प्रिय पाहुन, नव अंशु मे अपनेक हार्दिक स्वागत अछि ।
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मंगलवार, 23 मई 2017

रूबाइ

हमर आँखिमे सपना अहाँ केर छै
हमर दिलपर गोदना अहाँ केर छै
हम अहींक पूरक जकाँ छी प्रिय
हमर भागमे विधना अहाँ केर छै

बुधवार, 15 जनवरी 2014

rubai

161
नैनक ऐनामे हमर प्रतिविंव बनाउ
मोनक कोनामे प्रीतक फोटो सजाउ
जा धरि धरती रहत हम-अहाँ संग रहब
ऐ सर्टिफिकेटपर चलू औंठा लगाउ

बुधवार, 8 मई 2013

रुबाइ

रुबाइ-169

तूँ प्रेम करै छें वा जादू- टोना
तूँ मोहलें करेजक सबटा कोना
हम तेजब प्राण अहुरिया काटि, सुन
बनबें जँ नै अमितक आँगनक सोना

गुरुवार, 2 मई 2013

रुबाइ

रुबाइ-168

दस बर्षक नेना काज करै होटलमे
भोजन लेल बीछै कचरा फेकलमे
मजदूरक लेल दिवस की आ राति की?
सदिखन दर्दक समय जिनगी घोकलमे

सोमवार, 18 मार्च 2013

रुबाइ-167

रुबाइ-167


आरोप लगा रहलै एक दोसरपर

देखै कहाँ छै किओ अपन टूटल घर

उड़बै हँसी सब दोसरक टेटर देख

ककरो सुझै नै लोढ़ी सन निज टेटर

शनिवार, 16 मार्च 2013

रुबाइ-166

रुबाइ-166


झूकल आँखि एना करेज ढहल जेना

दुख गेलौं बिसरि अनमन बनलौं नेना

नेहक शरबतक सुआद जे बता देलौं

मिझबै छी पियास आब जेना-तेना

रुबाइ-165

रुबाइ-165

तोड़ी पियर पसरल सगर बाध अनन्त
मोनक उपवन धरि धूरि एलै बसन्त
नव रंग संग खेल रहल होली वसुधा
हे राम नै होइ कखनो नेहक अन्त

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

रुबाइ

रुबाइ-164

सोचैत सोचैत किओ देह गलबै छै
बिनु सोचने किओ सब टा काज करै छै
सूरज जकाँ अपन मरजीसँ आबै सोच
ककरो अधिकारमे तँ नै रहि सकै छै