेतै, से नै जानि !...खैर छोड़, एगो आइडिया छै ।
- की ?
- जँ तूँ पास हेबें त' हम तोरासँ वियाह क' लेबौ आ जँ हम पास करबौ त' तूँ हमरासँ वियाह क' लिहें ।आखिर घरमे कियो त' शिक्षित होइक चाही !
- आ जँ दुनू फेल क' जेबै त' ?
- मार बाढ़ैन सर्वा रिजल्टकेँ ...प्रेममे हमहीं दुनू एग्जामिनी आ हमहीं दुनू एग्जामनर छीयै ।ककर मजाल छै जे पास करैसँ रोकि लेतै ?

अमित मिश्र

समाजक सोच

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समाजक सोच

राति लगभग बारह होइत हेतै ।गर्मीसँ लोकक हालत पस्त भेल छलै कि टोलक पुबरिया भागसँ हल्ला उठलै ।कोनो अनहोनीसँ छाती धकधक क' रहल छल ।बातो तेहने छलै ।रमरेखबाकेँ अधसर डसि लेने छलै ।ओ छटपटा रहल छल ।जुआएल अधसर कानेमे अपन दाँत गड़ेने छलै ।ओकर हालत देख हम झटपट डॉक्टर लग ल' चलबाक लेल जोर केलहुँ ।हमर एहि बातक टोलक बुढ़ सब विरोध केलनि ।आनन-फाननमे भगतकेँ बजाओल गेल ।विषहरि थानमे रमरेखबाके सुता देल गेल आ आनधुन चाटी चल' लागल ।रेमरेखबा चिचियाइत रहल जे हमरा जल्दी सुइया दियाब'....डॉक्टर लग ल' चल' मुदा ओकर बात सुनै बला के छलै !मनरिया सब झुमैर गआबैत रहल आ भोर धरि रमरेखबाक गोर देह नील वर्णक भ' गेल ।चाटी चलिते रहल आ ओ चेतनाशून्य भ' गेल छल ।हमर आँखिसँ नोर बहि रहल छल आ मोन पड़ि रहल छल ओकरे कहल बात - भाइ, भले लोक चान धरि पहुँचि गेलै मुदा समाजक सोच बदलैमे एखनो सैकड़ो बर्ष लागतै ।

बुधवार, 11 मई 2016

लप्रेक - रिजल्ट

लप्रेक- 17
रिजल्ट

-बसुन्धरा एगो बात कहियौ ?
- एगो किए !तूँ दस टा बाज ।
- बात ई छै जे समटाइम आइ विकम सरप्राइज देट तोरा लेट नाइट पार्टी करैमे फीयर-बियर नै लागै छौ ?
- ले बलैया, ऐमे डरैक कोन बात छै !
- बिकॉज नाउ ए डेज इन बिग सीटी..की कहै छै एसगर लड़कीकें घुमनाइ बड डेंजरस छै ने ।
-धत्त तेरी के...हम बुझलियै कोनो पैघ बात छलै ।ई त' 100% बोरिंग प्रश्न छौ ।
-ओह...आइ एम वेरी सिरियस यार ।सब ठाम मना कएल जाइ छै तखन फेर...
- अरे जखन तूँ संग छहीं तखन फेर डर कथीक ।तोरा रहैत किओ छूबि क' त' देखौ ।जस्ट चिल यार...हाथमे हाथ पकड़ आ चल लॉग ड्राइवपर ।

#अमित मिश्र