प्रिय पाहुन, नव अंशु मे अपनेक हार्दिक स्वागत अछि ।
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शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

तीन रंगक तिरंगा

tin rangak ptaka fahra deb aakash me ,
ta dhari ladab jadhari takat achi swas me ,
nuka gela maa babu ekhne bani lash me ,
jan par khel rok lagelaun dusmank vikash me ,
kaniyan bha geli bidwa ,
muda khush chaith ujjar liwasg me ,
aae aajadi bheta gelai ,
dharti sajal jena madhumas me . .
aaee 2012 me fer se gulam chi ,
bhrastachar ghoskhori dahejak aash me ,
chori apharan bam dhamaka
fasal achi sab lachari k fash me ,
kahiya bhetat aajadi k ladat ,
ched bha gel "AMIT" hamar viswash me .

    HAPPY REPUBLIC DAY. . . JAI JAI BHARAT MAA. . . .JAI JAI VIR SAHID . . .

          AMIT MISHRA

हैप्पी गणतंत्र दिवस


नव मशीनक युगमे बाजू, निकलत कोना काग
डीजे छोड़य तान एते जे बिसरि गेल सब राग

हिया बीचमे जहर भरल, तेँ तऽ शब्द कटाह
ककरा संगे हाथ मिलत, सब के सब मरखाह

स्वपीड़ाकेँ भोगि लिअ, आनक सुखकेँ छोड़ि
नै तऽ धधरा उठत हिया, मारत मूड़ी मचोड़ि

****&&*
लड़लौं मरलौं दाबल गेलौं, भेलौं हम स्वतंत्र आइ
हाथमे झंडा दैत सलामी, हर्षित सभक अंग आइ
टूटल बेरी भारत माँक, नोर सुखाएल सभक
अपन शासक अपन कानून, भेल छलौं गणतंत्र आइ

गणतंत्र दिवसक हार्दिक शुभकामना
********

आँखि मे खून आनि लेने छै
फौलादी छातीकेँ तानि लेने छै
देशक रक्षा लेल देशक बेटा
माँथ मे कफन बान्हि लेने छै

आगि मे तपि क सोना चमकि रहल
तहिना दुश्मन हनन लेल ललकि रहल
सोन चिड़ैयाँ भारत विश्वक मौर बनत
भारतक माटि मे तेँ आगि धधकि रहल

Happy गणतंत्र दिवस

बुधवार, 20 जनवरी 2016

नव वर्ष

नव वर्ष नव उमंग
. नव जीवन नव तरंग
. शुभ हो हर एक क्षण
. इस विश्व का हर कण -कण
. कामना है इस नई सुवह में .
आपस मेँ भाईचारा हो
. प्रेम से बना घर हमारा हो
. बड़ो का हम करे सम्मान .
पापियोँ का हो काम तमाम .
अमिय वचन हर क्षण बोलेँ .
तम भरा दिल न खोलेँ .
विश्व का सिरमौर बने .
शीतल पवन सा मदमस्त चलेँ .
"अमित" आपस मेँ हाथ बढाएगे .
हर दिल मे खुशीयाँ लाएगेँ

बुधवार, 6 जनवरी 2016

Monak bat

आजुक जतरे खराब छल ।भोरेसँ माँथ दर्द क' रहल अछि ।भरि दिनक मंथनक बाद निस्कर्ष भेटल जे टिचिंग सबसँ खराब प्रोफेशन छै ।आइ काल्हि आदर्श बननाइ, निःस्वार्थ भावसँ शिक्षा देनाइ आ छात्रकेँ नीक बाट देखेनाइ बड पैघ अपराध अछि ।आब शिक्षाक सेहो राजनीतिकरण भेल अछि तेँ एहि फिल्डमे ठग बनब परम् आवश्यक अछि ।आब मास्टर मुर्ख आ छात्र बुधियार भ' गेल अछि ।एहि फिल्डमे किछु नीक करब त' मारि होयत, असहनिय आलोचना होयत, आ जँ नै सकब त' फिल्ड बदलि लिअ ।आब एत' कोनो योजना नै, मानसिक प्रताड़ना चलै छै ।एहि प्रोफेशनमे शिक्षित करबाक कोशिश केनाइ, मने उक्खरिमे मूड़ी देनाइ ।आब सत्ते एहि लाइनकेँ छोड़ि देबाक मोन होइये ।राजनीति देख घृणा उत्पन्न भ' गेल अछि ।रियली फिलिंग सैड .....
                    हम सब तुच्छ प्राणी छी मीत, ई शोहरत अहींकेँ मुबारक ।एहि राजनीतिक फिल्डमे धन्यवादक पात्र छी अहाँ ।धुर्तैमे ठठै बलाकेँ अपन प्रतिद्वंदी बनाउ ।आइ वान्ट टू लिभ लाइक ए नॉर्मल क्रियेचर .....

शनिवार, 25 अप्रैल 2015

फूटल शिक्षा पात्र


मारा-मारी गारा-गारी
पान मसाला दारू-ताड़ी
पीब रहल अछि छात्र
फूटल शिक्षा पात्र

भोजनमे गुणवत्ता ताकय
चाहे शिक्षा पाछू भागय
टाका लेल इस्कूल आबय
एको घंटा रहि नै पाबय
मोवाइलक संगे छात्र
फूटल शिक्षा पात्र

सोमवार, 19 जनवरी 2015

दैनिक भास्कर मे छपी आलेख- कल की भी सोच कवि


बच्चे देश के भविष्य हैं और इसे सँवारना एक साहित्यकर का प्रथम कर्तव्य है  हर जगह वयस्क साहित्य देखने को मिलता है परन्तु बाल साहित्य...नहीं के बराबर ।जरा सोचें यही बच्चे तो कल के भविष्य हैं ।इन्हे साहित्य का चस्का लगाना जरूरी है, खास कर क्षेत्रिय साहित्य का ।क्षेत्रिय भाषाओं को दिर्घायु बनाने के लिए उस में भरपूर बाल साहित्य का होना बहुत जरूरी है ।यदि बच्चे इन भाषाओं को छोड़ कर अन्य भाषाओं को सीखने लगे तो कुछ सौ वर्षों के बाद उस क्षेत्रिय भाषा का पतन निश्चित है ।आखिर पीढ़ी दर पीढ़ी भाषाओं का वाहक यही बच्चे तो हैं ।
इसका प्रत्यक्ष उदाहरण साहित्य समृद्ध भाषा मैथिली है जिस में बाल साहित्य नगण्य है ।भले हीं सैकड़ों साहित्यिक किताबें प्रतिवर्ष छपती है परन्तु स्थिती यह है कि मैथिल बच्चे मैथिली शब्द से अपरिचित होते जा रहे हैं ।हालाँकि विगत कुछ वर्षों में बाल रचनाएँ रची गई है फिर भी यह बच्चों से दूर है ।बाल साहित्य को समृद्ध करने के लिए अब युवाओं को आगे आना होगा ।युवा अभी बचपन से अधिक दूर नहीं गये हैं अतः उनके लिए यह सहज होगा ।कुछ मित्र बाल साहित्य लिखना कठिन मानते हैं पर यह सिर्फ वहम है ।डेढ़ सौ से अधिक बाल कविता रचने के क्रम में मेरा अनुभव है कि आप बच्चों के जितने नजदीक होगें, बाल साहित्य उतने हीं रुचिकर रच पाएँगें ।इतना हीं नहीं आपके लिखने से बच्चों में भी साहीत्य लेखन की ललक पैदा होगी ।प्रयोग के तौर पर पिछले वर्ष से मैं अपने वर्ग-कक्ष में बाल-कविता परोसता हूँ ।अभी हाल यह है कि कुछ बच्चे भी तुकबंदियाँ करने लगे हैं ।आप कोशिश तो करें, सफलता अवश्य मिलेगी ।मेरी माने, बाल-साहित्यकार बनना फायदे का सौदा है - एक तो बच्चों का प्रेम मिलेगा ।दूसरा आप कभी बूढ़े नहीं होगें ।आपका बचपन हमेशा आपकी रचनाओं में उछल-कूद मचाता रहेगा ।
साहित्यकारों से अपील है कि कलम उठायें, अपने बचपन में झाँकें, बाल मनोविज्ञान को पहचाने, सोचें और एक उम्दा बाल साहित्य रच दें ।साथ हीं बचपन की मस्ती को याद कर कहें -
''रहमत हो तो मुझ पे ऐसा हो
जवानी भी बचपन जैसा हो"


शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

नवगछुलीक प्रांजल सरस रसाल: नव अंशु

नवगछुलीक प्रांजल सरस रसाल : नव अंशु

भावक स्पष्ट प्रवाहक बहन्ने साहित्यमे पद्य विधा अतुकांत रूपेँ पसरि रहल अछि ।पद्य विधाक विकास हेतु एकर अनिवार्यता भने देखऽमे आबय मुदा वर्तमान पद्य चिरकालिक आ कतिपय लोकप्रिय रहत, ई भविष्यक गर्तमे, मुदा प्रश्न-चिन्ह धरि अवश्य अछि ।

एहि परिक्ष्यमे मैथिली साहित्यमे किछु काँच वयसक गीत-गजलकारक प्रवेश भेल छन्हि जे लय, राग, गतिक संग साहित्य आड़िमे बान्हल छथि, ओहिमे 21 वर्षक गजलकार अमित मिश्रक नाओं महत्वपूर्ण अछि । ओना तँ साहित्यक सब सरल विधा यथा- गीत, गजल, कथा, लघुकथा, नाटक, एकांकी, कविता, बाल-साहित्य आदिमे हिनक लेखनी गत किछु वर्खसँ प्रवाहमय अछि मुदा हिनक लोकप्रियताक पहिलुक प्रस्तुति गजल संकलन "नव अंशु"सँ भेल ।नव अंशु मने नव किरण, मने नव भोर, मने नीक दिनक पहिल आभास, मने नव ऊर्जाक संपूर्ण संसारमे पहिल संचरण ।एहि पोथीक नाओंक पाछु गजलकारक एहने सन भाव रहल हेतनि ।

अनचिन्हार आखरसँ प्रेरित भऽ कऽ लिखल गेल एहि गजल, हजल आ रुबाइ संकलनमे प्रेमी-प्रेयसीसँ आगाँ बढ़ि कऽ जीवन आयामक बहुत रास अवस्थाकेँ विविध रूपेँ प्रदर्शन कएल गेल जे निश्चय द्रव्यमूलकसँ बेसी विचारमूलक  अछि । गजल लेखनक मौलिक सीमा एकर व्याकरणक संग-संग सरल वार्णिक बहरसँ लऽ कऽ अरबी बहरमे लिखल गेल गजल मानक आ पूर्ण मानल जाए । सबटा गजलमे शेर, रदीफ, काफिया, मकता आ मतलाकेँ सरस बनयबासँ बेसी बीजगणितीय आ अंकगणितीय बनाओल गेल जे जनप्रियतासँ ऊपर उठि कऽ एहि विधाक मैथिलीमे विकासक लेल उचित आ अनुकरणीय प्रयोग मानल जाए ।

व्याकरण गजलक मौलिक मानकतासँ बान्हल अछि , कुश ठामक काससँ उखाड़ल अछि  मुदा शब्द-शब्दक प्रवाह तँ शायरक स्वत: स्फूर्त प्रतिभाक प्रदर्शन अछि -
" चान देखलौं तँ सितारा की देखब
अन्हारक रूपकेँ दोबारा की देखब "
पहिल गजल सरल वार्णिक बहरमे छन्हि, मुदा मकताक प्रयोग नहि, ओना मकता गजलक कोनो अनिवार्य अंश सेहो नहि अछि ।

कतहु-कतहु गजलकार अपन वयसे जकाँ काँच लगैत छथि तँ कतहु-कतहुँ परिपक्व प्रेमी सन झंकारयुक्त उदवोधन हिनक नैसर्गित नहि तँ आशुत्व भरल दैहिक गुणक अनुलोम जकाँ लगैत अछि-
" जे किछु कहब हँसि क ऽ कहू
प्रेमक जालमे फँसि कऽ कहू
खसा दिअ आइ बिजुरी अहाँ
रूपक चानन घसि कऽ कहू "
लयात्मक गजलमे ई भाव आ बान्ह मैथिलीमे बहुत अल्प ठाम भेटल अछि ।एहि रूपेँ शायर अभिवादन आ धन्यवादक पात्र छथि मुदा व्याकरणकेँ क्रमवद्ध आ अनुशासित करबाक क्रममे कतहु-कतहु भाव झुझुआन सेहो भऽ गेल छन्हि जेना-
" बना लेब दुलहिन अपन
अमित कने खखसि कऽ कहू"

ई तँ मात्र एकटा उदाहरण परञ्च जौं सम्पूर्ण संकलनक मनोवाचन कएल जाए तँ एतबा धरि कहल जा सकैछ जे शायर गजल विधाक भविष्यक अपन जनमाषामे एकटा अंश धरि अवश्य छथि ।एहि संकलनक पश्चात बहुत रास परिपक्व आ अरबी बहरयुक्त गजल मैथिलीमे लिखने छथि जे अप्रकाशित छन्हि ।

अरबी बहरमे लिखल एकटा गजल विविध रूपक जीवनान्दकेँ सिनेहक आवरणसँ संघोरि कऽ कऽ प्रदर्शित कएल गेल जे अनुखन आ रोचक मानल जाए-
" गजल नै, नै गीत लिखलौं
जँ लिखलौं तँ प्रीत लिखलौं
बरसबै नै मेघ बनबै
ढहल आँगन भीत लिखलौं"
एकटा रुबाइ जे समर्पण आ प्रेमक अद्भुद छटा देखबैत अछि-
"अहाँ सन मीतसँ एतबे प्रीत चाही
जे नै बिसरि सकी एहन अतीत चाही
हारब हम मजा हमर आएत मुदा
सदिखन अहाँक सब मोड़पर जीत चाही "

संपूर्ण संग्रहकेँ देखलाक बाद एकटा बात अनसोहाँत लगैत अछि जे गजलकारक पूर्ण परिचय कतौ नै देल अछि, पोथीसँ गजलकारक बारेमे नामक अलावे और कोनो जानकारी नै भेटैत अछि जे प्रकाशनक कमी/गलती वा मुद्रणक कमी लगैत अछि ।

बहरे तबील, बहरे मुतकारिब, बहरे जदीद, बहरे मुजास, बहरे काफिर आदि बहरमे संजोगल संकलन आकर्षक छन्हि ।पाठक प्रभावित हेताह ई विश्वास कएल जा सकैछ मुदा जाहि सरल पाठककेँ आनंदक अनुभूति कम ओ एकरा घृत मानि सुआद लऽ सकैत अछि, किएक तँ मंचक लेल लिखल गेल चालू पद्यसँ ई ईतर एकटा साहित्यिक कृति अछि ।
एहिमे भावक संग संग व्याकरणक बान्ह बहुत दृढ़ अछि मुदा सब गजल गेय तेँ मंचक लेल सेहो अनुगामिनी आ प्रयुक्तक संग-संग उपयुक्त मानल जाए ।व्याकरणक ज्ञान छन्हि, भावक आत्मस्फूर्त प्रतिभा छन्हि आवश्यकता छन्हि तँ मात्र परिपक्व संयोजनक जे भविष्य निर्धारण करतनि आ ओहिपर विशेष ध्यान दैत अगिला संकलनकेँ प्रदर्शित करताह, एहि विश्वासक संग युवा प्रतिभाकेँ साधुवाद ।

पोथी- नव अंशु
विधा- गजल, हजल, रुबाइ
गजलकार- अमित मिश्र
प्रकाशक- श्रुति प्रकाशन,  दिल्ली
संस्करण- 2012
दाम- 200 टाका

समीक्षक- शिव कुमार झा "टिल्लू"



गुरुवार, 24 जुलाई 2014

गीत- कारी नैनासँ हलाल कऽ देलौं

कारी नैनासँ हमरा तँ हलाल कऽ देलौं
दऽ कऽ मुस्की अधरपर कंगाल कऽ देलौं

तीर कमानीसँ छूटय जहिना
धनुषा डाँर तँ लचकय तहिना
ताहि पर सोलहो श्रृंगार बड बबाल कऽ देलौं
दऽ कऽ मुस्की . . . .

नभमे लाजे चान कठुआयल
सुप्पक यौवन गाल ललिआयल
बाजि कोइली सन जगकेँ रसाल कऽ देलौं
दऽ कऽ मुस्की . . .

जकरा देख व्रम्हचर्य धरि टूटल
थिकहुँ मेनका सबके ई बूझल
दऽ कऽ नेह रस अमित मालामाल कऽ देलौं
कहि कऽ लभ यू अमितकेँ मालामाल कऽ देलौं
दऽ कऽ . . . .

सोमवार, 7 जुलाई 2014

हमर मोनक जड़त्व

हमर मोनक जड़त्व

हमर मोनपर जड़त्वक प्रभाव अछि
तोहर सुरेवगर देह-दशा
तोहर कंचन चंचलता देखि हमर मोनपर
गतिक जड़त्व प्रभाव दैत अछि
मुदा
तोहर ललाउन आँखि
हमरा प्रति उदासिनता देखि
विरामक जड़त्व प्रभाव दैत अछि
जाहि बाटसँ तूँ जाइत छेँ
हमर मोन वैह बाट धरै छै
काज-धंधाक बाट नै धंगाइ छै
एवंप्रकारे दिशाक जड़त्व लगाइये दै छेँ
तोरा बुझल छौ ने ?
एकाएक उभरल तीनू प्रभाव
दुर्घटनाक कारण बनैत अछि
गतिक पहिल नियम
हमरापर बड लागू केलेँ
आब आगूओ बढ़
गतिक तेसर नियम लेल
हमर मोन उताहुल भेल छौ ।

अमित मिश्र

मंगलवार, 23 अप्रैल 2013

भुसकौलसँ घुरलाक बाद

* भुसकौलसँ घुरलाक बाद *
खण्ड-1

गीतक सागरमे भसियेलाक बाद
मिथिलाक ज्ञानक जादूगरक खेल देखलाक बाद
भरि रातिक सार्थक जगरनाक बाद
आँखि टुह टुह लाल भऽ गेल अछि
भाँगन नशा सन देह भासि रहल अछि
भीतर वा बाहरसँ बोखार हुलकी मारि रहल अछि
मुदा भाव, व्याकरण, साहित्यपर
एकर सुखाएलसँ लऽ कऽ हरियाएल ठाढ़िपर
चुहचुहाएल कुरीत आ कठुआएल रीतपर
गुम्मी लाधने समज, हेराएल आवाजपर
तानाशाहीकें फटकारैत गाँधीक विचारपर
अखबार आ लेखकक शब्दक शान चढ़ल धारपर
प्रवासीक घर बान्हल मिथिलाक संस्कारपर
सगर राति सार्थक चर्चाक झाँटमे नहेलाक बाद
थाकल मोन हरियर-हरियर भऽ गेल अछि
भुसकौलसँ घुरलाक बाद लागि रहल अछि, जे
जीब लेलौं एकटा सार्थक आ अद्वितिय जिनगी

खण्ड-2
इन्द्र देव छलथि हर्षित बहुते
देख कऽ प्रेमक अनुपम सरंजाम
वसुधा सेहो भीज गेल छल
भोरेसँ ठंढ़ाएल सगरो गाम
माटिक बाट आ कादोक आगमनसँ
किछु किछु आएल परेशानीक नाम
गम गम अँगन, चमकैत दलान
मीठगर पान, आ व्यंजन तमाम
घरबैयाक व्यवहार, विचारसँ
तिरपित भेल सभक मोनक धाम
एहन स्वागत नै देखने रहियै
जे देखलौं जा भुसकौल गाम

शनिवार, 20 अप्रैल 2013

ताड़ आ ताड़कुल


गगन छुबैत जे गाछ ठाढ़ अछि
हवा संग एसगर रचै नव धुन
गमकैत ताड़ी भरि घैल पीबू
भरि पेट खाउ मीठगर तारकुल

छाहरि दुर्लभ ई तँ बूझल अछि
मुदा पातसँ बनै बियनि अदभुद
गोइठा पारू एकर कारी तनपर
छेब-चाँछि पसिबा आनलक तारकुल

चलू शप्पत खाइ जे बनि ताड़ सन
रहि दूर निज माटिसँ जुड़ल रहब
निज स्वभाव, गुणसँ गमगाबैत समाजकें
बाजब मधुर जेना रसगर तारकुल

अमित मिश्र

बुधवार, 20 मार्च 2013

गजल आ गीत मे अंतर की छै?



गजल आ गीत मे अंतर की छै? मात्र एक अक्षर के । गीत आ गजल दूनू गाओल जाइ छै । जँ ध्वनीक तुक {राइम्स } सभ पाँति मे मिलैत रहत त' गीत वा गजल दूनू सुनै मेँ बेशी नीक लागै छै । मुदा गीत मे राइम्स नहियो हेतै त' चलतै मुदा गजल मेँ प्राय: पाँति संख्याँ 1 ,2,आ तकरा वाद 4 ,6 , 8 , 10 . . . मे हेवाक चाही । गीत मे कतेको पाँति के बाद फेर सँ मुखरा दोहराओल जाइ छै मुदा गजल मे प्राय: तुकान्त वाला पाँति बाद कहल जाइ छै । गजल कम सँ कम 10 टा पाँतिक होइ छै जकरा 2-2 पाँति के रूप मे बाँटि क शेर कहल जाइ छै । । जहिना गीतक शास्त्र व्याकरण होइ छै{सा रे ग . . .} तहिना गजलक व्याकरण होइ छै । जहिना शास्त्रीय गायण मे राग होइ छै तहिना गजल मे बहर होइ छै । जहिना गीत कोनो ने कोनो ताल . राग . मे होइ छै तहिना गजल कोनो ने कोनो बहर मे होइ छै । । आब कहू गीत आ गजल मे अंतर की?

नवका गायक त' गीतक टाँग -हाथ तोड़ि क' गाबै छथि । दू तीन टा शब्द के एकै साथ जोड़ि क' गाबैत छथि बूझू जे फेविकाँल सँ साटि देने होइ । जहिना गीत मे कोनो तरहक चिन्हक {कोमा ,फूल स्टाँप , आदि} के मोजरे नै दै छथि । ओहिना
गजल मे कोना पाँति मे कोनो चिन्ह{. , ? आदि} नै देल जाइ छै ।मात्र अपन नामक आगू पिछू {" "} चिन्ह लगा सकै छी । 
आब एना किए कैएल जाइ छै से नै पूछू ? अपने सोचू ने गीते जकाँ गजलो के त' गाओल जाइ छै ।
आ आब कहू गीत आ गजल मे अंतर की?

har ekta mitr gjalak bare me puchhlani t ham kahaliyani

गजलक मे आबै वला किछु शब्द के देखू ।

1} शेर- शेर दू पाँतिक होइत अछि आ अपना आप मे सदिखन पूर्ण भाव दै अछि आ आन पाँति सँ स्वतंत्र रहैत अछि ।

2} गजल- कम सँ कम पाँच टा शेरके जँ किछु तुकान्तक सँग एक ठाम राखल जाए त' ओ गजल बनै छै । एकटा गजल मे एकै रंग तुकान्त हेवाक चाही ।

3} रदीफ- गजल पहिल शेर के अंतीम सँ देखू जँ कोनो एहन शब्द जे शेरक दूनु पाँति मे काँमन होइ त' ओकरा गजलक रदीफ कहबै ।

आइ चलू संगे प्रेम गीत गेबै प्रिय
एकटा प्रेमक महल बनेबै प्रिय

एहि शेर मे "प्रिय "दुनू पाँति मे अछि तेँए एकर रदीफ भेल" प्रिय" । 
आब गजलक सब शेरक दोसर पाँति मे इ रदीफ रहबाक चाही इ अनिवार्य अछि ।

4} काफिया - काफिया मने मोटा मोटी तुकान्त{राइम्स} बूझू । जँ बाजै मे एकै रंग ध्वनी बूझना जाइ यै त' ओ भेल काफिया । काफियाक तुक ओहि शब्दक अंतीम सँ पता लागै छै । जे तुकान्त गजलक पहिल पाँति मे अछि सेह आन सब पाँति मे हेवाक चाही । मतलब जे गजलक पहिल शेरक दुनू पाँति मे आ आन शेरक दोसर पाँति मेँ ।

काफिया-
जेना - जेबै . खेबै . नहेबै { ऐ मे "एबै" तुकान्त भेल 
गमला . राधा . चेरा . केरा {एहि मे तुकान्त "आ" भेल}

हेतै , खेबै . झेलै {ऐ मे तुकान्त"ऐ" भेल}

रोटी , हाथी . रेती{ऐ मे "ई" भेल} 

झोरी . बोरी {ऐ मे"ओरी" भेल} 
एनाहिते और सब मे काफिया {तुकान्त }बनत ।

गजल पहिल शेर मे रदीफ आ काफिया क्रमश: पाँतिक अंतीम सँ अनिवार्य रूप सँ हेबाक चाही । आ आन शेरक दोस पाँति मे सेहो रदीफ आ काफिया क्रमश: अंतीम सँ हेएत ।

5} मतला- गजल पहिल शेर जेकर दूनू पाँति मे रदीफ आ काफिया क्रमश: अंतीम सँ होइ एकरा मतला कहल जेतै ।

चाँद देखलौ त' सितारा की देखब
अन्हारक रूप दोबारा की देखब

प्रेमक सागर मे बड नीक लागै
डुब' चाहै छी त' किनारा की देखब

एहि मे पहिल शेरक दुनू पाँति मे काँमन "की देखब" अछि तेँए इ एहि गजलक रदीफ भेल आ रदीफक पहिले देखू , दूनू पाँति मे "सितारा "आ "दोबारा " छै एकर तुकान्त भेल "आरा" तेँए इ भेल काफिया । आब दोसर शेरक दोसर पाँति मे देखू । रदीफ "की देखब" आ तुकान्त "आरा " के संग शब्द "किनारा " अछि । । आब एहि गजलक सब शेरक दोसर पाँति मे अंत सँ रदीफ "की देखब "
आ काफिया "आरा"
तुकान्तक संग हेबाक चाही । 

तुकान्तक पाता शब्दक अंत सँ चलै छै ।

6} मकता-- गजल अंतीम शेर जै मे शाइर अपन नामक प्रयोग करै छथि ओहि गजलक मकता कहल जाइ छै ।

मेघक डरे चान नै बहरायल
नै औता "अमित" नजारा की देखब

इ भेल मकता ।
शाइर अपन सब शेर मे अपन एकै टा नामक प्रयोग करैथ । जेना हम पहिल गजल सँ"अमित" लिखै छी त' आब कतौ "मिश्र " नै लिख सकै छी ।

वेश त' एते देखू आ लिखू । और कनेटा बात छुटल अछि जे अहाँ सब जानैत छी । वर्ण वला बात । त ' आब लिखू किछ नीक गजल 

किछु दिन पूर्व हमरे सन एकटा बिन पढ़ल लिखल गीतकार सँ भेट भेल ।हमरे जकाँ हुनको रचना लोकक माँथ पर द निकैल जाइ छलै । खैर ओ हमरा बतेलनि जे गीत लिखैत बेर जँ वर्ण गानि क लिखब त' गाबै मे सुविधा हेतै । आ ओ वर्ण गानब सिखेलनि । तै पर हम कहलयनि जे एना वर्ण गानि क' हम सब "गजल "लिखै छी
आ तेकर नाम दै छी
"सरल वार्णिक बहर" 

आ एकर वर्ण एना गानल जाइत अछि ।
हिन्दी वर्णमाला के जतेक वर्ण अछि{अ .आ सँ ल' क' य , र . . . धरि} के एकटा वर्ण मानै छी ।
जतेक हलन्त रहै अछि तकरा मोजर नै दै छी अर्थात शुन्य{0} मानै छी ।
संयुक्ताक्षरमे संयुक्त अक्षर के एक {1} मानै छी ।
जेना की " भक्त" एहि मे 2 टा वर्ण भेल । एकटा "भ"आ एकटा "क्त" ।

एकर बाद एकटा शेर कहलौँ ।

भाग्य मे जे लिखल अछि तेँ विरह मे मरै छी
आशा केने छी कहियो त' मान नोरक धरबै

एहि शेरक दुनू पाँति मे 17 वर्ण अछि । एहि बहर मे जँ गजल लिखब त' सब पाँति मे पहिल पाँति एते वर्ण हेबाक चाही ।

ओ गीतकार कहलनि जे अहाँके वर्ण गान' आबै यै तेँए अहाँ नीक गीतकार बनब आ हमहूँ आब गजल लिखब । । गीत आ गजल मे एते समानता अछि त' आब कहू गीत आ गजल मे अंतर की ?

होली स्पेसल २१ टा हुरदंग शेर

एक साथ होली स्पेसल २१ टा हुरदंग शेर दऽ रहल छी जकरा परंपरागत रूपसँ गाम घरमे गायन होई छै \
होली मे किछु अलगे तरहक शेर साब गाओल जाइ छै ।किछ शेर हम दऽ रहल छी ।जँ कत्तौ कोनो शब्द नीक लागैए त क्षमा चाहब । ।
{सारा रा रा //8 । वाह भाइ वाह //8 बेर वा अपन तरीका सँ सब शेर मे लगा लेब }
{1} होली मेँ रंग बरसै, उड़ै अबीरा
(पहिल शेरक अन्त वाला आधा भाग सब मे दोहराएब) मुँह किय तुम्मा केने गाबू जोगीरा । ।
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया (सब शेर में दऽ सकै छी )
{2} आमक पत्ता छोट होइ छै, पैघ केला कए पत्ता
बुढ़बा लाठी लऽ कऽ दौगल, खसलै बड़का खत्ता । ।
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{3} सगरो अन्हार पसरल , डुबि रहल छै देश
बाबा जी पड़ा रहल छथि धऽ नारी कए भेष । ।
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{4} केऊ पिबै भांग दारू ,केऊ पिबै यै ताड़ी
नटुआ बनि नाचि रहल छै दियौ जोड़ा साड़ी ।
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{5}मौगी भेलै मुखिया ,आ बनलै प्रधान
मनसा करै उठक-बैठक पकड़ै छै कान । ।
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{6}हुलुत-बुलुक कुदैत-फानैत ,सासुर सब पहुँचल
ऊहो ठाम मारि पड़लै गाल दुनू फुलल
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{7}उड़लै खूब एरोपलेन ,आ हावाजहाज
उड़बै हमरा कनियाँ देखू करी हम सब काज
{8} ऐ दफ्तर ओइ दफ्दर ,करी दौड़ा-दौड़ी
गामक छौड़ा संग भागलै गामे कए छौड़ी
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{9} कुत्ता गदहा गाय भैँस ,सब कए होइ छै नंगरी
भौजी संग होली खेलैमे टूटि गेल टंगरी
{10}गाम छोड़ि शहर गेलै ,शहर छोड़ि विदेश
हकन कानै छौड़ा सब छोड़ि अपन देश ।
{11}मुखिया कए करिखा लागलै ,तैयो नाचै छैँया-छैँया
घोरि कऽ पी गेलै इंदरा आवास वाला रूपैया । ।
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{12}कुरती-सलबार केऊ नै पहिरै ,पहिरै छै जींस
मोछ कटा छौड़ा सब लागै अलच्छे प्रिँस
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{13}राति विधायक जीक ,घर मे लागलै आगि
मुखिया जीक कनियाँ गेलै चमचा संग भागि
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{14}सारि सँ रंग लगेबै ,सरहोजि सँ पिबै भांग
सार बुढ़बा की करतै खीच देबै टाँग
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{15}बहकल छै ढोल वाला ,मातल सब लोग
दारू पिनाइ भऽ गेलै एड्स बाला रोग
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{16}भिरहा मे नाच भेलै ,भुतहा मे उड़लै पैसा
रोसड़ा मे देख भाई जाम लागल कैसा
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{17} नेना सब करै ,दोकान पर नोकरी
नशा करै लए बाप लगेलक बेटा कए फसरी
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{18}प्रेम मे पागल भऽ कऽ ,मुन्ना खेलक जहर
मुन्ना कए दोस्त कए बनेलकै छौड़ी शौहर
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{19}तमाकुल होइ छै कऽरू आ ,चिन्नी होइ छै मिठ
लैते जनम आइ-काल्हि बच्चा भऽ जाए ढीठ
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{20} दरभंगा मे दंगा भेलै ,मधुबनी मे उड़लै ओढ़नी
समस्तीपुर मे आबिते सब कए काटि लेलकै बिढ़नी
सा रा रा रा रा रा रा हो भैया धीरे भ जा हो भैया
{21} बान्हि ले झालि-ढोल ,आ मंजीरा मीत
जोरसँ बाज सा रा रा रा खतम भेलै गीत ।
बोल बोल रे सा रा रा रा रा रा रा रा रा रा रा . . . । ।
एकरा होलीमे अहाँ सब गायब से आशा अछि
सब रंगक शेरसँ भरल बाल्टी अपने सबहक लेल । खराप नै मानब होली छै । ।
अमित मिश्र

सोमवार, 18 मार्च 2013

मोछ

कथा -- * मोछ *



मिथिलाक लोक जहिना दही-चुड़ा  माछ .मखान आ पान कए प्रेमि होइ छथि ओहिना गप्प-सड़क्का कए सेहो बड़का प्रेमि होइ छथि । जँ दु-चारि टा संगी एकठाम जुटला आ गप्प नै भेल ,एहन भS नै सकै यै । देश-विदेश , घर-दुआरि , क'र-कुटमैती , वियाह-द्विरागमन , फिल्म-राजनीति बहुतो रास शिर्षक छै ,गप्प करबाक लेल ।गाम-घर मे ताशक चारि-चारि टा चौकरी एक्के ठाम भेटत आ उहो ठाम गप्पक सुगंध भेटै छै । खुदरा मे गप्प तS हाट-बजार , ट्रेन-बस , गाछी-बिरछी ,बाध-बन आदि जगह भेटबे करै छै मुदा थौक मे गप्पक सरोबर बहै छै ,चाहक दोकान पर ।

                                                                              हम्मर गामक चौक पर एक्केटा चाहक दोकान छै , सुरेन्द्र  कए चाहक दोकान । साँझ कS गामक सब बड़-बुजुर्ग ओही दोकान पर जुटै छथि आ चाहक चुस्की संग फुटै छै गप्पक फटक्का । हम्मर एकटा फरीक मे कक्का छथि ,मधु कक्का , जेहन नाम तेहने काम , मुहँ सँ सदिखन मधु चुबैए छेन । मधु कक्का कए गप्प बड़ नीक होइ छै ,हिनकर गप्प सुनबाक लेल साँझ कS चाहक दोकान पर भीड़ जुटल रहै छै । चाह संग बिस्कुट ,समौसा , लिट्टी , जीलेबी . सेहो बड़ बिकाइ छै , इएह कारण छै जे सुरेन्द्र मधु कक्का कए फ्रि मे चाह , बिस्कुट आ कहियो-कहियो जीलेबी .समौसा दS छै । आ एकर बदला मे कक्का नव-नव गप्प सुनबै छथिन। गप्प आ मधु कक्का कए महिमा अपरंपार छै जतेक बखान करब ततेक कम मुदा एहि ठाम कोनो गप्प नहि एकटा घटना बता रहल छी ।

                                                                                          एक बेर हम अपन किछु दोस्त संगे ओहि देकान पर नाश्ता करबाक लेल गेलौँ  । दोकान पर पएरो राखै कए जगह नै छलै  , किछ गेटा तीनू बेँच पर बैसल छलखिन आ जिनका जगह  नहि भेटलनि से ठार छलखिन , सबहक बीच मे ऊँचगर कुर्सी पर मधु कक्का बैसल छलखिन । हम कक्का कए देखलौँ तS जा कS गोर लागलियनि  । हमरा देख कक्का बाजलाह ," बौआ , दरभंगा सँ गाम कहिया एलहो ।"
   "कक्का काल्हि साँझ मे एलौँ " हम सामने मे ठार होइत कहलयनि ।
हमरा दिश कनेक काल देखला कए बाद कहलखिन ," बौआ , वियाह भS गेलS की ?,"
हम अकचका गेलौँ जे कक्का एहन प्रश्न किएक पुछि रहल छथि । हम मुड़ी निच्चा केने बाजलौँ ,"कक्का ,एखन तS पढ़ि रहल छी , कत्तौ नोकरी भेटत तहन ने नीक दहेज ,नीक कनियाँ आ नीक ठाम वियाह हएत , ओना अहाँ एहन प्रश्न किय पुछलियै ।"
 
" तोरा  नहि मोछ छS नहि दाढ़ी छS आ नहि टिक छS  , तS हम की बुझियै , हौ , जेकरा वियाह भेल रहै छै तकरे ने इ सब नहि रहै छै । " कक्का बड़ा शान्ती सँ बाजलाह ।

हम्मर समझ मे इ तर्क आबि नहि रहल छल । आखिर मोछ सँ वियाहक कोन संबंध , कोन प्रयोजन । लाजे हम्मर मुड़ी माटि मे धैस रहल छलै मुदा हमहूँ शहरी छौड़ा छलौँ चुप कोना रहब , तेँ हिम्मत कS  कहलौँ ," कक्का ,अहूँ गजबे बात करै छी आब वियाह सँ मोछक कोन संबंध आ टिक नै राखब तS नवका फैसन छै । "

" देखहक , देखहक भाई सब छौड़ा कोना बाजै छै ।" कक्का भीड़ दिश देखैत जोर सँ बाजलाह , " रौ , वियाह भेला कए बाद मर्द ,मर्द नै रहै छै ओ मौगी भS जाइ छै आ जमाना जानै छै जे मौगी कए मोछ , दाढ़ी आ टिक नहि होइ छै , तोरा तS सदियह ऐ मे से किछ नहि छौ  , जँ एखनो तोँ अपना कए मर्द कहै छेँ तS जरूर तोहर वियाह भS गेल छौ ।"

लोक सब हम्मर आ कक्का कए बार्तालाप सुनै छलैए आ मुस्की मारै छलैए । आइ कक्का कए नजैर पर हम चैढ़ गेल छलौँ । मोने मोने हम ओही   क्षण कए के गरियाबै छलौँ जखन ऐ देकान पर आयबाक लेल सोचने छलौँ । सब चाहक चुस्की आ हम्मर बेज्जती सँ मुड-फ्रेस कS  रहल छलैए ।
हम खिसिया कS कहलियै ,"कक्का .राम भगवान कए देखू , कृष्ण भगवान कए देखू , किनको मोछ नहि छै तS की ओ मर्द नहि छलाह ।"
" बौआ , ओ भगवान छलखिन तूँ तS मनुक्ख छेँ , जेना राम जी 14  वर्ष बन मे रहलखिन आ कृष्ण जी गीता  कए उपदेश देलखिन , एहन एक्को टा काज तूँ कS सकै छें? जँ भगवानक देखसी करै छेँ तS भगवान जेकाँ कर्म कS कए देखा , तहन फ्रि भS जेबेँ मोछ राखै सँ ।"

                                                                                     कक्का कए तर्कक  सामने हम कमजोर भS गेल छलौँ ,हमरा किछ फुरेबे नहि करै छलैए ,मुदा हमहूँ नव जमाना कए ,नव विचारधारा ,आ नव समाज मे जियै बाला प्राणी छी तS फेर एतेक जल्दी हारि कोना मानि लेब ।हम फेर कने सोचि कS कहलौँ ," आइ कए जमाना मे मुर्ख वा विद्वान सब पाइ चाहै छै , मोछ नहि , आ जँ मोछ राखब तS कोनो नामी कंपनी नोकरी नहि देतै आ जँ नोकरी नहि भेटत तS टाका नहि भेटत आ जँ टाका  नहि रहत तS भुखल  मरब , एहि कारणे कक्का मोछ राखनाइ जरूरी नहि छै ।" फेर कनेक काल ठमकी कक्का कए मूँह पर आबैत भावपढ़बाक कोशिश केलौँ आ फेर सँ हम अप्पन तर्क देलौँ ," आइ फिलम मे बड़का-बड़का हिरो सब बिन मोछ कए अभिनय करै छै और एक्के दिन मे लाखक-लाख टाका कमा लै छै , जाँ मेछ राखितै तS हमरा हिसाबे ओ सड़क पर रहितै । एकटा बात और मोछ बाला छोड़ा कए कोनो आधुनिक लड़की पसंद नहि करै छै ,आब केउ मुर्खे हेतै जे मोछ राखि कS  अपन पएर पर कुल्हरि मारतै ।"
  
  हम मोने-मोने सोचै छलौँ जे ऐ बातक कोनो काट कक्का लग नहि हेएत किएक तS महगाई कए जमाना मे टाका सब  कए  चाही ।मुदा कक्क तS कक्के छलाह ओ कोना हारि जेताह ।ओ चट दS  अपन बात कहलनि ," हम मानलियौँ जट टाका सबहक प्रथम जरूरत छै मुदा फिलम मे काज करै बाला मर्द नहि होइ छै ,अरे ऊ तS  अपना संगे बाँडीगार्ड कए फौज लS कS घुमै छै ,भीड़ मे नहि आबS चाहै छै , लाड़का लड़की कए रूप धS मूँह झाँपि कS बहराइ छै , ओकरा करेजे नहि छै खुलेआम धुमै कए , जे सदिखन डर मे जियै छै , आब तूँ ही कह जे ओ मर्द छै की मौगी ।सब नवयुवक ओकर अनुकरण करै छेँ आ मोछ कटाबै छेँ ।लाज कर रौ बौआ ,लाज कर ।"
         
                                                कक्का कए बात सुनि हम फेर सँ निरूतर भS गेलौँ । हमरा लSग आब कोनो एहन ठोस तर्क नहि छल जै सँ हम निमोछिया कए जीता सकितौँ ।हमरा चुप देख कक्का बाजलाह," बौआ ,शास्त्र-पुराण मे अनेको ऋषि-मुनी लिखने छथिन जे माय-बाप कए मरला कए बादे मोछ कटाएबाक चाही ।मोछ तS मर्दक पहचान छै । पहिलुक जमाना मे मोछे सँ बुझहा जाइ छलै जे के बलगर आ के कमजोर छै ।मोछक भेराइटी होइ छलै , छोटका मोछ ,हिटलर कट मोछ , पतरका मोछ आ सब सँ नीक मोछ होइ छलै कान धरि बाला मोछ । पाकल ,कारी ,लाल , कंघी मारल, गोल-गोल औँठिया मोछ ,रौद मे चमैक कs मुँहक तेज बढ़ाबै छलै ।आब तs इ सब सपना भs गेलै । आब तS सब किछ छोट भS रहल छै ,छोट मनुष्य ,छोट गाड़ी  , छोट बर्तन ,छोट नाम जेना माँम डैड ब्रो , छोट कपड़ा , छोट टिक , आ सफाचट मोछ । जेना फैसनक कारण सब किछ छोट भS रहल छै हमरा बुझना जाइ यै मुनुक्खक ऊँचाइ बकरी जेकाँ भS जाएत । बौआ हम सब मिथिलाक छी ,मिथिलाक नाउ ,संस्कार ,संस्कृती ,इज्जत कए माटि मे नहि मिला ।विद्यापति ,उदयनाचार्य ,मंडन सन विद्वानक धरती सँ मोछ रूपि धरोहर फैसनक सागर मे नहि भसा । मोछ राख ,टिक राख , जनेऊ पहिर आ शान सँ कह हम मिथिलाक छी , हम मैथिल छी ।"

                                                                                                    हम लाजे मुड़ी निच्चा केने कहलियै," कक्का कान पकड़ै छी , आइ सँ हम मोछ नहि काटब आ अपन संगीयो सब सँ कहब मोछ नहि काटबाक लेल ,अपन संस्कृती बचाएबाक लेल ।"
    सब ताली सँ हम्मर बातक समर्थन केलक । चाहक दोकान पर सँ भीड़ छटS लागल । ।

                                                                                                  { समाप्त }



उदयन नाट्य कला परिषद प्रोषित पतिका जकाँ विशाल पथपर संस्कृतिक बाट जोहैत




असलमे कोनो सँस्कृति ,भाषा आ साहित्य अपनेसँ जनम नै लै छै ,जनम दिअ पड़ै छै ।अपने नै जीबै छै ,जीया कऽ राखऽ पड़ै छै ।मिथिलाक बिलुप्त होइत संस्कृतिमे एकटा अछि नाटक ।बेसी दिन नै ,दस-पनरह वर्ष पहिने धरि मिथिलाक सब गाममे नाटकक मंचन होइत छल मुदा आब महानगरक कोनो छोट-छीन सभागारमे जा कऽ बन्न भऽ गेल अछि गमैया नाटक ।नाटक साहित्यक एहन विधा छै जकरा किओ असगरे नै सम्हारि सकैछ ।नाटकक लेल दसकेँ सहयोग चाही ।अर्थोपार्जनक लेल मैथिल परदेश जा बसि गेलनि ।सहयोगमे उठैत हाथ कोसो दूर मशीनक स्वीचपर नाचऽ लागल आ मैथिली नाटकक मंच विरहिन जकाँ मंचक सहयोगीत बाट जोहि रहल अछि ।दक्षिणमे समस्तीपुरक कतेको गाममे मैथिली नाटकक सफल मंचन होइत छल जाहिमे मुजौना ,विद्यापति नगर आ करियनक नाटक उल्लेखनिय अछि ।बता दी जे करियन उदयनाचार्यक जन्मस्थलीक रूपमे जानल जाइत अछि तें एहि ठाम प्रतिभाक कमी नै अछि ।ई गाम पण्डितक गाम अछि ।करियनमे शिक्षकक कमी नै अछि ।कहबाक मने छल जे करियन विद्वानक नगरी अछि ।एहि गामक भाषा पहिनहियों मैथिली छल आ एखनो मैथिली अछि ।मैथिलीक प्रति समर्पण भावक पता एहि बातसँ लगाओल जा सकैछ जे गामक मध्य विद्यालयमे शिक्षक-छात्रक बीच संबादक भाषा एखनो मैथिलीये अछि ।ग्रामवासीकेँ मैथिली प्रेम नेनपनेसँ लागि जाइत छल/अछि ।इएह कारण अछि जे करियनक मैथिली नाटक उच्च कोटीक होइत छल ।

करियनक एक मात्र नाटक संस्था "उदयन नाट्य कला परिषद"क स्थापना साठिक दशकमे बाबू साहेब पाठक केलनि जाहिमे विशेष सहयोग लम्बोदर ईसर ,शशीकान्त झा ,पं॰ अनिरूद्ध ठाकुर देलनि ।ई सब गोटे विभिन्न क्षेत्रक माँजल कलाकार छलथि ।करियन चौकपर एकर कार्यालय बनाओल गेल आ ओतै संस्था द्वारा सबटा नाटकक मंचन होइत छल ।ई संस्था मैथिली नाटककेँ प्राथमिकता देलक आ ओहि जमानाकेँ सफल नाटककारक नाटकक मंचन कऽ इलाका भरिमे अपन नामक डंगा बजा देलक ।तीन दिनक कार्यक्रमकमे कमसँ कम दू दिन मैथिली नाटक खेलनाइ अनिवार्य छल ।दूर-दूरसँ लोक मात्र एतुका नाटक देखबाक लेल आबैत छलाह ।नाटकक फरमाइस होइत छल आ ई मंच दर्शक उम्मेदपर सदिखन खड़ा उतरैत छल ।1970 सँ पहिने पं॰ जीवन झाक "सुन्दर संयोग" आ रघुनंदन दासक "सीता स्वयंबर" नाटकक मंचन कऽ नाट्य कलाकेँ एकटा नव रूप देल गेल ।किछु वर्षक बाद संस्थाक संचालन आ रचनात्मक सहयोग कृतिनारायण झा आ कामदेव पाठक दिअ लागलनि ।कामदेव पाठक सबसँ बेसी नाटकक निर्देशन केलनि ।एहि समयमे प्रो॰ ईसनाथ झाक नाटक "चीनीक लड्डूक" मंचन एहि मंचसँ सबसँ बेसी सात बेर भेल ,जाहिमे मुख्य अभिनय हिराकान्त ईसर ,रामसेबक ठाकुर ,मणिकान्त झा ,गंगेश पाठक ,तेजनारायण कमती आ भुटकिन झा केलनि ।ई नाटक मंचकेँ और बेसी प्रसिद्ध कऽ देलक ।
एहि मंचसँ सबसँ बेसी लोकप्रिय नाटक रहल विद्यानाथ रायक "विद्यापति" जाहिमे विद्यापतिक अभिनय चन्द्रदेव पाठक आ हुनक पत्निक अभिनय मणिकान्त झा ,शिव सिंहक अभिनय रामचन्द्र चौधरी केलनि ।उगनाक अभिनय सब बेर अलग अलग कलाकार केलनि जाहिमे रामसेबक ठाकुर आ गिरिजा नन्द पाठक प्रमुख छथि ,केलनि ।ई नाटक एतेक प्रसिद्ध भेल जे दर्शकक झूण्ड कतेको बेर एहि नाटकक मंचन करबेलक ।उगनाक अभिनय एतेक सुन्नर भेर छल जे लागैत छल साक्षात महादेव आबि गेल छथि ।माँझ मंचपर जटासं गंगा धार बहा देल गेल छल ।कहल जाए तँ सबसँ बेसी सफल नाटक रहल "विद्यापति" ।

बरसातक बाद ,जाड़क प्रवेशक संग दुर्गा पूजाक अवसरपर कतेको दिनक परिश्रमक बाद मंचित होइत नाटक पर दर्शकक सफल प्रतिक्रिया पाबि संस्था आ एहिसँ जुड़ल कलाकारक उत्साह बढ़ैत गेल ।ई समय छल जखन एहि मंचक सफलता देख अगल-बगलकेँ कतेको गाममे नाटकक मंचन हुअ लागल ।नव नव कलाकार जनम लिअ लागलनि ।सहयोगीक संख्याँ बढ़ैत गेल ।ई एहि परिषदक स्वर्णिम समय मानल जा सकैछ ।पुरान कलाकारक संग-संग युवा कलाकाकर सब अपन कलाक धार पिजबैत रहलाह आ परिषद लऽग कलाकारक भीड़ लागि गेल ।हालत एहन भऽ गेल जे कतेको कलाकारकेँ दर्शक दिर्घामे जा कऽ बैसऽ पड़ैत छल ।एहि बीच तीन बेर गोविन्द झाक लिखल "बसात"क मंचन भेल ।बसातक पहिल बेरूक मंचनमे गंगेश पाठक ,मणीकान्त झा ,गिरिजा नन्द पाठक ,रामसेबक ठाकुर ,रामचन्द्र चौधरी ,राघवेन्द्र झा ,जयकान्त झा छलथि ।दोसर बेर जयकान्त झा ,राघवेन्द्र जा ,चन्द्रशेखर कमती ,गोपाल झा ,तृप्ति नारायण झा, राजाराम पाठक,शारदानन्द मिश्र ,इन्द्रभूषण चौधरी.मुनेश्वर झा ,अजीत झा,विरेन्द्र मिश्र ,फूल झा छलथि ।तेसर बेर शारदान्द मिश्र,गोपाल झा,तृप्तिनारायण झा,रमेश झा,उमेश झा,धिरेन्द्र,श्यामकुमार ,संजीत झा.नवीन कु॰ मिश्र ,प्रविण पाठक ,अरूण कमती ,शिवकुमार झा ,संजीत कु॰ झा आ अभिनेत्रिक अभिनय पवन झा केने छलथि ।निर्देशन शारदानन्द मिश्र केलनि जे नायक कृष्णकान्तक पिताक भावपूर्ण अभिनय केलनि ।
एकर बाद मणिपद्मक "झुमकी" ,रामचन्द्र चौधरीक "पिया मोर बालक" ,महेन्द्र मलंगियाक "एक कमल नोरमे" ,उत्तम लाल मण्डलक "इजोत" ,अरबीन्द अक्कूक "तालमुट्ठी" ,ललन प्रसाद ठाकुरक "लोंगिया मिरचाइ" सन कतेको नाटकक सफल मंचन कएल गेल ।

फेर कवि कालीकान्त झा "बूच"क लिखल कथा "धर्मशास्त्राचार्य"केँ नाटकक रूप दऽ मंचल कएल गेल जाहिमे गुरूक भूमिकामे चन्द्रदेव पाठक आ शिष्यक चरित्रमे राजाराम जी छरथि ।अफसोसक गप ई अछि जे नाटककार लऽग एहि नाटकक पोथी उपलब्द्ध नै रहि सकल ।ई नाटक मात्र किछु गोटेक स्मृतिमे बन्न अछि ।भारतिय संगितक जानल - मानल हस्ती करियनक उमाकान्त पाठक ,श्यामाकान्त पाठक आ गोपाल पाठक तीनू गोटे अपन संगीत कलाक प्रदर्शन करैत छलथि ।

बीचमे एकटा और नाट्य संस्था "कृतिनारायण नाट्य कला परिषद" खुजल ।शुरूमे ई परिषद रामलिला पार्टी छल मुदा बादमे नाट्य कलाक लेल समर्पित भऽ गेल ।एकर मुख्य अभिनेता रामस्वरूप झा छलथिन ।ई परिषद अर्थोपार्जनक लेल खुजल छल ।सालमे 9 मास परिषदक काज बाहरे चलैत छल मुदा शेष तीन मास गाममे अपन सेवा दैत छल ।निजी तौरपर आ उदयन नाट्य कला परिषद दुनूमे सहयोग भेटैत छल ।कृतिनारायण नाट्य कला परिषदक मंचसँ गुलाबबाग(पूर्णियाँ)मे "विद्यापति" नाटकक मंचन भेल अछि ।



 जखन धरि किछु नव नै कएल जाएत ,दोसरसँ हटि कऽ नै काएल जाएत तखन धरि प्रसिद्ध भेनाइ असम्भव अछि ।करियनक मैथिली नाटककेँ एते प्रसिद्ध हेबाक मुख्य कारण छल मैथिलीक प्रति समर्पण ।एतऽ उदघोषणासँ लऽ कऽ गीत-संगीत धरि मैथिलीए मे होइत छल ।संगीतक क्षेत्रमे उमाकान्त पाठक ,श्यामाकान्त पाठक ,गोपाल पाठक आ केदार पाठकक नाम उल्लेखनिय अछि ।बाँसुरी आ हारमोनियमक प्रसिद्ध कलाकार छलथि इन्द्रदेव पाठक जे उमाकान्त पाठककेँ अपन गुरू मानैत छलथि ।उदयन संगीत मंदिरमे सेहो कार्यरत रहलनि संगहि दरभंगा आ पटना आकाशवाणीसँ कतेको बेर हिनक संगीतक प्रसारण भेल ।बादमे ई मानसिक रूपसँ अस्वस्थ भऽ गेलनि आ एकटा महान संगीतकारक संगीत साधना बन्न भऽ गेल ।
करियन हरिजन टोल एखनो मिथिलाक बिलुप्त होइत वाद्ययंत्रकेँ जीया कऽ राखने अछि ।एहिमे सुकेश्वर मोचीक महत्वपूर्ण योगदान छल ।एहि टोलक रामाशिष भारतिय स्थल सेनाक बैण्डमे कार्यरत छथि ।
उदयन नाट्य कला परिषदक मंचसँ मंचित होइ बला नाटककेँ बीचमे वा पट परिवर्तनक बेर मैथिलीएमे स्वरचित गीत गाओल जाइत छल ।नायक-नायिकाक लेल जे गीत देल जाइत छल उहो स्वरचित रहैत छल आ अभिनेता-अभिनेत्री स्वयं गाबितो छलथि ।
सबटा गीतक रचना कालीकान्त झा "बूच" ,रमन-सुमन आ चन्द्रशेखर कमती करैत छलथि ।चन्द्रशेखर छी बाल साहित्य आ हास्यक बेजोड़ कलाकार छथि ,छात्रावस्थामे हिनक रचना आकाशवाणी दरभंगासँ प्रसारित भऽ चुकल अछि ।
गीत गायनमे रमन-सुमनक जोड़ी शीर्षपर छल संगहि गीत लिखैबला कवि अपनोसँ गीत गाबैत छलथि ।निरंजन झा स्वरचित हास्य समाचार पढ़ैत छलथि ।तबलापर सुनिलकान्त झा ,नाल/मृदंगपर जनार्दन झा आ धिरेन्द्र झा रहथि संगहि हारमोनियमपर इन्द्रदेव पाठक बैसै छलाह ।
विष्णुदेव पाठक ,चन्द्रशेखर कमती आ मुनेश्वर झा अपन हास्य अभिनयसँ हँसबैत-हँसबैत दर्शकक पेटमे दर्द उखाड़ि दैत छलथिन ।
नाट्य विधामे किछु कलाकार एहनो होइत अथि जे मंचपर नै आबै छथि मुदा हुनकर सहयोगक बिना नाटककेँ सफल नै बनाओल जा सकैछ ।एकटा प्रमुख किरदार होइ छै बैकग्राउण्ड(नेपथ्य) आवाज देनिहारक जाहिमे मुरारी पाठक ,राघवेन्द्र मिश्र आ शारदानन्द पाठक रहैत छलथिन ।उमा कमती ,सियाराम माहतोँ आ मणिकान्त झा बेजोड़ मेकप आर्टिस्ट छलथि ।नाटकक जरूरतिकेँ हिसाबसँ कलाकारकेँ एना सजबैत छलथि जे लागै मंचपर साक्षात चरित्र जीवन्त भऽ गेल अछि।पर्दा खिचिनाहरमे प्रमोद कमती आ सुधिर कमतीक उल्लेख करनाइ परम आवश्यक अछि ।किछु कलाकार अभिनयसँ दूर रहितो महत्वपूर्ण सहयोग दैत छलथि जाहिमे तृप्तिनारायण झा ,भूटकिन झा ,लक्ष्मी चौधरी ,बैजू चौधरी .राधा झा ,जोगी झा ,रामप्रकाश राय,आ प्रयाग मण्डल छलथि ।

बलराम पाठक अपन स्वरचित गीत आ कथाक माध्यमसँ किर्तन करैत छलाह ।हिनक गीत खाँटी मैथिली शब्दसँ भरल आ मैथिली लोकधुनसँ सजाओल रहैत छल ।एहि परम्पराकेँ एखन कन्हैया पाठक निमाहि रहल छथि ।गोपीकान्त पाठक स्वरचित मैथिली/संस्कृत गीतसँ भक्ति-भजन करैत छथि ।
नवकामे गोविन्द पाठक नीक उदघोषक आ अभिनेता छथि ।हिनका मैथिली युवा परिषद जमशेदपुरसँ मिथिला विभुतिक उपाधि भेटल अछि ,एखन ई मुम्बईमे रहि मैथिली/हिन्दी/भोजपूरी फिल्म/सिरियलमे काज करैत छथि । अभिलाष झा नाल ,हारमोनियम आ गायनमे सबसँ आगू छथि ।शम्भू पाठक नाल ,हारमोनियम ,गायन आ गीत लेखनमे पारंगत छथि ।सुधाकर झा नाल बजबैत छथि ।संतोष पाठक नाल ,हारमोनिय आ गायनमे गामे नै ,देशक कतेको प्रतिष्ठित मंचपर अपन नाम जगजगार केने छथि ।पिछला कतेको वर्षसँ विनोद पासवान मैथिली/भोजपूरी भक्ति गीत रचि किर्तन/भजन संध्याक जरूरति बनल छथि ।हिनक छोट भाए शिवकुमार पासवान दू-तीन वर्षसँ स्वरचित गीत गाबि दूर्गा पूजाक भजन संध्यामे वाह-वाही लुटने छथि ।अमित मिश्र सेहो किछु भक्ति गीत लिखि दुर्गा पूजा आ मंदिर सबपर गाबैत छथि ।
सोम-शानिकेँ होइ बला रमायण गोष्ठीमे मैथिलीए भाषाक प्रयोग होइत अछि ।मोटा-मोटी करियन गाम प्रतिभासँ संपन्न अछि आ मैथिलीक सेवामे सतत लागल अछि ।

प्रारम्भमे गाममे काली पूजाक अवसरपर विदेसिया आबैत छल मुदा ओ मात्र मैथिलीमे नाच करैत छल ।बादमे मिथिलाक बाहरकेँ विदेसिया मँगाओल जाए लागल जाहिसँ मैथिली कम आ भोजपूरी बढ़ऽ लागल ।बजारमे मैथिली गीत-संगीतक कमी आ भोजपूरीक नमरैत बजार सेहो मैथिली नाटकक पतनमे मुख्य योगदान देलक ।बदलैत समय ,बदलैत युवाक मानसिकता ,बढ़ैत फूहरता आ पुरान कलाकारक बढ़ैत उमरि बचल-खूचल मैथिली नाटककेँ तोड़ि-ताड़ि कऽ माँटिमे मिला देलक ।आ एहन समय आबि गेल जे मैथिली नाटक तँ छोरू ,हिन्दियो नाटकक मंचन बन्न भऽ गेल ।उदयन नाट्य कला परिषदक अंतीम मैथिली नाटक 2005मे रविभूषण पाठक लिखित "रिहर्सल" छल ।ई नाटक छठिक अवसरपर भेल छल जाहिमे एक दिन श्रीमती रंजना झाक गायन भेल छल ।
आब समय आबि गेल अछि जखन युवाकेँ आगू बढ़बाक चाही ।नाटककेँ जीयेबाक लेल युद्धस्तरपर प्रयास हेबाक चाही ।उदयन नाट्य कला परिषदे नै ,मिथिलाक सब गामक नाट्य परिषद विरहिन जकाँ तड़पैत बाट जोहि रहल अछि एकटा एहन बिहाड़िकेँ जे उड़ेने एतै एकरामे प्राण फूकै बला कलाकारकेँ ।एकर बन्न भेल नाड़ीकेँ बढ़ाबऽ बला डागडरकेँ।आशे नै ,पूर्ण विश्वास अछि जे गमैया नाटकक मंचन फेरसँ शुरू हएत आ अपन विजय पताका फहराएत ।

(एहि लेखमे शिवकुमार झा जीक विशेष सहयोग रहल ।)

अमित मिश्र

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

किछु शेर

1.सगरो तँ ढेहे उठल छै हत्याक यौ
खुट्टा बनल छी डटल दहि नै सकब हम

2.चन्दनसँ लपटल रहत साँपक भीड़ बड
गमकल पवन सन सदति बहि नै सकब हम

3. सब मनोरथ जरल पूरल नै मोर सऽख
बैंकमे बस घसल अठन्नी छै मोर सऽख

4.नीनक संग कतऽ पड़ेलें हमर सपना
चानक घोघ बनि लजेलें हमर सपना

5. झाँपि मुँह नैनक वाण ओ चला रहल छथि
मीठ दर्दक संगे रुधिर बहा रहल छथि

6. पाछूएसँ मुदा चलबै छाती तानि
निर्धन छी बड ,माँनू नै छी डरपोक

7. के कहलक जे आइसँ हम मरि गेलहुँ
फेरो आयब ,एखन हम सूतल छी

8. दारू जखन चढ़लै तँ होश उड़ि गेलै

मरु बनल जिनगी कोसक कोस उड़ि गेलै

रविवार, 22 जुलाई 2012

अरबी बहरमे ह्रस्व-दीर्घक फरिछौट

1 . कोनो भी जखन संयुक्त रहत त' ओहि संयुक्त वर्णक पहिल वर्ण दीर्घ भ' जाएत भले हीँ ओ ह्रस्व किए नै होइ ।
जेना- हर्ष -21 { एत' "र" आ "ष" संयुक्त अछि आ एकर पहील वर्ण "ह " अछि जे की ह्रस्व अछि मुदा संयुक्ताक्ष के पहिले वला वर्ण अछि तेँए इ दीर्घ भेल}

मज्जर-211 वा 22

2 . अनुस्वार सदिखन दीर्घ हएत ।

3 .चंद्रबिन्दू{ँ} ह्रस्व हएत ।

4 . जँ कोनो ह्रस्व वर्ण संग "आ , ई , ऊ , ए , ऐ ,ओ ,औ ,अं " केर मात्रा आएत त' ओ दीर्घ मानल जाएत ।
जेना - की , छी , जा , अंगा , धोती , दीर्घ अछि ।

5 . कोनो वर्ण विन मात्राक अछि त' ह्रस्व हएत संगे संग जँ "इ , उ " केर मात्रा संग अछि तखनो ह्रस्व हएत ।

6 . "न्ह" आ "म्ह" संयुक्ताक्षर बला नियम के नै मानै अछि । इ अपवाद अछि ।

7 . ह्रस्व के "1 वा U " आ दीर्घ के "2 वा ।" लिखल जाइ छै ।

8 . दू टा ह्रस्व जँ एकसाथ एक ठाम आएत त' ओकरँ बहरक हिसाबसँ एक टा दीर्घ मानल जा सकैए । गणितिय रूप मे 1+1= 2 अर्थात ह्रस्व+ह्रस्व= दीर्घ ।

जेना की
चलन-1 1 1
चलन- 2 1{चल-2 आ न-1}
चलन-1 2 {च- 1 आ लन-2}

एकरा शाइर अपन बहरक हिसाबसँ दीर्घ वा ह्रस्व राखि सकै छथि ।

9 . हमर जेना बुझल अछि ओहि हिसाबसँ " अः " आ " : " मात्रा संग वर्ण ह्रस्व होइत अछि ।